मध्य प्रदेश में बैगा आदिवासियों के बच्चों को 'रहस्यमयी' बीमारी ने घेरा
मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा बच्चों में कई तरह के लक्षण सामने आ रहे हैं. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक आठ बच्चों की मौत हो चुकी है और करीब 100 का इलाज चल रहा है

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के एक आदिवासी ब्लॉक में बच्चों को प्रभावित करने वाली 'रहस्यमय' बीमारी फैले करीब दो महीने हो चुके हैं, लेकिन इससे मौतों का सिलसिला थमा नहीं है. मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे हैं. स्थानीय प्रशासन के मुताबिक आठ बच्चों की मौत हुई है जबकि अनौपचारिक आंकड़ों में यह संख्या 20 बताई जा रही है.
संक्रमण पर काबू पाने की कोशिशों के बीच एक बड़ी समस्या यह है कि प्रभावित बच्चों में कई तरह के लक्षण दिखाई दे रहे हैं. ये बच्चे बैगा समुदाय से हैं, जिसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) में रखा गया है.
बच्चों में सर्दी, खांसी, फेफड़ों का संक्रमण और खुजली जैसे लक्षण सामने आए हैं. कई बच्चे खसरा और मलेरिया की चपेट में भी आए हैं. यह स्थिति 26 जून से बनी हुई है.
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 3 से 12 साल की उम्र के आठ बच्चों की मौत हो चुकी है और करीब 100 बच्चों का बालाघाट जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है. शुरुआती मामले बिरसा ब्लॉक के कुंडेकसा, बोरडिया और कोरका गांवों से सामने आए थे. इसके बाद कुछ और गांव भी इसकी चपेट में आ गए हैं.
डॉक्टरों को बच्चों में कई तरह के लक्षण मिल रहे हैं जिनका आपस में कोई सीधा संबंध नजर नहीं आता. बालाघाट के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप कहते हैं, "प्रभावित गांवों के बच्चों में हमने खुजली, मलेरिया और श्वसन तंत्र के वायरल संक्रमण के मामले देखे हैं."
प्रशासन की रणनीति इलाज की व्यवस्था गांवों तक पहुंचाने की है. घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है और बुखार वाले किसी भी बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है.
सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में से एक कुंडेकसा में पांच बिस्तरों वाला अस्थाई अस्पताल बनाया गया है. खसरे से प्रभावित बच्चों को विटामिन A की बूंदें दी जा रही हैं और मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए फॉगिंग की जा रही है.
सूत्रों ने बताया कि स्थानीय समुदाय के लोग बीमारी के लक्षणों की जानकारी स्वास्थ्यकर्मियों को देने और अस्पताल में भर्ती होने से हिचकते रहे. यह भी मौतों की एक वजह है.
बैगा, सहरिया और भारिया राज्य में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के रूप में चिह्नित तीन समुदाय हैं. यह वर्गीकरण उनकी जीवनशैली और आदिवासी समुदायों के बीच औसत से कम सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे मानकों के आधार पर किया गया है.