हाईटेक दीवार के साथ राम मंदिर की सुरक्षा में और क्या बदलने वाला है?

अयोध्या के राम मंदिर के दान गिनती केंद्र में कथित चोरी के खुलासे के बाद सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की योजना तैयार की गई है

Ram Mandir
राम मंदिर (फाइल फोटो)

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के साथ ही उसकी सुरक्षा हमेशा से सर्वोच्च प्राथमिकता रही है लेकिन हाल के महीनों में सामने आए दान गिनती केंद्र में कथित नकदी चोरी के मामले ने यह साफ कर दिया कि केवल बाहरी सुरक्षा पर्याप्त नहीं है. अब मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह नए ढांचे में ढालने की तैयारी शुरू हो गई है. इसका उद्देश्य केवल किसी आतंकी खतरे से निपटना नहीं, बल्कि निगरानी, जवाबदेही, तकनीकी नियंत्रण और मानव संसाधन के मेल से एक ऐसा सुरक्षा मॉडल विकसित करना है जो देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक परिसरों में मिसाल बन सके.

इसी रणनीति के तहत मंदिर परिसर के चारों ओर लगभग 3400 मीटर लंबी आधुनिक सुरक्षा दीवार बनाई जा रही है. इस परियोजना पर 100 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है. रक्षा मंत्रालय के उपक्रम इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) इसके निर्माण की जिम्मेदारी निभा रहा है. परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार करीब 750 मीटर दीवार का निर्माण पूरा हो चुका है और भूमि उपलब्धता के अनुसार काम आगे बढ़ रहा है.

करीब 14 फीट ऊंची और लगभग आधा मीटर चौड़ी यह दीवार पारंपरिक बाउंड्री वॉल नहीं होगी. इसे सेंसर आधारित सुरक्षा प्रणाली, AI निगरानी, अत्याधुनिक कैमरों, मिररलेस कैमरों, सर्च लाइट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा. दीवार का उद्देश्य केवल प्रवेश रोकना नहीं बल्कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तत्काल पता लगाकर सुरक्षा एजेंसियों को वास्तविक समय में अलर्ट देना होगा.

AI, सेंसर और 25 वॉच टावरों से बनेगा इंटेलिजेंट सिक्योरिटी नेटवर्क

राम मंदिर की नई सुरक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका तकनीक आधारित स्वरूप है. मंदिर परिसर में पहले से लगे सीसीटीवी कैमरों को अब AI फीचर से अपग्रेड किया जा रहा है. ये कैमरे केवल रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि भीड़ में संदिग्ध चेहरों की पहचान, असामान्य गतिविधियों का विश्लेषण और श्रद्धालुओं की संख्या का वास्तविक समय में आकलन भी कर सकेंगे.

सुरक्षा दीवार के साथ 25 वॉच टावर भी बनाए जा रहे हैं. इनमें से सात टावरों का निर्माण शुरू हो चुका है. स्थान के अनुसार इनकी ऊंचाई 25 से 37 फीट तक होगी ताकि पूरे परिसर और आसपास के क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखी जा सके. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक धार्मिक परिसरों की सुरक्षा केवल हथियारबंद जवानों से सुनिश्चित नहीं की जा सकती. अब सुरक्षा का आधार इंटेलिजेंट सर्विलांस, डेटा एनालिटिक्स और रियल टाइम रिस्पॉन्स सिस्टम बन चुका है.

परियोजना की लागत भी इसी बहुस्तरीय व्यवस्था को दिखाती है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट दीवार के सिविल निर्माण पर लगभग 40 करोड़ रुपए खर्च करेगा. वहीं सेंसर, कैमरे, AI आधारित निगरानी प्रणाली और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा उपकरणों पर होने वाला खर्च उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी. दोनों मदों को मिलाकर कुल लागत 100 करोड़ रुपए से अधिक पहुंचने का अनुमान है.

दान चोरी प्रकरण ने बदल दी पूरी सुरक्षा रणनीति

राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में यह बड़ा बदलाव केवल भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए नहीं किया जा रहा बल्कि इसके पीछे हाल में सामने आया दान गिनती केंद्र में कथित चोरी का मामला भी एक महत्वपूर्ण कारण है. स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती जांच में नकदी गिनती केंद्र के भीतर बार-बार नकदी चोरी होने के संकेत मिले. प्रारंभिक जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते हुए आउटसोर्स कर्मचारियों सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया.

जांच के दौरान आरोपियों से नकदी, सोना, वाहन और निवेश संबंधी दस्तावेज भी बरामद किए गए. जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एक महीने से अधिक की सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में लगभग 70 संदिग्ध घटनाओं का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के उल्लंघन, अपर्याप्त निगरानी, कमजोर फ्रिस्किंग व्यवस्था और कैश काउंटिंग प्रक्रिया की प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव जैसी कई गंभीर कमियों की ओर संकेत किया गया है. साथ ही दान प्रबंधन की निगरानी कर रहे अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए गए. यही वजह है कि जांच अब केवल कथित चोरी तक सीमित नहीं रही.

पुलिस मनी ट्रेल, बैंक खातों, निवेश और दान प्रबंधन प्रणाली में संभावित संस्थागत कमियों की भी जांच कर रही है. उम्मीद है कि SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट में प्रशासनिक और सुरक्षा सुधारों के लिए व्यापक सिफारिशें देगी. इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी हाई-सिक्योरिटी परिसर में केवल बाहरी सुरक्षा मजबूत होना पर्याप्त नहीं है. आंतरिक प्रक्रियाओं की निगरानी, तकनीकी ऑडिट, जवाबदेही और नियमित समीक्षा भी उतनी ही आवश्यक है. यही कारण है कि अब सुरक्षा ढांचे का पुनर्गठन केवल भौतिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रखा गया है.

स्थाई SSF तैनाती से संस्थागत होगी सुरक्षा व्यवस्था

राम मंदिर की नई सुरक्षा रणनीति का दूसरा बड़ा स्तंभ मानव संसाधन को स्थाई स्वरूप देना है. इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF) की छठी बटालियन के तहत 1,155 स्थायी पदों के सृजन को मंजूरी दी है. 9 जुलाई 2026 को गृह विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश के अनुसार ये पद पहले से संचालित अस्थाई पदों का स्थान लेंगे. मंजूर किए गए पदों में एक कमांडेंट, एक डिप्टी कमांडेंट, पांच असिस्टेंट कमांडेंट, 33 इंस्पेक्टर, 66 सब इंस्पेक्टर, 174 हेड कॉन्स्टेबल, 761 कॉन्स्टेबल, 72 कॉन्स्टेबल ड्राइवर, 19 कंप्यूटर ऑपरेटर सहित तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ के अन्य पद शामिल हैं.

सरकार का मानना है कि अस्थाई तैनाती की बजाय प्रशिक्षित और स्थाई सुरक्षा बल की नियुक्ति से जवाबदेही बढ़ेगी और सुरक्षा व्यवस्था अधिक पेशेवर बनेगी. फिलहाल अस्थाई पदों पर कार्यरत कर्मचारी अगले आदेश तक काम करते रहेंगे, जबकि स्थायी पदों पर नियुक्तियां नियमानुसार अलग प्रक्रिया से होंगी. सुरक्षा समीक्षा के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया.

जांच में यह प्रश्न भी उठा कि कुछ अधिकारी वर्षों तक एक ही संवेदनशील स्थान पर तैनात रहे, जिससे संस्थागत निगरानी कमजोर हो सकती है. जांचकर्ताओं का मानना है कि हाई-सिक्योरिटी प्रतिष्ठानों में नियमित स्थानांतरण और जिम्मेदारियों का रोटेशन सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए. इसी सोच के तहत भविष्य में महत्वपूर्ण सुरक्षा और निगरानी पदों पर लंबे समय तक एक ही अधिकारी की तैनाती से बचने की नीति पर भी विचार किया जा रहा है.

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