राजस्थान में ‘VIP कल्चर’ पर कार्रवाई के बीच खतरनाक होती सड़कें!

राजस्थान में मोमोp का ठेला लगाकर जीवनयापन करने वाली दो बहनों की आपबीती और सड़क हादसे में मां-बेटे की मौत ने आम नागरिकों के प्रति सरकारी असंवेदनशीलता को उजागर कर दिया है

भजन लाल शर्मा के काफिले की सुरक्षा के कारण मोमो ठेला चलाने वाली बहनों पर विवादित कार्रवाई हुई
भजन लाल शर्मा के काफिले की सुरक्षा के कारण मोमो ठेला चलाने वाली बहनों पर विवादित कार्रवाई हुई

राजस्थान पुलिस की 'VIP कल्चर' के खिलाफ चल रही कार्रवाई के आंकड़े प्रभावशाली नजर आते हैं. करीब तीन हफ्तों में पूरे राज्य में 1.42 लाख से ज्यादा वाहनों का चालान किया गया. सबसे ज्यादा कार्रवाई वाहनों पर लगी काली फिल्म, फैंसी नंबर प्लेट, गैर-आधिकारिक पदनाम लिखने, मॉडिफाइड गाड़ियों, प्रेशर हॉर्न और बिना अनुमति वाली फ्लैश लाइट पर हुई है.

कागजों पर देखें तो यह लंबे समय से भारतीय सड़कों पर हावी VIP संस्कृति के खिलाफ सख्त अभियान लगता है लेकिन जयपुर की दो घटनाओं ने इस अभियान के भीतर मौजूद एक गंभीर विरोधाभास को सामने ला दिया है. दरअसल, 19 जून को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के काफिले के लिए रास्ता खाली करवा रही पुलिस ने कथित तौर पर जगतपुरा के महल रोड पर मोमोज का एक ठेला पलट दिया.

ठेला पर मोमोज बेचकर जीवनयापन करने वाली दो बहनों रेशू गुप्ता और खुशबू गुप्ता का कहना है कि उन्होंने पुलिस से कुछ मिनट रुकने की गुहार लगाई थी क्योंकि स्टीमर में खौलता हुआ पानी था लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई. पुलिसकर्मियों ने ठेले को एक तरफ धकेल कर पलट दिया. इससे गर्म पानी रेशू के सीने, हाथ और जांघ पर गिर गया, जिससे वे झुलस गईं.

दोनों बहनों रेशू गुप्ता और खुशबू गुप्ता की यह कहानी सिर्फ चोट तक सीमित नहीं है. कोविड महामारी के दौरान उत्तर प्रदेश में दोनों बहनों ने अपने पिता को खो दिया था. हालात ने परिवार को जयपुर आने के लिए मजबूर कर दिया. एक बहन ने फिजियोथेरेपी की पढ़ाई की जबकि दूसरी ने BSC की डिग्री हासिल की. हालांकि, इसके बाद रोजगार नहीं मिलने पर अपनी विधवा मां का सहारा बनने और परिवार चलाने के लिए उन्हें मोमोज का छोटा-सा ठेला लगाना पड़ा.

महल रोड की इस घटना के बाद कांग्रेस पार्टी ने सरकारी कार्रवाई को लेकर कई असहज सवाल उठाए हैं. कांग्रेस का कहना है कि क्या कोई सरकार वास्तव में VIP कल्चर खत्म करने का दावा कर सकती है खासकर तब जब VIP आवाजाही के लिए आम लोगों को परेशान होना पड़ रहा हो?

एक हफ्ते बाद BJP सरकार ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए रेशू के इलाज का पूरा खर्च उठाने का भरोसा दिया. परिवार को रोजगार के लिए डेयरी बूथ का परमिट भी दिया गया. साथ ही घटना के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे पुलिसकर्मियों का तबादला पुलिस लाइंस कर दिया गया.

निष्पक्ष रूप से देखें तो दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बनने के बाद भजनलाल शर्मा ने कई फैसलों के जरिए अलग तरह की छवि बनाने की कोशिश की. कई बार उन्हें ट्रैफिक सिग्नल पर रुकते और आम लोगों को कम से कम परेशानी देने की कोशिश करते देखा गया. हालांकि दिसंबर 2024 में एक तेज रफ्तार टैक्सी मुख्यमंत्री के काफिले से टकरा गई थी, जिसमें लोगों की मौत भी हो गई थी. इसके बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां VIP काफिले से पहले कोई जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं दिखतीं.

इसका असर पूरे जयपुर में दिखाई देता है. VIP आवाजाही के दौरान सड़कें बंद कर दी जाती हैं, रास्ते बदल दिए जाते हैं और लंबे समय तक ट्रैफिक रोक दिया जाता है. यह सिर्फ मुख्यमंत्री और राज्यपाल के लिए नहीं, बल्कि मंत्रियों, दिल्ली से आने वाले गणमान्य लोगों और दूसरे राज्यों के नेताओं के लिए भी होता है. इसका मतलब है कि हजारों लोगों को सड़क पर इंतजार करना पड़ता है जब तक कोई VIP वहां से गुजर न जाए.

यही वजह है कि मोमोज ठेले की यह घटना सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है. यह दिखाती है कि VIP कल्चर का मतलब सिर्फ हूटर या फैंसी नंबर प्लेट नहीं है. असली VIP संस्कृति वह सोच है, जिसमें कुछ ताकतवर लोगों की सुविधा के लिए आम नागरिकों, उनकी आजीविका और उनके समय को नजरअंदाज किया जाता है.

यह घटना एक और सवाल भी खड़ा करती है कि क्या यह अभियान राजस्थान की सड़क सुरक्षा की असली समस्या से निपट रहा है? हर दिन अखबारों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से दर्दनाक सड़क हादसों की खबरें छपती हैं. इसी अभियान के दौरान कई जानलेवा हादसे सुर्खियों में रहे जिनमें चार भाइयों की मौत वाला हादसा भी शामिल था.

हाल ही में अखबारों में मां-बेटे की सड़क दुर्घटना में मौत की तस्वीरों के साथ खबरें प्रकाशित हुईं, जिन्होंने रोजाना हो रहे हादसों की भयावहता को दिखाया. अब देखना होगा कि क्या ये खबरें प्रशासन को ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर कर पाएंगी.

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मौतें तेज रफ्तार, खतरनाक ओवरटेकिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने, शराब पीकर ड्राइविंग, लेन अनुशासन की कमी, गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल और ट्रैफिक इंजीनियरिंग के नियमों के कमजोर पालन की वजह से होती हैं. हालांकि इन आदतों के कारण होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए शायद ही कभी कार्रवाई होती है.

उदाहरण के लिए, कई चालक ट्रैफिक सिग्नल पर गलत लेन में जाकर रुकते हैं और मुड़ने की तैयारी में एक साथ कई लेन घेर लेते हैं. इससे अव्यवस्था फैलती है और अचानक टकराव की स्थिति बनती है. इसी तरह, पैदल चलने वाले भी अक्सर व्यस्त चौराहों पर पैदल यात्री सिग्नल और जेब्रा क्रॉसिंग की अनदेखी कर सड़क पार करते हैं. ऐसे मामलों में कार्रवाई बहुत कम होती है.

अगर फिर से VIP कल्चर के खिलाफ चल रहे अभियान पर लौटें तो पुलिस के आंकड़े भी असंतुलन दिखाते हैं. 1.42 लाख से ज्यादा चालानों में से 53,000 से अधिक काली फिल्म के लिए, 36,000 से ज्यादा नंबर प्लेट के लिए, करीब 20,000 वाहनों पर लिखे नाम और पदनाम के लिए और 10,000 से अधिक फ्लैशर और हूटर के लिए काटे गए.

ये सभी ऐसे उल्लंघन हैं, जिन्हें आसानी से देखा, फोटो खींचा और प्रचारित किया जा सकता है. हालांकि, सिर्फ दिखने वाले उल्लंघनों को ही असरदार कार्रवाई नहीं माना जा सकता. किसी भी ट्रैफिक अभियान की असली सफलता इस बात से तय होती है कि सड़कें कितनी सुरक्षित हुईं, हादसे कितने कम हुए और क्या आम लोगों को खुद को पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस होने लगा.

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