तुकाराम मुंढे की मुहिम के बीच महाराष्ट्र के सरकारी ऑफिसों में भी बदलेगा खानपान!
तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में FDA की जंक फूड के खिलाफ मुहिम के बाद अब महाराष्ट्र के सरकारी दफ्तरों में भी हेल्दी खाने पर जोर

तुकाराम मुंढे की अगुवाई में FDA जंक फूड के खिलाफ मुहिम चला रहा है
महाराष्ट्र सरकार सरकारी दफ्तरों में भी हेल्दी खाने को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है. यह कदम राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की ओर से स्कूलों के आसपास ज्यादा शुगर और ज्यादा फैट वाले उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद उठाया जा रहा है. महाराष्ट्र में इस समय खाद्य एवं औषधि प्रशासन का नेतृत्व तुकाराम मुंढे कर रहे हैं.
कैबिनेट ने सरकारी और अर्ध-सरकारी दफ्तरों की कैंटीन में हेल्दी और पौष्टिक स्नैक्स और खाना परोसना अनिवार्य करने का फैसला किया है. प्रशिक्षण कार्यक्रमों, आयोजनों और आधिकारिक बैठकों में भी ऐसा खाना परोसना होगा.
तेल वाले और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को हटाया जाएगा. ये डायबिटीज, हाइपरटेंशन और हृदय रोग जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की बड़ी वजह हैं. इस फैसले का मकसद सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों और वहां आने वाले लोगों के बीच हेल्दी खाने की आदत को बढ़ावा देना है.
मेन्यू में केला, अमरूद, पपीता और सेब जैसे फल, उबले अंडे, उबले अंकुरित अनाज, पोहा, इडली-सांभर और गर्म दूध शामिल होंगे. ग्रीन टी, अंकुरित अनाज से बनी सब्जियां और ज्वार, बाजरा, रागी व दालों से बनी भाकरी भी परोसी जाएगी.
अब यहां स्थानीय और पारंपरिक खाने को प्राथमिकता दी जाएगी. दोपहर के खाने में हरी सब्जियां, छाछ, दालें और सलाद उपलब्ध होंगे. मुंबई स्थित राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय मंत्रालय की कैंटीन में पहले ही ‘हेल्दी’ मेन्यू शुरू किया जा चुका है.
राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने यह प्रस्ताव रखा था. इसमें कहा गया कि भारत में करीब 66 फीसदी मौतें गैर-संचारी रोगों की वजह से होती हैं. महाराष्ट्र में करीब 24 फीसदी लोग हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं. करीब 15 फीसदी को डायबिटीज है, 25 फीसदी लोग मोटापे से जूझ रहे हैं और 30 फीसदी लोग हृदय रोग से पीड़ित हैं. ज्यादा चिंता की बात यह है कि ये बीमारियां कम उम्र में ही दिखाई देने लगी हैं.
रेस्तरां और खाने-पीने की दुकानों में स्वच्छता और साफ-सफाई के नियमों के उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई के बाद महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्कूल कैंटीन में बिकने वाले जंक फूड पर भी ध्यान दिया.
FDA ने स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में मौजूद दुकानों में ज्यादा चीनी, नमक, सैचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने का भी निर्देश दिया. इसमें केक, एनर्जी ड्रिंक और चिप्स, समोसा और लोकप्रिय वड़ा पाव जैसे तले हुए स्नैक्स शामिल हैं.
ये निर्देश सहायता प्राप्त, गैर-सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों पर लागू होंगे. राज्य और राष्ट्रीय शिक्षा बोर्डों से संबद्ध संस्थान भी इसके दायरे में आएंगे. महाराष्ट्र में करीब 1.08 लाख स्कूल और 2 करोड़ से ज्यादा छात्र हैं.
बदलती जीवनशैली, आक्रामक मार्केटिंग और सोशल मीडिया की वजह से छात्रों के बीच जंक फूड आसानी से उपलब्ध है और उसका सेवन भी बढ़ा है. इसके साथ बाहर की गतिविधियों की कमी ने बच्चों में मोटापा, पोषण की कमी, मेटाबॉलिक डिसऑर्डर, एनीमिया और एकाग्रता से जुड़ी समस्याएं बढ़ाई हैं. इससे धीरे-धीरे स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है.
अब स्कूल कैंटीन, टक शॉप, मिड-डे मील सेंटर, हॉस्टल की रसोई और सभी खाद्य आपूर्तिकर्ताओं के लिए FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) का पंजीकरण अनिवार्य होगा. स्कूलों के अंदर और आसपास HFSS (ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले) खाद्य पदार्थों की बिक्री, विज्ञापन और वितरण पर रोक होगी.
मुंढे खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त हैं और 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं. मुंबई के रेस्तरां और एलीट क्लबों पर उनकी कार्रवाई में चर्चगेट का क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया, बांद्रा का MIG क्रिकेट क्लब, आर.के. जुहू जिमखाना, अपर्णा जुहू जिमखाना और तारदेव का विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब शामिल हैं. इनके खाद्य लाइसेंस निलंबित किए गए थे. गोरेगांव स्पोर्ट्स क्लब के एक रेस्तरां का लाइसेंस भी निलंबित किया गया.
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मरीन लाइंस के पारसी डेयरी फार्म और चर्चगेट पर के रुस्तम ऐंड कंपनी आइसक्रीम जैसे चर्चित प्रतिष्ठानों पर भी कार्रवाई की. मुंबई के लोकप्रिय रेस्तरां नूर मोहम्मदी, शालीमार, जिमी बॉय माहिम और फोर्ट स्थित पूर्णिमा पर भी कार्रवाई हुई.
FDA की जांच में कॉकरोच और फंगस का संक्रमण, सड़ी हुई सब्जियां, जमा हुआ पानी और गंदे फर्श व काउंटर मिले थे. खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन करने के बाद पारसी डेयरी फार्म को फिर से खोल दिया गया.