मध्य प्रदेश में अब चीतों का तीसरा ठिकाना भी तैयार

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों को बसाने से उनके प्रजनन को बढ़ावा मिलने और बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्यटन को गति मिलने की उम्मीद है

मध्य प्रदेश में फिलहाल कुल 56 चीते हैं (फाइल फोटो)

अक्टूबर की 7 तारीख को मध्य प्रदेश और देश को चीतों का तीसरा घर मिल गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को छोड़ा. इनमें एक नर चीता (व्योम) और एक मादा चीता (नीरा) है.

इन चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाया गया है. साल 2022 में यहीं से चीता परियोजना की शुरुआत हुई थी. दोनों चीते मूल रूप से बोत्सवाना के हैं और फरवरी में भारत लाए गए थे. मध्य प्रदेश में फिलहाल कुल 56 चीते हैं. इनमें भारत में जन्मे शावक भी शामिल हैं.

नौरादेही और रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्यों को मिलाकर बना वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में बाघों का सबसे बड़ा ठिकाना है. यह दमोह, नरसिंहपुर और सागर जिलों में 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है.

फिलहाल गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में भी चीते हैं. पिछले महीने एक मादा चीते को यहां लाया गया था. इसका मकसद प्रजनन को बढ़ावा देना है. इसके साथ ही अभयारण्य में चीतों की संख्या तीन हो गई है. इनमें दो नर और एक मादा चीता हैं. यह अभयारण्य मंदसौर और नीमच जिलों में 370 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है.

मध्य प्रदेश में चीतों की कुल आबादी में यहां पैदा हुए शावक भी शामिल हैं (फाइल फोटो)

नौरादेही अभयारण्य को भारत में अफ्रीकी चीतों को लाने के लिए शुरुआती संभावित ठिकानों में शामिल किया गया था. भारतीय वन्यजीव संस्थान ने नौरादेही और कूनो, दोनों का आकलन किया था. इसके बाद विशेषज्ञों ने चीता परियोजना की शुरुआत के लिए कूनो को चुना.

नौरादेही में चीतों को खास तौर पर तैयार किए गए 439 हेक्टेयर के बाड़े में छोड़ा गया है. इस बाड़े में चीतों के लिए पर्याप्त शिकार की व्यवस्था की गई है. इसमें चीतल भी शामिल हैं.

सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में चीते शिकारी जानवरों को रोकने के लिए बनाए गए सुरक्षित बाड़े में रहेंगे. लेकिन आगे चलकर नौरादेही पहला ऐसा ठिकाना होगा जहां चीते वहां पहले से रह रहे बाघों के साथ रहेंगे. कूनो और गांधी सागर, इन दोनों अन्य अभयारण्यों में तेंदुए हैं लेकिन वहां बाघों की स्थाई आबादी नहीं है.

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व पन्ना और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बीच एक गलियारे का भी काम करता है. यह इन दोनों ठिकानों को बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान से भी जोड़ता है.

नौरादेही में चीतों की मौजूदगी से घास के मैदानों को बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है. यह अभयारण्य बुंदेलखंड में स्थित है जहां सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े संकेतक कमजोर हैं. लंबे समय में चीतों की मौजूदगी से इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की  भी उम्मीद है.

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