पिनराई विजयन पर भ्रष्टाचार के मामले में दर्ज FIR ने बढ़ाई CPM की मुश्किल

केरल के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पिनराई विजयन और उनके दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं. दोनों मामलों में विजयन की बेटी टी. वीणा दूसरे नंबर की आरोपी हैं

पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (फाइल फोटो)

केरल हाई कोर्ट ने विपक्ष के नेता और CPM के वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन, उनके दामाद और विधायक पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ कथित रिश्वत मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है. यह मामला विजयन की बेटी टी. वीणा की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) से जुड़ा है. इस आदेश को पूर्व मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

हाई कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देश का पालन करते हुए राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) ने 12 अक्टूबर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दो अलग-अलग मामले दर्ज किए. दोनों मामलों में विजयन और रियास को पहला आरोपी बनाया गया है, जबकि वीणा दूसरे नंबर की आरोपी हैं.

उसी दिन विजयन, रियास और वीणा ने हाई कोर्ट की दो जजों की पीठ के सामने याचिका दायर कर एकल पीठ के आदेश को रद्द करने की मांग की. इस पीठ में जस्टिस के. नटराजन और जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन शामिल हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एकल पीठ ने उनकी बात सुने बिना आदेश दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है.

9 अक्टूबर को हाई कोर्ट के जज ए. बदरुद्दीन ने वकील और सामाजिक कार्यकर्ता के.एम. शाहजहां की याचिका पर VACB को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था.

विजयन ने अपने, वीणा और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लगातार खारिज किया है. उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है. CPM की राज्य इकाई और पार्टी नेतृत्व ने भी अपने पूर्व मुख्यमंत्री का खुलकर समर्थन किया है. पार्टी ने इसे कांग्रेस और BJP की मिलीभगत बताया है. वहीं, मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा है कि "कानून अपना काम करेगा."

विजयन की बेटी वीणा (फाइल फोटो)

शाहजहां ने हाई कोर्ट की एकल पीठ के सामने अपनी याचिका में कहा था कि केरल के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने CMRL-एक्सालॉजिक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट की शुरुआती जांच का आदेश दिया था लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई थी.

ED ने DGP को 25 पन्नों की एक रिपोर्ट सौंपी थी. इसमें दावा किया गया था कि मामले में मनी लॉन्ड्रिंग हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक CMRL से वीणा को मिले पैसे असल में विजयन के लिए रिश्वत थे. इसमें यह भी दावा किया गया कि पूर्व पर्यटन मंत्री और वीणा के पति रियास ने मनी लॉन्ड्रिंग में बिचौलिए की भूमिका निभाई.

ED की रिपोर्ट में दावा किया गया कि जांच के दौरान पता चला कि CMRL ने आईटी कंसल्टेंसी और मार्केटिंग सेवाओं के लिए वीणा को 2.78 करोड़ रुपए दिए थे. आरोप है कि कंपनी ने सेवा स्तर समझौते के तहत एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को हर महीने 3 लाख रुपए देने का करार किया था. साथ ही, वीणा को व्यक्तिगत रूप से आईटी और मार्केटिंग सलाहकार नियुक्त किया गया था जिसके लिए उन्हें हर महीने 5 लाख रुपए दिए जाने थे. 

आरोप है कि CMRL को ये सेवाएं कभी दी ही नहीं गईं. ED की रिपोर्ट के मुताबिक CMRL ने वीणा को 45 लाख रुपए का भुगतान भी किया था और इस रकम पर टीडीएस काटा गया था लेकिन वीणा ने इसके लिए कोई बिल नहीं दिया था.

ED के मुताबिक जनवरी से अक्टूबर 2017 के शुरुआती दौर में बिना किसी सेवा के भुगतान और बिलों की अनुपस्थिति से साफ होता है कि यह एक-दूसरे को फायदा पहुंचाने का समझौता था. एजेंसी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान वीणा CMRL को दी गई सेवाओं के संबंध में कोई दस्तावेजी या इलेक्ट्रॉनिक सबूत पेश नहीं कर सकीं.

इसके अलावा, CMRL के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी पी. सुरेश कुमार ने हलफनामा देकर कहा कि वीणा या उनकी कंपनी ने दावा की गई सेवाएं कभी नहीं दीं. उनके मुताबिक हर महीने की फीस जारी करने का निर्देश सीधे CMRL के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एस.एन. शशिधरन कार्था देते थे. इसके लिए कंपनी के अकाउंट डिपार्टमेंट की सामान्य जांच प्रक्रिया को दरकिनार किया गया था.

हालांकि बाद में सुरेश कुमार और कार्था दोनों ने ED को दिए अपने बयान वापस ले लिए और केंद्रीय एजेंसी पर डराने-धमकाने का आरोप लगाया.

ED के मुताबिक 27 मई को तिरुवनंतपुरम में विजयन के आवास पर छापे के दौरान वीणा की बताई जा रही एक डायरी जब्त की गई थी. एजेंसी का दावा है कि उसमें अलग-अलग माध्यमों से 2,82,600 यूएई दिरहम के विदेशी लेनदेन का जिक्र था.

हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किए जाने वाले मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले शुरुआती जांच जरूरी नहीं है. 

अदालत ने अपने आदेश में कहा, "अगर मिली जानकारी से पहली नजर में किसी संज्ञेय अपराध का पता चलता है, तो प्रारंभिक जांच की जरूरत नहीं है. प्रारंभिक जांच का मकसद जानकारी की सत्यता परखना नहीं बल्कि यह देखना है कि क्या उससे किसी संज्ञेय अपराध का पता चलता है."

अदालत ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामलों में शुरुआती जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का DGP का फैसला गैरकानूनी था. कोर्ट ने सतर्कता निदेशक को FIR दर्ज करने के साथ विजयन और रियास के खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया.

अब मामले दर्ज होने के बाद विजयन के परिवार को केंद्रीय और राज्य, दोनों एजेंसियों की जांच का सामना करना पड़ रहा है. परिवार के पास कानूनी लड़ाई लड़ने और इसके राजनीतिक असर को सीमित करने की कोशिश करने का ही विकल्प नजर आता है.

विजयन पर भ्रष्टाचार के आरोप पहली बार नहीं लगे हैं. 1990 के दशक का एसएनसी लवलिन मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. 2020 में राजनयिक माध्यमों से सोने की तस्करी के मामले में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री विजयन पर आरोप लगाए गए थे.

अब देखना होगा कि विजयन और CPM इस राजनीतिक चुनौती से कैसे निपटते हैं. जानकारों का कहना है कि विपक्ष के नेता के पद से उनके इस्तीफा देने की संभावना कम है क्योंकि विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार का मुकाबला करने के लिए CPM  को उनकी जरूरत है.

CPM समर्थित पूर्व लोकसभा सांसद और वकील डॉ. सेबेस्टियन पॉल का कहना है, "पिनराई विजयन को अपना मुकदमा लड़ने और अपनी गरिमा की रक्षा करने के लिए किसी सार्वजनिक पद के संरक्षण की जरूरत नहीं है. लोकतांत्रिक मानदंड और अच्छी परंपराएं राजनीतिक नेताओं के लिए मार्गदर्शक होनी चाहिए. इस लिहाज से जांच पूरी होने तक उनके लिए पद छोड़ना बेहतर विकल्प होगा."

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