नेताओं की ट्रेनिंग और टार्गेट, TDP ‘कॉर्पोरेट मॉडल’ से लड़ेगी अगला विधानसभा चुनाव!
इस साल होने वाले स्थानीय चुनाव TDP का पहला लक्ष्य है लेकिन पार्टी ने 2029 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अभी से नेताओं को तैयार करना शुरू कर दिया है

चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे नारा लोकेश
आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अभी करीब ढाई साल बाकी हैं लेकिन मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने अभी से इसकी तैयारी शुरू कर दी है. ‘सीईओ-सीएम’ के नाम से पहचाने जाने वाले एन. चंद्रबाबू नायडू और स्टैनफोर्ड से पढ़े उनके बेटे और मंत्री नारा लोकेश यह काम एक तय तरीके से कर रहे हैं.
इसके लिए नेताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा, वे एक-दूसरे से सीखेंगे और वरिष्ठ नेता उन्हें सलाह देंगे. इसके लिए एक तय योजना बनाई गई है, ठीक वैसे ही जैसे बड़ी कंपनियां किसी काम की तैयारी करती हैं.
TDP ने 7-8 सितंबर को पहली बार इस तरह का 'लीडरशिप कॉन्क्लेव' किया. इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता, मंत्री, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य (MLC) और दूसरे बड़े नेता शामिल हुए. विजयवाड़ा के पास मंगलागिरी में पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में हुए इस सम्मेलन में नेताओं की क्षमता बढ़ाने और उन्हें प्रशिक्षण देने पर खास ध्यान दिया गया.
पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, इसका मकसद चुने हुए नेताओं की काम करने की क्षमता बढ़ाना, उनमें नेतृत्व की क्षमता मजबूत करना और आने वाले स्थानीय चुनावों के साथ 2029 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को तैयार करना था.
गांव और शहरों में होने वाले स्थानीय चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले बहुत अहम माने जाते हैं. इन चुनावों से यह भी पता चलता है कि सरकार ने अब तक कितना अच्छा काम किया है. इन चुनावों को इस साल कराने की उम्मीद है.
सम्मेलन में शामिल एक नेता के मुताबिक, यह आम राजनीतिक बैठक से काफी अलग था. इसमें वरिष्ठ नेताओं ने खुद राजनीति, पार्टी के काम, सरकार के काम, कल्याण योजनाओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर लोगों को जानकारी दी. सम्मेलन में शामिल नेताओं को सवाल पूछने, अपनी परेशानियों पर बात करने और वरिष्ठ नेताओं के साथ खुलकर विस्तार से चर्चा करने का मौका दिया गया.
मुख्यमंत्री और TDP प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने सम्मेलन में कहा कि पार्टी को हर स्तर पर अच्छे नेता तैयार करने और लोगों से लगातार जुड़े रहने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने पार्टी के नेताओं से कहा कि अभी स्थानीय चुनाव में जीत को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाए और साथ ही 2029 के विधानसभा चुनावों की तैयारी भी जारी रखी जाए. इसके लिए एन. चंद्रबाबू नायडू ने TDP, BJP और जन सेना के गठबंधन में एकता बनाए रखने पर जोर दिया. उन्होंने नेताओं से लोगों के साथ अपना जुड़ाव मजबूत करने और पार्टी के नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया.
Gen Z के विरोध प्रदर्शनों और चुनावी राजनीति पर उनके असर को देखते हुए एन. चंद्रबाबू नायडू ने TDP नेताओं से समाज और नई पीढ़ी में हो रहे बदलावों को समझने और उसी के हिसाब से अपनी राजनीति का तरीका बदलने को कहा. उन्होंने समझाया कि हर 10 साल में एक नई पीढ़ी आती है, इसलिए बदलती पीढ़ी के हिसाब से पार्टी के काम और उसके तरीके में भी बदलाव होना चाहिए.
दूसरे दिन TDP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नारा लोकेश ने ‘राजनीतिक बातचीत और जनता से जुड़ाव’ विषय पर सत्र लिया. उन्होंने कहा कि पार्टी के चुने हुए नेताओं को सोशल मीडिया को गंभीरता से लेना चाहिए और इसके जरिए सीधे जनता से जुड़कर अपनी बात उन तक पहुंचानी चाहिए.
नारा लोकेश ने नेताओं से कहा कि वे सोशल मीडिया के जरिए सरकार के विकास और कल्याण से जुड़े कामों की जानकारी लोगों तक पहुंचाएं और "विपक्ष की गलत जानकारी का सही जानकारी और सबूतों के साथ तुरंत जवाब दें."
नारा लोकेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेल्फी वीडियो के जरिए लोगों से जुड़ने का जिक्र किया. उन्होंने आंध्र प्रदेश की औद्योगिक परियोजनाओं पर बनाए गए अपने सेल्फी वीडियो का भी उदाहरण दिया. नारा लोकेश ने कहा कि पार्टी के नेताओं को भी लोगों से सीधे और आसानी से समझ आने वाले तरीके से बात करनी चाहिए. उन्होंने शिक्षक भर्ती (मेगा DSC) को लेकर "विपक्ष के गलत जानकारी वाले अभियान" का भी जिक्र किया.
नारा लोकेश ने "2024 बैच" यानी सबसे कम उम्र वाले नेताओं से ज्यादा मेहनत करने, अपनी जिम्मेदारी निभाने, पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए काम करने, जनता से जुड़े रहने और लोगों के बीच पार्टी को मजबूत करने को कहा. उन्होंने कहा कि इन नेताओं का लक्ष्य ऐसा काम करने का होना चाहिए कि पार्टी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू कहें, "2024 का बैच नेताओं का सबसे अच्छा बैच है."
राज्य के HRD, IT और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री नारा लोकेश ने पार्टी के हर इलाके में बेहतर तरीके से काम करने, पार्टी कार्यकर्ताओं को लगातार काम में लगाए रखने, लोगों से सीधे बात करने और उनकी समस्याओं को जल्दी हल करने पर जोर दिया. नारा लोकेश ने कहा, "हमारी पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती काम करना नहीं, बल्कि अपने काम और अपनी सही बात की जानकारी लोगों तक पहुंचाना है. विपक्ष जिस तरह लगातार गलत जानकारी लोगों तक पहुंचाता है, हमें भी अपनी बात उसी मजबूती से लोगों तक पहुंचानी होगी."
उन्होंने नेताओं से अपनी कमजोरियों को पहचानने और उन्हें दूर करने के लिए काम करने को कहा. साथ ही, उन्होंने कहा कि नेताओं को लोगों की समस्याएं बड़े नेताओं के पास भेजने के बजाय उन्हें खुद हल करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
कई वरिष्ठ मंत्रियों ने भी नेताओं को जरूरी जानकारी दी. इनमें केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू भी शामिल थे. उन्होंने सम्मेलन में शामिल विधायकों के साथ अपने अनुभव और जानकारी साझा की.
समापन भाषण में नारा लोकेश ने हर चुने हुए नेता से अपनी जिम्मेदारी निभाने और पार्टी के लिए "बोझ नहीं, बल्कि ताकत" बनने की अपील की. उन्होंने इसे TDP वर्जन 3.0 बताया और कहा कि पार्टी सबसे पहले होनी चाहिए. साथ ही, पार्टी के अंदर खुलकर चर्चा और बहस होनी चाहिए.
सम्मेलन में शामिल TDP के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "पहली बार हुआ यह सम्मेलन आम राजनीतिक बैठकों से अलग था और इसका मकसद नेताओं को तैयार करने के लिए एक तय तरीका बनाना था. इसमें नेताओं को जरूरी जानकारी देना, एक-दूसरे से सीखना, वरिष्ठ नेताओं से सलाह लेना और असली समस्याओं को हल करने पर ध्यान दिया गया. इसका मकसद पार्टी को ऐसा संगठन बनाना है, जो लोगों की जरूरतों के हिसाब से काम करे और चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार रहे."
एन. चंद्रबाबू नायडू ने विधायकों से अपने काम के लिए जरूरी लक्ष्य तय करने और हर विधानसभा क्षेत्र में ऐसे 25 मुद्दों की पहचान करने को कहा, जिन पर सबसे पहले काम किया जाना चाहिए. इन मुद्दों पर ध्यान देकर काम करने से नेताओं को लोगों के बीच अपनी पहचान और भरोसा बनाने में मदद मिलेगी. एन. चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि ऐसे नेतृत्व सम्मेलन हर तीन महीने में किए जाएंगे. जिन विधायकों ने काम करने के अच्छे और सफल तरीके अपनाए होंगे, उन्हें अगली बैठकों में अपने अनुभव दूसरों के साथ साझा करने का मौका दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि सिर्फ पैसा होने से चुनाव जीतना तय नहीं होता. नेताओं को लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं, दोनों के साथ मजबूत रिश्ता बनाना होगा. एन. चंद्रबाबू नायडू ने खुद से काम करने की इच्छा रखने, लगातार कोशिश करते रहने और लोगों के काम पूरे कराने के लिए अधिकारियों के साथ लगातार मिलकर काम करने पर भी जोर दिया.