अमित शाह के ‘दखल’ के बाद भी NCP के दोनों गुटों में क्यों नहीं बन रही बात?
सुनेत्रा और पार्थ पवार से नाराज NCP के वरिष्ठ नेताओं ने हाल ही में अमित शाह से मुलाकात की. इसके बाद पार्टी के शरद पवार गुट के साथ विलय की चर्चा तेज हो गई है. हालांकि दोनों गुटों के बीच सुलह की राह अब भी आसान नहीं दिख रही

सुनेत्रा पवार के साथ NCP के नेता (फाइल फोटो)
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर नई दरारें सामने आई हैं. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इस दौरान पार्टी के पुराने नेताओं और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके बेटे एवं राज्यसभा सांसद पार्थ के नेतृत्व वाले गुट के बीच बढ़ते मतभेदों पर चर्चा की गई.
बताया जा रहा है कि इस बैठक में NCP और NCP (शरदचंद्र पवार) के विलय की संभावना पर भी चर्चा हुई. हालांकि सूत्रों का कहना है कि NCP (SCP यानी पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार अगले साल की शुरुआत में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के नतीजे आने तक इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहते.
सुनेत्रा और उनके बेटे भी प्रतिद्वंद्वी NCP के साथ राजनीतिक सुलह करने के इच्छुक नहीं बताए जा रहे जबकि खबरों के मुताबिक BJP ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है. NCP के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जब तक BJP की ओर से पहल नहीं होती तब तक दोनों गुटों के बीच दूरियां कम होने की संभावना नहीं है.
1 नवंबर को NCP के वरिष्ठ नेताओं के एक समूह ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की. इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल, महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख और लोकसभा सांसद सुनील तटकरे, राज्य मंत्री छगन भुजबल, पूर्व मंत्री दिलीप वलसे पाटिल और धनंजय मुंडे के साथ पूर्व सांसद समीर भुजबल शामिल थे.
NCP के एक नेता ने बताया कि बैठक के दौरान पार्टी में पार्थ की बढ़ती दखलंदाजी और पुराने नेताओं को किनारे करने की उनकी कोशिशों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया. इस मामले में अमित शाह से दखल देने की मांग भी की गई.
इसका मतलब यह हो सकता है कि केंद्रीय गृह मंत्री अब NCP में होने वाले घटनाक्रम पर करीब से नजर रखेंगे. राज्य में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को पहले से ही अमित शाह के इशारे पर काम करने वाले गुट के तौर पर देखा जाता है.
वहीं 2 नवंबर को NCP नेताओं ने मुंबई में सुनेत्रा के आधिकारिक आवास पर उनसे मुलाकात की. बताया जा रहा है कि पार्थ महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में NCP के आठ में से ज्यादातर चेहरों को बदलना चाहते हैं. NCP वित्त मंत्रालय भी अपने पास चाहती है. जनवरी में विमान हादसे में निधन से पहले यह विभाग उपमुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख अजित पवार के पास था.
हाल के दिनों में NCP के नामों की सिफारिश करने और संगठन में नियुक्तियां कराने में पार्थ का असर तेजी से दिख रहा है. इनमें विधान परिषद सदस्य (MLC) के तौर पर जीशान सिद्दीकी और विक्रम संजय काकड़े की नियुक्ति के साथ महिला इकाई की अध्यक्ष और मुख्य प्रवक्ता के तौर पर क्रमशः वैशाली नागवाड़े और उमेश पाटिल की नियुक्ति शामिल है.
सिद्दीकी को NCP का मुंबई अध्यक्ष भी बनाया गया. इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता सिद्धार्थ कांबले ने मुंबई इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. पार्थ के आसपास के एक छोटे लेकिन ताकतवर गुट को NCP के कामकाज पर हावी होता देखा जा रहा है.
हालांकि उमेश पाटिल ने पार्टी में किसी भी तरह के मतभेद होने से इनकार किया है. उन्होंने दावा किया कि अमित शाह के साथ यह बैठक पहले से तय थी और एक औपचारिक मुलाकात थी.
महाराष्ट्र में विधान परिषद की दो स्नातक सीटों पर NCP (SCP) की जीत से NCP में चिंता बढ़ गई है. पार्टी नेताओं का कहना है कि NCP की छवि और खराब होने तथा चुनावों में उसके कमजोर प्रदर्शन का असर महाराष्ट्र की महायुति सरकार की लोकप्रियता पर भी पड़ सकता है.
NCP के एक नेता ने कहा, "अमित शाह के साथ बैठक का मकसद NCP नेतृत्व को कड़ा संदेश देना था कि हम उन्हें बताए बिना भी BJP के राष्ट्रीय नेतृत्व से मिल सकते हैं. हम सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री या NCP का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले को चुनौती नहीं दे रहे हैं लेकिन इस बात से नाराज हैं कि पार्टी एकतरफा तरीके से चलाई जा रही है."
एक अन्य वरिष्ठ नेता ने दावा किया, "NCP (SCP) के साथ विलय के मुद्दे पर भी चर्चा हुई." उन्होंने कहा कि सुनेत्रा और पार्थ इसके पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इससे पार्टी में उनका प्रभाव सीमित हो जाएगा. बताया जा रहा है कि शरद पवार भी अभी इंतजार करना चाहते हैं.
जब NCP के दोनों गुटों के बीच निकट भविष्य में विलय की संभावना के बारे में पूछा गया तो शरद पवार का कहना था, "अभी नहीं." यह पूछे जाने पर कि क्या आने वाले महीनों में हालात नहीं बदले तो सुनेत्रा और पार्थ को पार्टी में किनारे किया जा सकता है, उन्होंने कहा, "राजनीति में कुछ भी हो सकता है."
अजित पवार के जीवित रहते दोनों NCP के विलय की बात आगे बढ़ चुकी थी और बातचीत निर्णायक दौर में पहुंच गई थी लेकिन NCP (SCP) के कई सूत्रों ने बताया कि अब यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया है. इसकी वजह सुनेत्रा और पार्थ का विरोध है.
इसके अलावा NCP (SCP) का नेतृत्व हाल में युवाओं में बढ़ती नाराजगी के बाद राजनीतिक माहौल को भी परखना चाहता है. NCP (SCP) के एक नेता ने कहा, "सत्तापक्ष में पहले से ही बहुत ज्यादा भीड़ है. सवाल यह है कि अगर हम महायुति के साथ जाते हैं तो हमारे वरिष्ठ नेताओं को क्या मिलेगा."
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि NCP में टूट की आशंका है और निचले तथा मध्यम स्तर के कार्यकर्ता और पदाधिकारी बड़ी संख्या में NCP (SCP) का रुख कर सकते हैं. NCP को शिंदे की उस कोशिश से भी निपटना पड़ रहा है जिसके तहत वह अजित पवार के निधन के बाद मराठा समुदाय के एक बड़े नेता की खाली जगह भरना चाहते हैं जिसका असर पूरे महाराष्ट्र में हो.
राजनीतिक विश्लेषक विजय चोरमारे के मुताबिक BJP, शिवसेना और NCP (SCP) के अलावा NCP के नेताओं को भी अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा, "संकट यह है कि NCP के पास मजबूत नेतृत्व नहीं है. आखिरकार चुनाव तो मजबूत नेता के नेतृत्व में ही लड़ना पड़ता है."
NCP के भीतर मतभेद मार्च में सुनेत्रा की ओर से चुनाव आयोग (EC) को लिखे गए पत्र के बाद खुलकर सामने आए थे. इस पत्र में उन्होंने कहा था कि 28 जनवरी से 26 फरवरी के बीच NCP की ओर से चुनाव आयोग को भेजे गए किसी भी पत्र पर विचार नहीं किया जाना चाहिए. इसे प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के लिए झटके के तौर पर देखा गया था.
दावा किया जाता है कि पटेल और तटकरे ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा था कि NCP के संविधान में बदलाव किया गया है और सभी अधिकार कार्यकारी अध्यक्ष को सौंप दिए गए हैं. आरोप है कि यह पार्टी संगठन पर कब्जा करने की कोशिश थी.
29 अप्रैल को NCP की ओर से चुनाव आयोग को सौंपी गई पदाधिकारियों की सूची में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नाम भी नहीं थे. हालांकि बाद में सुनेत्रा ने सोशल मीडिया पर इसे 'लिखने-पढ़ने में हुई गलती' बताया था लेकिन विरोधी गुट के नेताओं का कहना है कि इस गलती को अब तक सुधारा नहीं गया है.
बताया जाता है कि सुनेत्रा इस बात से भी नाराज थीं कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने उन्हें बिना बताए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी. हालांकि, तटकरे और पटेल ने पार्टी में किसी भी तरह की दरार होने से इनकार किया था लेकिन झारखंड में NCP के एक पदाधिकारी ने सुनेत्रा के पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी जिसके बाद मतभेदों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं.
राजनीतिक विश्लेषक अभय देशपांडे बताते हैं कि BJP को इस मुद्दे का ऐसा हल निकालना होगा जिससे सुनेत्रा और पार्थ को किनारे न किया जाए और सभी पक्षों के बीच सहमति बन सके. उन्होंने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि अजित पवार के भतीजे और NCP (SCP) के विधायक रोहित पवार ने उस विमान हादसे पर सवाल उठाए थे जिसमें उनके चाचा की मौत हुई थी.