मुंबई में अब AI बताएगा कब बिगड़ने वाली है हवा!

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मुंबई और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता का पूर्वानुमान लगाने के लिए AI आधारित प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसका मकसद प्रदूषण बढ़ने से पहले ही प्रशासन को जरूरी कदम उठाने में मदद करना है

सांकेतिक तस्वीर

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने मुंबई और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता का पूर्वानुमान लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल का प्रोजेक्ट शुरू किया है. इन AI आधारित पूर्वानुमानों से राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी. इनमें हवा की गुणवत्ता में संभावित गिरावट को रोकने के लिए पहले से निर्माण गतिविधियों को रोकना जैसे कदम शामिल हैं.

मुंबई और बड़े मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के इलाकों में खासकर सर्दियों के महीनों में हवा की गुणवत्ता खराब रहती है. MPCB के चेयरमैन सिद्धेश कदम ने कहा कि उन्होंने रियल-टाइम एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) फोरकास्टिंग मॉडल तैयार करने का प्रोजेक्ट शुरू किया है. वे बताते हैं, “जिस तरह मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाले मॉडल मानसून के दौरान ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी कर सकते हैं, उसी तरह यह मॉडल खराब हवा वाले दिनों का अनुमान लगाने में मदद करेगा. इससे समस्या को नियंत्रित करने के लिए पहले से सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे. उदाहरण के लिए, निर्माण गतिविधियों को रोका जा सकेगा.”

25 करोड़ रुपए का यह प्रोजेक्ट ट्रायल के तौर पर MMR को कवर करेगा. इसके बाद भविष्य में इसे पूरे राज्य तक विस्तार दिया जाएगा. MPCB के अधिकारियों ने बताया कि रियल-टाइम प्रदूषक स्रोतों का पता लगाने, उनके प्रभाव का पूर्वानुमान लगाने और एयरफ्लो मॉडलिंग का यह प्रोजेक्ट फ्रांस की कंपनी फ्लूडिन (Fluidyn) द्वारा चलाया जा रहा है. कदम ने कहा कि इस अध्ययन को पूरा होने में करीब एक साल लगेगा क्योंकि कंपनी सभी मौसमों में हवा की गुणवत्ता का आकलन करेगी.

शहर की प्रायद्वीपीय भौगोलिक संरचना ने पारंपरिक रूप से हवा के प्रवाह को प्रदूषकों को अरब सागर की ओर ले जाने और फैलाने में मदद की है. हालांकि लगातार चल रहे हाउसिंग और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और सरकार द्वारा संचालित रैखिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने प्रदूषण में योगदान दिया है. शहर ऊंचाई वाली इमारतें हवा के संचार में बाधा बन गया है. इससे ऐसे एयर पॉकेट बन रहे हैं जो हवा के प्रवाह को रोकते हैं और समुद्र सहित बड़े इलाके में प्रदूषकों और उत्सर्जन को फैलने से रोकते हैं.

‘स्पैशियो-टेम्पोरल चेंजेज ऑफ ग्रीन स्पेसेज एंड देयर इम्पैक्ट ऑन अर्बन एनवायरनमेंट ऑफ मुंबई, इंडिया’ नाम से 2020 में स्प्रिंगर नेचर में प्रकाशित एक अध्ययन में मुंबई के शहरी हरित क्षेत्रों में भारी कमी का खुलासा हुआ. 1988 में ये क्षेत्र 46.42 फीसदी (29,260 हेक्टेयर) थे, जो 2018 में घटकर 26.67 फीसदी (16,814 हेक्टेयर) रह गए. शहरी हरित क्षेत्र अर्बन हीट आइलैंड (UHI) के प्रभाव को कम करते हैं और जमीन की सतह के बढ़ते तापमान (LST) को घटाते हैं. सैदुर रहमान और अन्य लोगों द्वारा किए गए इस अध्ययन में बताया गया कि घने और कम घने वनस्पति वाले इलाकों में काफी कमी आई है. वहीं, अन्य भूमि उपयोग और भूमि आवरण का अनुपात काफी बढ़ गया है.

प्रजा फाउंडेशन की ‘रिपोर्ट ऑन द स्टेटस ऑफ सिविक सर्विसेज, एनवायरनमेंटल एंड क्लाइमेट इश्यूज इन मुंबई’ रिपोर्ट जून में जारी हुई थी. इसमें कहा गया कि 2025 में मुंबई के द्वीप शहर में हवा की गुणवत्ता सबसे अच्छी थी. वहीं, पूर्वी उपनगरों में यह अपेक्षाकृत स्थिर रही, जबकि पश्चिमी उपनगरों में ज्यादा उतार-चढ़ाव और डेटा की कमी देखी गई. 2025 में द्वीप शहर में औसतन 96 दिन हवा की गुणवत्ता अच्छी और 136 दिन संतोषजनक रही. वहीं, पूर्वी उपनगरों में ये आंकड़े क्रमशः 79 और 111 दिन रहे. पश्चिमी शहर में ये आंकड़े क्रमशः 84 और 114 दिन थे.

रिपोर्ट में कहा गया है, “AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) की निगरानी बेहतर करने के लिए CPCB (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) और SAFAR (सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी, वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च), जो शहरों में हवा की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली अलग-अलग एजेंसियां हैं, उन्हें समन्वय करना चाहिए और प्रमुख प्रदूषकों को मापने के लिए एक समान स्टेशनों का इस्तेमाल करते हुए एक ही AQI की गणना करनी चाहिए.”

रिपोर्ट यह भी बताती है, “इसके अलावा, हवा की गुणवत्ता को सही तरीके से मापने के लिए हर प्रशासनिक वार्ड में एयर क्वालिटी स्टेशन स्थापित किए जाने चाहिए. शिकायतों के आंकड़ों से भी यह सामने आता है कि प्रदूषण अन्यथा AQI में दिखाई नहीं देता. इसके अलावा, हवा की गुणवत्ता का डेटा सही तरीके से तैयार करने के लिए सभी स्थापित एयर क्वालिटी स्टेशनों को पूरी क्षमता से काम करना चाहिए.”

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में मुंबई की हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ. उस साल 97 दिन ‘अच्छी’ और 108 दिन ‘संतोषजनक’ हवा की गुणवत्ता दर्ज की गई. हालांकि, यह सुधार सभी इलाकों में समान नहीं था. कुछ इलाकों में अब भी ‘खराब’ हवा वाले दिन दर्ज किए गए. काम नहीं कर रहे मॉनिटरिंग स्टेशनों के कारण डेटा की सटीकता भी प्रभावित हुई. रिपोर्ट में आगे कहा गया, “औसत AQI में 10 फीसदी सुधार हुआ. यह 2020 में 97 से घटकर 2024 में 87 हो गया. इसके बावजूद इसी अवधि में वायु प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों में 203 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.”

एनजीओ वनशक्ति के पर्यावरणविद् डी. स्टालिन ने हवा की गुणवत्ता की निगरानी के लिए तकनीक के इस्तेमाल के कदम का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि यह दुनिया भर में चल रहा ट्रेंड है. इससे स्वस्थ रीडिंग सुनिश्चित करने के लिए एयर क्वालिटी सेंसर को ढकने जैसी गलत प्रथाओं में कमी आएगी. उन्होंने कहा, “लेकिन इस तकनीक का स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण किया जाना जरूरी है.”

शहर में खासकर सर्दियों के दौरान हवा की गुणवत्ता काफी खराब हो जाती है. X हैंडल मुंबई रेन्स @rushikesh_agre_ चलाने वाले स्वतंत्र मौसम पूर्वानुमानकर्ता ऋषिकेश अग्रे कहते हैं कि खराब वेंटिलेशन वाले दिनों में तय उपायों के जरिए सर्दियों में AQI की गिरावट के प्रभाव को कम किया जा सकता है. अधिकारियों को निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय तेज करने चाहिए, नियमित मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग सुनिश्चित करनी चाहिए और कचरा जलाने पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए. रात में ट्रकों की आवाजाही को नियंत्रित करना और लेन में जाम को रोकना भी उत्सर्जन के बढ़ने को कम करने में मदद कर सकता है.

उनके मुताबिक, “नागरिकों को समय पर एडवाइजरी जारी करने से, खासकर सुबह के समय AQI ज्यादा रहने वाले घंटों में, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले उनके जोखिम को कम किया जा सकता है. ये कदम सर्दियों के प्रदूषण को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते. लेकिन इनसे प्रदूषण के चरम स्तर को कम करने और रोजाना हवा की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिलती है.”

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