महाराष्ट्र सरकार का नया नियम बिल्डरों की मनमानी से खरीदारों को बचा पाएगा?
महाराष्ट्र सरकार निर्माणाधीन फ्लैट खरीदारों के लिए स्टांप ड्यूटी का भुगतान आसान करने की तैयारी में है, ताकि बिल्डर की गड़बड़ी होने पर खरीदारों का पूरा पैसा पहले से न फंसे

महाराष्ट्र सरकार यह सुनिश्चित करने की योजना बना रही है कि घर खरीदने वाले लोगों को एग्रीमेंट टू सेल यानी बिक्री समझौता के समय स्टांप ड्यूटी का करीब 75 प्रतिशत ही देना पड़े. इस कदम से निर्माणाधीन मकान या फ्लैट बुक कराने वाले खरीदारों को राहत मिल सकती है. बाकी रकम सेल डीड के रजिस्ट्रेशन के समय देनी होगी.
सेल एग्रीमेंट में संपत्ति की बिक्री से जुड़ी शर्तें और नियम तय होते हैं और यह भविष्य में लेनदेन करने की मंशा को दिखाता है. वहीं सेल डीड वह अंतिम दस्तावेज है जिसके जरिए फ्लैट या जमीन जैसी संपत्ति का स्वामित्व और टाइटल विक्रेता से खरीदार को हस्तांतरित होता है.
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि सरकार इसे संभव बनाने के लिए रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 में संशोधन करने की योजना बना रही है.
बावनकुले ने यह भी बताया कि नागपुर शहर और जिले में करीब 3,940 इमारतें ऐसी हैं जिनके पास ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं है. इन इमारतों के नक्शे मंजूर किए गए थे लेकिन इनके निर्माण में स्थानीय नगर निकायों और महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी महारेरा (MahaRERA) के नियमों सहित कई कानूनों का उल्लंघन किया गया.
बावनकुले बताते हैं, "हम उन लोगों को नहीं छोड़ेंगे जिन्होंने लोगों के साथ धोखा किया है." उन्होंने बताया कि ऐसी इमारतों के कारण महाराष्ट्र की दूसरी राजधानी माने जाने वाले नागपुर में जलभराव जैसी समस्या भी सामने आई है. बिल्डरों को इन कमियों और नियमों के उल्लंघन को दूर कर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है.
फिलहाल संपत्ति पर बेस स्टांप ड्यूटी रजिस्टर्ड संपत्ति की कीमत का 5 प्रतिशत है. राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "जब निर्माणाधीन संपत्ति के लिए बिक्री समझौता रजिस्टर्ड किया जाता है तो पूरी स्टांप ड्यूटी चुका दी जाती है लेकिन अगर बिल्डर या डेवलपर खरीदारों के साथ धोखा करता है, मसलन महारेरा से मंजूर योजना के मुताबिक इमारत का निर्माण नहीं करता या कोई अवैध बदलाव करता है तो खरीदारों को नुकसान होता है क्योंकि वे पूरी स्टांप ड्यूटी पहले ही दे चुके होते हैं."
उन्होंने कहा, "इसीलिए हम कानून में संशोधन पर विचार कर रहे हैं. इसके तहत खरीदार को बिक्री समझौता रजिस्टर करते समय स्टांप ड्यूटी का करीब 75 या 80 प्रतिशत ही देना पड़ सकता है. बाकी 20 से 25 प्रतिशत रकम सेल डीड रजिस्टर करते समय दी जा सकती है. आम तौर पर सेल डीड 500 रुपए के स्टांप पेपर पर तैयार किया जाता है."
रजिस्ट्रेशन एंड स्टांप विभाग जीएसटी के बाद राज्य के खजाने में दूसरा सबसे बड़ा योगदान देने वाला विभाग है. 2025-26 में विभाग ने 61,816.81 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाया जबकि उसका लक्ष्य 63,500 करोड़ रुपए था. पूरे राज्य में विभाग के करीब 517 कार्यालय हैं.
विभाग ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन के लिए मॉडल सब-रजिस्ट्रार कार्यालय शुरू करने में निजी क्षेत्र की भागीदारी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. इन कार्यालयों में संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े लेनदेन, लीव एंड लाइसेंस, मॉर्गेज डीड, कन्वेयंस एग्रीमेंट, गिफ्ट डीड और पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा.