महाराष्ट्र में लाडकी बहिन योजना पर CAG के किन सवालों से मचा हंगामा?

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने 'लाडकी बहिण' योजना में 3,500 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त खर्च और 90 लाख से ज्यादा अपात्र लाभार्थियों पर सवाल उठाए हैं

अक्तूबर 2024 में लाडकी बहिण योजना के तहत लाभार्थियों को चेक वितरित करते पीएम मोदी और सीएम फडणवीस
अक्तूबर 2024 में लाडकी बहिण योजना के तहत लाभार्थियों को चेक वितरित करते पीएम मोदी और सीएम फडणवीस

महाराष्ट्र में BJP नेतृत्व वाली महायुति सरकार के दोबारा सत्ता में लौटने की प्रमुख वजह महिलाओं के समर्थन को माना जाता है. कहा जाता है कि 'लाडकी बहिण' योजना की बदौलत सत्तारूढ़ महायुति ने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 288 में से 237 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी.

हालांकि, CAG की रिपोर्ट में योजना में हजारों करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च का मामला सामने आने के बाद यह योजना अब विवादों में है. दरअसल, CAG ने इस योजना में 3,500 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त खर्च का हवाला देते हुए वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताओं की ओर भी इशारा किया है.

इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में दिए जाते हैं. महिला एवं बाल विकास विभाग इस योजना को लागू करता है. यह योजना 2024 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में महायुति को मिले झटकों के बाद तत्कालीन एकनाथ शिंदे सरकार के जरिए घोषित लोकलुभावन योजनाओं में शामिल थी. महायुति ने चुनाव जीतने पर इस राशि को बढ़ाकर 2,100 रुपये प्रति माह करने का भी वादा किया था.

वित्त वर्ष 2024-25 की राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट, जिसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया गया. इसमें CAG ने कहा कि योजना के लिए अनुपूरक बजट के माध्यम से 26,200 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए. इसके अलावा, लेक लाडकी योजना से 3,490.75 करोड़ रुपये का पुनर्विनियोजन किया गया. दरअसल, पुनर्विनियोजन (Reappropriation) किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा विभागीय बजट में से धन को एक मद (unit) से निकालकर उसी अनुदान (grant) के अंतर्गत किसी दूसरी मद में स्थानांतरित करने की वित्तीय प्रक्रिया है.

इस तरह कुल 29,693.09 करोड़ रुपये उपलब्ध हुए. इसके मुकाबले विभाग ने 33,237.24 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे 3,541.16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च हुआ. इसके लिए विभाग ने कोई विशेष कारण नहीं बताया. रिपोर्ट में कहा गया कि 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान वाले वाउचर की जांच में, जिनकी कुल राशि 29,732.01 करोड़ रुपये थी. यह पाया गया कि जनवरी से मार्च 2025 के दौरान निकाले गए 15,586 करोड़ रुपये ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) के वर्चुअल पर्सनल डिपॉजिट अकाउंट (VPDA) में ट्रांसफर कर दिए गए.

रिपोर्ट के मुताबिक, "इससे संकेत मिलता है कि इन पैसों की तत्काल जरूरत नहीं थी और वास्तविक खर्च की आवश्यकता के बिना ही धन निकाल लिया गया, जो बजटीय अनुशासन और वित्तीय शुचिता के सिद्धांतों के खिलाफ है. अतिरिक्त खर्च का बड़ा हिस्सा बिना किसी स्पष्टीकरण के रहा और बड़ी रकम तत्काल आवश्यकता के बिना VPDA खातों में रख दी गई. इससे बजट अनुमान और वित्तीय नियंत्रण की कमजोरी सामने आती है."

विवाद तब और बढ़ गया जब सत्यापन के बाद 90 लाख से अधिक लाभार्थियों को योजना से बाहर कर दिया गया. इनमें से अधिकतर (62 लाख यानी अपात्र पाए गए लोगों में 67 फीसद) ने ई-केवाईसी (eKYC) की प्रक्रिया पूरी नहीं की थी. अन्य लोगों को इसलिए अपात्र पाया गया क्योंकि वे योजना की पात्रता शर्तों का उल्लंघन कर रहे थे. इनमें ऐसे लोग शामिल थे जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक थी, सरकारी कर्मचारी थे. कुछ उम्र सीमा पार कर चुके थे, दूसरी योजनाओं का लाभ ले रहे थे या कुछ मामलों में लाभार्थी पुरुष थे.

योजना से हटाए गए लाभार्थियों को लगभग 14,000 करोड़ रुपये मिल चुके हैं. राज्य सरकार ने घोषणा की है कि सरकारी कर्मचारियों और पुरुष लाभार्थियों से यह राशि वापस वसूली जाएगी. फिलहाल इस योजना के तहत लगभग 1.5 करोड़ महिलाएं लाभ ले रही हैं. यह संख्या अपने उच्चतम स्तर 2.43 करोड़ लाभार्थियों से काफी कम है.

इस बीच विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाड़ी (MVA) ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि सरकारी खजाने का पैसा गैरकानूनी तरीके से वोट खरीदने में इस्तेमाल किया गया. उन्होंने इसे इस सदी का सबसे बड़ा घोटाला बताया और सरकार के मंत्रिमंडल पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला दर्ज करने की मांग की.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने भी सरकार को निशाने पर लिया. NCP (SP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनीश गावंडे ने कहा, "लाडकी बहिण योजना से लाभार्थियों को हटाया जाना किसी भी लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं है. अब हर चार में से एक लाभार्थी को अपात्र घोषित किया गया है. यह या तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है या फिर बेहद गंभीर प्रशासनिक अक्षमता. दोनों में से एक बात जरूर है. क्या CAG इस मामले में हस्तक्षेप करेगा?"

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