मुंबई-पुणे सड़क यात्रा को अगले 50 साल के लिए बेहतर बनाने की क्या है तैयारी?
मुंबई से पुणे के बीच वाहनों की संख्या हर साल 8-9 फीसदी की दर से बढ़ रही है. ऐसे में सरकार अगले 50 सालों के लिए सड़क यात्रा को बेहतर बनाने की कर रही है तैयारी

मुंबई और पुणे के बीच लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार पुराने मुंबई-पुणे हाईवे को मौजूदा चार लेन से बढ़ाकर छह लेन करने की योजना बना रही है.
इस परियोजना में फ्लाईओवर और इंटरचेंज बनाए जाएंगे. साथ ही पहले से शुरू हो चुकी 'कनेक्टिंग लिंक' परियोजना और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को 10 लेन करने की योजना है.
इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद मुंबई की ओर जाने वाले मार्ग की कुल क्षमता मौजूदा 10 लेन से बढ़कर 16 लेन हो जाएगी. इससे इस मार्ग और आसपास विकसित हो रहे इलाकों से भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक को संभालने में मदद मिलेगी.
महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग को चार लेन से छह लेन करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है.
इस परियोजना पर 7,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है. अधिकारी ने कहा, "इसके लिए बहुत कम जमीन अधिगृहित करनी पड़ेगी क्योंकि ज्यादातर जमीन पहले से हमारे पास है."
इस परियोजना में खंडाला, लोनावला और खोपोली के लिए बाईपास, कलंबोली से शिलफाटा तक आठ लेन की सड़क, इंटरचेंज और तालेगांव, खोपोली तथा खालापुर जैसे स्थानों पर 13 फ्लाईओवर बनाए जाएंगे. मुंबई-पुणे हाईवे का निर्माण 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ था.
पहले पेशवाओं की सत्ता का केंद्र रहे पुणे और मुंबई (तब बॉम्बे) के बीच यात्रा में कई दिन लग जाते थे. रास्ते में पहाड़ और नदियां पार करनी पड़ती थीं. यही राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) अब मुंबई को पुणे और आगे बेंगलुरु तथा चेन्नई से जोड़ता है.
MSRDC ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को मौजूदा छह लेन (हर दिशा में तीन लेन) से बढ़ाकर 10 लेन (हर दिशा में पांच लेन) करने की परियोजना भी शुरू की है. 14,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना को पूरा होने में चार साल लगने की उम्मीद है और इसका काम अगले साल शुरू होगा. दोनों परियोजनाओं को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है.
95 किलोमीटर लंबा मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे 1999 में शुरू हुआ था और इसने इस मार्ग पर सड़क यात्रा की तस्वीर बदल दी. हालांकि, बढ़ते ट्रैफिक और समय पर क्षमता नहीं बढ़ाए जाने के कारण इसकी सेवा का स्तर प्रभावित हो रहा है. तेज रफ्तार, लेन अनुशासन का पालन न करना, नियमों में ढील बरतना और व्यावसायिक वाहनों में ओवरलोडिंग भी दुर्घटनाओं का कारण बनती है.
1 मई को महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वाकांक्षी 'मिसिंग लिंक' परियोजना शुरू की, जिसे अब 'कनेक्टिंग लिंक' कहा जाता है. 6,790 करोड़ रुपये की इस परियोजना में खोपोली से लोनावला के पास कुसगांव तक सुरंगें और पुल बनाए गए हैं.
इस नए मार्ग से मुंबई और पुणे के बीच की दूरी 13.3 किलोमीटर कम हो गई है और यात्रा में कम से कम 30 मिनट की बचत होती है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि यह परियोजना यात्रा का समय कम करेगी और जाम खत्म करेगी. इससे 70,000 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ भी होगा.
इस लिंक में चार-चार लेन वाली दो समानांतर टनल हैं. इनमें से एक टनल 8.7 किलोमीटर लंबी और 23.33 मीटर चौड़ी है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंग के रूप में मान्यता दी है. दूसरी सुरंग 1.67 किलोमीटर लंबी है, जिसका एक हिस्सा जमीन के नीचे और लोनावला झील के नीचे से गुजरता है.
इस परियोजना में भारत का सबसे ऊंचा केबल-स्टेड हाईवे पुल भी शामिल है, जिसकी ऊंचाई 182 मीटर है. इसे तीन साल में विंड टनल मॉडलिंग की मदद से डिजाइन किया गया है. यह पुल 950 मीटर लंबा है और 250 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली हवा को सहन करने के लिए तैयार किया गया है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 'कनेक्टिंग लिंक' परियोजना से यात्रियों को एक्सप्रेसवे और पुराने मुंबई-बेंगलुरु हाईवे (NH-48) के उस साझा हिस्से से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा, जो घाट सेक्शन में आता है. यहां दोनों सड़कों की कुल 10 लेन (एक्सप्रेसवे की छह और NH-48 की चार लेन) घटकर सिर्फ छह लेन रह जाती हैं.
खड़ी चढ़ाई और मानसून के दौरान भूस्खलन की वजह से वाहन खराब हो जाते हैं, जिससे यह हिस्सा लंबे समय से ट्रैफिक जाम का बड़ा कारण बना हुआ है. MSRDC अधिकारियों का कहना है कि नया मार्ग रोजाना लगभग 1 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत भी करेगा.
मुंबई-पुणे मार्ग पर वाहनों की संख्या हर साल 8-9 फीसद की दर से बढ़ रही है. नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के शुरू होने और पुणे रिंग रोड, पुणे-नासिक एक्सप्रेसवे तथा पुणे-संभाजीनगर (औरंगाबाद) एक्सप्रेसवे जैसी प्रस्तावित परियोजनाओं के कारण आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है. यह जानकारी MSRDC के एक अधिकारी ने दी.
अधिकारी ने कहा, "हमारा लक्ष्य अगले 50 वर्षों तक निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है." उन्होंने बताया कि सेवरी-न्हावा शेवा अटल सेतु, कनेक्टिंग लिंक, प्रस्तावित पुणे रिंग रोड और विरार-अलीबाग मल्टी-मॉडल कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं भी इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं.
हालांकि, इन परियोजनाओं की लागत पूरी करने के लिए टोल वसूली की अवधि मौजूदा 2035 की समय सीमा से आगे 10 साल और बढ़ाई जाएगी. मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का निर्माण तत्कालीन शिवसेना-BJP सरकार के दौरान 2,136 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था और इसे राज्य की प्रमुख आधारभूत ढांचा परियोजनाओं में गिना जाता है.
फिलहाल इस एक्सप्रेसवे से रोजाना लगभग 75,000 वाहन गुजरते हैं, जिनमें बड़ी संख्या माल ढुलाई और परिवहन वाहनों की होती है. सप्ताह के अंत में और छुट्टियों के दौरान यह संख्या बढ़कर लगभग 1.10 लाख से 1.20 लाख तक पहुंच जाती है जिससे ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ बढ़ जाती है.