आंध्र प्रदेश में शिक्षक भर्ती पर विवाद : नारा लोकेश ने जगन रेड्डी के आरोपों पर क्या कहा?

वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पिछले साल हुई मेगा शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं

वाई एस जगन मोहन रेड्डी  (फाइल फोटो)
वाई एस जगन मोहन रेड्डी (फाइल फोटो)

आंध्र प्रदेश के मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्री नारा लोकेश ने पिछले साल सरकारी स्कूलों में हुई मेगा शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज कर दिया है. विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

लोकेश ने जगन रेड्डी को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अपनी पसंद की तारीख और समय तय करें. राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर हुए Gen Z विरोध प्रदर्शनों के बाद YSRCP ने शिक्षक भर्ती के मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है.

YSRCP पार्टी ने मांग की है कि नारा लोकेश मंत्री पद से इस्तीफा दें और मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए. बता दें कि YSRCP के आरोप 2025 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सरकार के जरिए शुरू की गई मेगा डिस्ट्रिक्ट सेलेक्शन कमेटी (DSC) भर्ती प्रक्रिया से जुड़े हैं.

जून 2025 में शुरू हुई इस भर्ती के तहत सरकारी स्कूलों में 16,347 शिक्षकों की नियुक्ति की गई. इसके लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) आयोजित हुई, जिसमें 154 परीक्षा केंद्रों पर 3,36,300 उम्मीदवार शामिल हुए. जगन मोहन रेड्डी का आरोप है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं.

लोकेश ने अपने इस्तीफे और CBI जांच की मांग का मजाक उड़ाते हुए हाल ही में कुरनूल जिले के अदोनी में TDP कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, "DSC का मतलब TDP है और TDP का मतलब DSC. हमारी पार्टी ने अब तक 2 लाख शिक्षकों की भर्ती की है. 150 दिनों में करीब 250 मुकदमों का सामना करने के बावजूद हमने 16 हजार शिक्षकों की नियुक्ति पूरी की."

लोकेश ने विजयवाड़ा के पास एक अन्य कार्यक्रम में कहा कि पिछली YSRCP सरकार ने पांच साल में एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की, जबकि उनकी सरकार ने मेगा DSC भर्ती पूरी पारदर्शिता के साथ कराई. उन्होंने कहा, "इसके बावजूद जगन रेड्डी की पार्टी हम पर कीचड़ उछाल रही है."

YSRCP पिछले कुछ समय से DSC भर्ती का मुद्दा उठा रही है. पार्टी ने CBI जांच की मांग समेत कई याचिकाएं आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में दायर की हैं. साथ ही इस मुद्दे पर पूरे राज्य में नया अभियान भी शुरू किया है. 28 जुलाई को YSRCP के छात्र और युवा संगठनों ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए.

जगन रेड्डी ने इन प्रदर्शनों को न्याय के लिए तेज होती मांग और Gen-Z व बेरोजगार युवाओं की नाराजगी बताया है. पार्टी के लोकसभा सांसद मद्दिला गुरुमूर्ति ने परीक्षा सुधार से जुड़े नए कानून 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर संसद में चर्चा के दौरान भी भर्ती में गड़बड़ी के आरोप उठाए.

हालांकि, आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ HRD अधिकारियों ने इन आरोपों का खंडन किया. स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव कोना शशिधर ने इंडिया टुडे से कहा कि DSC 2025 परीक्षा 24 दिनों तक कई शिफ्टों में आयोजित की गई, ताकि सभी उम्मीदवारों के अंकों की तुलना निष्पक्ष तरीके से हो सके. इसके लिए वही वैज्ञानिक नॉर्मलाइजेशन पद्धति अपनाई गई, जिसका इस्तेमाल 2018 की DSC परीक्षा में भी किया गया था.

कोना शशिधर के मुताबिक मेगा शिक्षक भर्ती के हर चरण जैसे- भर्ती अधिसूचना जारी करने, प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा कराने, परिणाम घोषित करने, प्रमाणपत्रों की जांच, आरक्षण लागू करने, अंतिम चयन और नियुक्ति को पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और सरकारी नियमों, आदेशों तथा कानूनी प्रावधानों के अनुसार पूरा किया गया.

वहीं, YSRCP सांसदों का आरोप है कि राज्य सरकार ने DSC संयोजक की भूमिका को दरकिनार कर परीक्षा कराने की जिम्मेदारी राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के निदेशक को सौंप दी, जो नियमों के खिलाफ है.

पार्टी का यह भी आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसे अपलोड करने जैसे गोपनीय काम आउटसोर्स कर्मचारियों को सौंपे गए, जिससे पेपर लीक की आशंका बढ़ गई. YSRCP ने यह सवाल भी उठाया कि SCERT का एक आउटसोर्स कर्मचारी कथित तौर पर DSC में टॉप रैंक कैसे हासिल कर गया.

आंध्र प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने जवाब दिया कि DSC संयोजक और SCERT निदेशक दोनों स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त के कार्यालय से ही काम करते हैं और आयुक्त की निगरानी में कार्य करते हैं. उन्होंने कहा कि DSC 2025 में किया गया बदलाव पहले सामने आई व्यावहारिक और प्रशासनिक दिक्कतों से बचने के लिए किया गया था.

कोना शशिधर ने कहा कि SCERT में डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी के टॉप अंक लाने का दावा निराधार है क्योंकि उस व्यक्ति की DSC से जुड़े किसी भी काम में कोई भूमिका नहीं थी. उन्होंने कहा कि यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है.

YSRCP सांसदों का यह भी आरोप है कि सरकार ने खेल कोटा के नियमों में हेरफेर कर अनियमित नियुक्तियां कीं. उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेताओं की अनदेखी की गई जबकि सिर्फ प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को नौकरी दे दी गई.

अधिकारियों ने कहा कि खेल कोटे के तहत 3 फीसद आरक्षण में 421 पद उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए निर्धारित किए गए थे. इसके लिए आंध्र प्रदेश खेल प्राधिकरण ने 2 मई 2025 को अलग अधिसूचना जारी की थी, जो सामान्य CBT भर्ती से अलग थी.

स्कूल शिक्षा विभाग ने इंडिया टुडे के साथ साझा किए गए एक नोट में कहा, "G.O.Ms.No.47 और G.O.Ms.No.04 के तहत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को लिखित प्रतियोगी परीक्षा से छूट देकर उनके खेल प्रमाणपत्रों के आधार पर चयन करने का उद्देश्य खेल प्रतिभा को उचित महत्व देना और स्कूलों में खेल एवं शारीरिक शिक्षा को बढ़ावा देना था."

अधिकारियों ने कहा कि खेल कोटे में चयन केवल खेल उपलब्धियों के आधार पर नहीं किया गया. इसमें खेल प्राथमिकता, उम्मीदवार के जरिए चुना गया पद, रिक्तियां, सामुदायिक आरक्षण, क्षैतिज आरक्षण, स्थानीय आरक्षण, रोस्टर प्वाइंट और अन्य भर्ती नियमों को भी ध्यान में रखा गया.

YSRCP का एक आरोप यह भी है कि प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए 1:1 अनुपात में बुलाए गए कई उम्मीदवारों के नाम अंतिम चयन सूची में नहीं आए. स्कूल शिक्षा निदेशक थमीम अंसारिया ने कहा कि ऐसा DSC 2025 में नई क्षैतिज आरक्षण नीति (महिलाओं, खिलाड़ियों, दिव्यांगों और पूर्व सैनिकों के लिए SC, ST और OBC आरक्षित सीटों के भीतर आरक्षण) लागू होने के कारण हुआ.

स्कूल शिक्षा विभाग के नोट के अनुसार, खेल कोटे में शिक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगने के आरोप की जांच पुलिस कर रही है. YSRCP आने वाले हफ्तों में भी इस मुद्दे को लगातार उठाने की तैयारी में है.

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