राजस्थान : बीजेपी से बगावत, पीएम मोदी का कॉल और अब प्रदेश अध्यक्ष का पद! क्या है मदन राठौड़ की कहानी?
मदन राठौड़ को सीपी जोशी की जगह पर राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर दूसरी बार बड़ी जिम्मेदारी दी गई है

ये 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव की बात है. पाली जिले से आने वाले बीजेपी के मदन राठौड़ का लगातार दूसरी बार टिकट कट गया था. इसके बाद उन्होंने बागी तेवर अख्तियार कर लिए. राज्य में पार्टी के इस वरिष्ठ नेता ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सुमेरपुर सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया.
तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर थी. बताते हैं कि इसके बाद उन्होंने मदन राठौड़ से फोन पर बात की. इसका असर यह हुआ कि उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया और बीजेपी उम्मीदवार जोराराम कुमावत के लिए जनसंपर्क किया. कुमावत ने यहां से अच्छी जीत दर्ज की.
मदन राठौड़ को पार्टी नेतृत्व की बात मानने का इनाम पहले राज्यसभा में सांसद के तौर पर मिला और अब सीपी जोशी को हटाकर प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर दूसरी बार उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के लिए सारे कयासों को धत्ता बताते हुए भाजपा ने मदन राठौड़ को अपना उम्मीदवार घोषित किया था और वे राज्यसभा के लिए निर्विरोध सांसद चुने गए.
मदन राठौड़ राजस्थान के पाली जिले के रायपुर कस्बे के रहने वाले हैं. वे 2003 से 2008 और 2013 से 2018 तक दो बार पाली जिले के सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे हैं. बेहतर सांगठनिक क्षमता के कारण राठौड़ को भाजपा ने चार बार पाली जिले का अध्यक्ष बनाया.
संगठन के अलावा राठौड़ का संसदीय नियमों की भी बेहतर जानकारी है. वे वसुंधरा राजे के दूसरे कार्यकाल में विधानसभा में सत्ता पक्ष के उप मुख्य सचेतक भी रहे हैं. राठौड़ 1962 में संघ से जुड़े थे और 1970 के दशक में उन्होंने इस संगठन के प्रचारक के तौर पर भी काम किया.
दो बार विधायक चुने गए मदन राठौड़ का भाजपा ने तीन बार टिकट काटा. 2008, 2018 और 2023 में पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया. 2008 में जब मदन राठौड़ का टिकट काटा गया तब राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष ओम माथुर थे. उस समय राठौड़ का टिकट काटे जाने का विवाद काफी गहराया था.
राजस्थान की ओर से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए भेजे गए दस नामों को हटाकर मदन राठौड़ को इस पद की जिम्मेदारी दी गई है. इससे पहले लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सबसे हॉट सीट बाड़मेर-जैसलमेर की जिम्मेदारी भी मदन राठौड़ को दी गई थी. यह सीट गंवाने के बाद मदन राठौड़ ने कहा था, "मुझे पार्टी ने बाड़मेर जैसलमेर के लिए थोड़ी देरी से आदेश दिया. तब तक नामांकन वापस लेने की तारीख निकल चुकी थी. वरना मुझे पूरा भरोसा है कि मैं रविंद्र सिंह भाटी (शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक) को निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ने के लिए मना लेता."
मदन राठौड़ मूल ओबीसी श्रेणी में शामिल घांची समुदाय से आते हैं. वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक त्रिभुवन कहते हैं, ‘‘भाजपा 2014 के बाद से ही नेतृत्व को लेकर प्रयोगशील है. मदन राठौड़ भी इसी प्रयोग की देन हैं. हालांकि, राजस्थान में इस समुदाय के मतदाताओं की तादाद बहुत कम है, लेकिन पार्टी ने अपने परंपरागत वोट बैंक मूल ओबीसी को पक्ष में लाने के लिए मदन राठौड़ पर दांव खेला है.’’ मदन राठौड़ की नियुक्ति को लेकर वरिष्ठ पत्रकार विजय विद्रोही कहते हैं, ‘‘राजस्थान में इस समय कई गुटों में बंटी भाजपा को एक साथ लेकर चलना बड़ी चुनौती है और मदन राठौड़ में वह क्षमता है कि वे सबको साथ लेकर चल सकते हैं.’’
हालांकि, चुनौतियां तो मदन राठौड़ के सामने भी कम नहीं हैं. अगले एक साल में राजस्थान में पांच विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव होने वाले हैं. उसके बाद निकाय और पंचायत चुनाव होंगे. अब यह राठौड़ पर है कि वे नाराज और बागी कार्यकर्ताओं को साथ लाकर किस तरह इन चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर करते हैं. इसके अलावा संगठन में परिवर्तन, पार्टी में निष्क्रय या छोड़कर जाने वाले मूल कार्यकर्ताओं को वापस जोड़ना और सरकार व संगठन के बीच तालमेल बनाना भी मदन राठौड़ के सामने प्रमुख चुनौती होगा.
राजस्थान बीजेपी में आगे और भी बदलाव हो सकते हैं
संगठन के मुखिया बदलने के साथ ही अब अन्य पदों पर भी बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. सीपी जोशी के साथ ही राजस्थान के प्रदेश प्रभारी को भी बदल दिया गया है. एक साल पहले राजस्थान के प्रभारी बनाए गए प्रह्लाद जोशी की जगह कर्नाटक में प्रभारी का दायित्व संभाल रहे राधा मोहन दास अग्रवाल को राजस्थान का नया प्रभारी बनाया गया है. अग्रवाल राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं. भाजपा की राष्ट्रीय सचिव और महिला मोर्चा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया राहटकर राजस्थान की सह-प्रभारी बनाई गई हैं.
मदन राठौड़ पर जहां प्रदेश में संगठन की अपनी नई टीम तैयार करने का जिम्मा है, वहीं 15 जनवरी 2024 से राजस्थान भाजपा में संगठन महामंत्री का पद भी खाली चल रहा है. आमतौर पर इस पद पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पृष्ठभूमि से जुड़े नेता को नियुक्त किया जाता है. राजस्थान में पिछले साढ़े छह साल से इस पद की जिम्मेदारी निभा रहे चंद्रशेखर को राजस्थान से हटाकर तेलंगाना भेजने के बाद से यह पद खाली है.
चंद्रशेखर उत्तर प्रदेश में संघ के प्रचारक रहे हैं. बताया जा रहा है कि केरल में 31 जुलाई से 2 अगस्त तक चलने वाली संघ की समन्वय बैठक में ही यह तय होगा कि संगठन महामंत्री पद पर संघ के किसी नेता को नियुक्ति दी जाए या नहीं. अगर नियुक्ति दी जानी है तो वह नाम भी इसी बैठक में तय होगा. इसमें संघ और उसके सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे.
साल 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले 2017 में उत्तर प्रदेश में संघ के क्षेत्रीय प्रचारक चंद्रशेखर को राजस्थान का संगठन महामंत्री नियुक्त किया गया था. उनसे पहले करीब 9 साल तक राजस्थान में संगठन महामंत्री का पद खाली रहा. इससे पहले 2008 में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ हुए विवादों के चलते तत्कालीन संगठन महामंत्री प्रकाशचंद्र को वापस बुला लिया गया था. तब 2008 से 2017 तक संगठन महामंत्री का पद खाली रहा.
सांगठनिक बदलावों के साथ ही राजस्थान में संवैधानिक बदलावों की भी शुरुआत हो गई है. कलराज मिश्र की जगह महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हरिभाऊ किसानराव बागड़े को राजस्थान का नया राज्यपाल बनाया गया है. राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने 26 जुलाई को देर रात इस संबंध में आदेश जारी किए.