कोलकाता की सड़कों को इंद्रधनुषी बनाने पर क्यों उठ रहे सवाल?
दुर्गा पूजा से पहले शहर को सजाने के लिए सड़कों पर किए गए रंग-रोगन के बीच बारिश में बाइक फिसलने के वीडियो वायरल हुए हैं

कोलकाता की एक रंगीन सड़क (फोटो : AI)
दुर्गा पूजा से पहले कोलकाता को सुंदर बनाने के लिए सड़कों पर इंद्रधनुषी रंगों से पेंट किया गया. लेकिन बारिश में एक फ्लाईओवर पर मोटरसाइकिलों के फिसलने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सड़क सुरक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
एक अधिकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल सरकार ने पुलिस से इस घटना की जांच करने को कहा है. हालांकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस आशंका पर संदेह जताया कि हादसों की वजह सड़क पर किया गया पेंट हो सकता है. उन्होंने कहा कि उनके पास इस संबंध को साबित करने वाली कोई जानकारी नहीं है.
घटना के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट नाराजगी जताते हुए पत्रकारों से कहा, "क्या पेंट करने की वजह से दुर्घटनाएं होती हैं? कितने फ्लाईओवर पर हादसे हुए हैं?" उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी मिलने से पहले वे इस मामले पर कोई और टिप्पणी नहीं करेंगे.
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब त्योहारों से पहले कोलकाता को रंग-बिरंगा रूप दिया जा रहा है. शहर की कई सड़कों, फ्लाईओवर और पुलों पर चमकीले रंग किए गए हैं. इस पहल को शहर की सुंदरता बढ़ाने और उसकी सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने की कोशिश बताया गया है.
लेकिन मोटरसाइकिल चालकों ने नई पेंट की गई सतहों पर टायर फिसलने और धूप में चमक के कारण देखने में परेशानी होने की शिकायत की है. इससे यह सवाल भी उठा है कि बाइक चलाने के लिहाज से यह सामग्री सुरक्षित है या नहीं.
सायनदीप लाहिड़ी नाम के एक फेसबुक यूजर ने 14 अक्टूबर को एक वीडियो पोस्ट किया जो वायरल हो गया. इसके साथ व्यंग्यात्मक कैप्शन लिखा था, "इतनी सुंदर सड़क पर इतने सारे लोग क्यों फिसले, कौन जाने?"
ऐसा लगता है कि यह वीडियो किसी वाहन के डैशबोर्ड कैमरे से रिकॉर्ड किया गया है. इसमें बारिश से भीगे चिंगीरघाटा फ्लाईओवर पर एक के बाद एक तीन मोटरसाइकिल सवार गिरते दिखाई देते हैं. हालांकि इस वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
इस घटना के बाद आरोप लग रहे हैं कि पेंट की गई सड़क गीली होने पर फिसलन भरी हो जाती है. मोटरसाइकिल चालकों ने यह शिकायत भी की है कि तेज रंगों के कारण धूप में आंखें चौंधियाती हैं, जिससे देखने में परेशानी हो सकती है. बाद में कुछ पुलों पर स्पीड ब्रेकर लगाए गए जबकि कुछ अन्य जगहों से पेंट हटा दिया गया.
शहरी विकास और नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल इस सौंदर्यीकरण अभियान की निगरानी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन इन शिकायतों की जांच कर रहे हैं. पॉल ने कहा, "एक मोटरसाइकिल गिर गई. वह आगे चल रही दूसरी मोटरसाइकिल से टकरा गई. हमें नहीं पता कि वह क्यों गिरी. यह मामला पुलिस और प्रशासन के संज्ञान में लाया गया है."
उन्होंने कहा कि सड़कों पर ऐसा पेंट इस्तेमाल किया गया है जो फिसलन रोकने वाला है. इसलिए केवल पेंट की वजह से वाहनों के टायरों की पकड़ खत्म नहीं होनी चाहिए. फिर भी सरकार कथित हादसों से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करेगी. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इन शिकायतों की पड़ताल करने का निर्देश दिया है.
पॉल ने रंगों की तेज चमक से जुड़ी एक अलग चिंता को भी स्वीकार किया. उन्होंने कहा, "मैंने सुना है कि रंगों की चमक से लोगों की आंखें चौंधिया रही हैं. हम इस पर गौर करेंगे. अगर लोगों को परेशानी हो रही है तो वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी."
मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में BJP के सत्ता में आने के बाद दुर्गा पूजा पहला बड़ा त्योहार है और इससे पहले इस पहल को स्थानीय लोगों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है.
चमकदार पेंट से सुरक्षा को लेकर चिंता
दक्षिण कोलकाता में गरियाहाट फ्लाईओवर, पूर्वी कोलकाता में चिंगीरघाटा फ्लाईओवर और मध्य कोलकाता में रेड रोड के एक हिस्से पर सड़कों को इंद्रधनुषी रंगों से रंगा गया है. शहर की सांस्कृतिक विरासत को उभारने के लिए पार्क सर्कस के सात रास्तों वाले चौराहे और गरियाहाट फ्लाईओवर के पास पारंपरिक बंगाली सजावटी कला अल्पना भी बनाई गई है.
पॉल ने कहा कि यह काम सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देशों को ध्यान में रखकर किया गया है और कुछ महीनों में पेंट अपने आप घिस जाएगा. उन्होंने इस दावे को भी खारिज किया कि इंद्रधनुषी रंगों का इस्तेमाल LGBTQ+ समुदाय या किसी खास सामाजिक समूह का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया गया है.
पॉल के मुताबिक, "कोलकाता की सड़कों पर इन इंद्रधनुषी रंगों का इस्तेमाल किसी खास समुदाय को ध्यान में रखकर नहीं किया गया है. हमने शहर की विरासत, सद्भाव और आपसी मेलजोल की भावना को सामने लाने के लिए यह पहल की है."
उन्होंने यह भी कहा कि इस काम के लिए करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल नहीं किया गया है. इसे कंपनियों ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत मिलने वाली राशि से पूरा किया है.
हालांकि, पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि सड़कों पर इस्तेमाल किया गया पेंट वाहनों की आवाजाही के लिए उपयुक्त है या नहीं. खासकर उन सड़कों पर जहां दोपहिया वाहन बड़ी संख्या में चलते हैं
पर्यावरणविद् सोमेंद्र मोहन घोष ने कहा कि उन्होंने चमकदार पेंट के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताते हुए पॉल और मुख्यमंत्री अधिकारी, दोनों को पत्र लिखा है. घोष ने कहा, "मैं चिंतित हूं. वाहनों के चलने वाली सड़क पर चमकदार ऑयल पेंट खतरनाक है और इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. आम घरों में इस्तेमाल होने वाले पेंट से सड़क पर टायरों के चलने वाले पूरे हिस्से को कभी नहीं रंगना चाहिए."
उन्होंने कहा कि सतह गीली होने पर चमकदार पेंट खास तौर पर खतरनाक हो सकता है. पानी, तेल या डीजल की मौजूदगी में टायरों और सड़क के बीच घर्षण काफी कम हो सकता है. घोष ने कहा, "चमकदार पेंट सतह पर एक चिकनी परत बना देता है. जब यह सतह पानी, तेल या डीजल से गीली होती है तो घर्षण गुणांक (फ्रिक्शन कोइफिशिएंट) बहुत कम हो जाता है. दोपहिया वाहन और कारें फिसलने लगेंगी."
घर्षण गुणांक यह बताता है कि वाहन के टायरों और सड़क की सतह के बीच कितनी पकड़ या प्रतिरोध है. घर्षण कम होने से टायरों की सड़क पर पकड़ कमजोर हो सकती है. गीली सड़क पर ब्रेक लगाते समय या वाहन मोड़ते समय यह जोखिम खास तौर पर बढ़ जाता है.
घोष ने भारतीय सड़क कांग्रेस के आईआरसी:35-2015 का हवाला दिया. यह भारत में सड़क चिह्नों के इस्तेमाल से जुड़ी आचार संहिता है. उन्होंने कहा कि वाहनों के आवागमन के लिए बनी सड़कों पर सामान्य चमकदार या तेल आधारित पेंट का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.
उनके मुताबिक, उपयुक्त थर्मोप्लास्टिक सामग्री समेत सड़क पर निशान बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली दूसरी सामग्रियां तकनीकी प्रदर्शन, टिकाऊपन और रोशनी में दिखाई देने के लिहाज से बेहतर होती हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर निशान बनाने के लिए खास तरह की थर्मोप्लास्टिक सामग्री की सिफारिश की जाती है.
घोष ने यह चेतावनी भी दी कि सड़कों को पेंट करने से गड्ढे और सतह की अन्य खामियां छिप सकती हैं. इससे यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि कुछ समय बाद पेंट उखड़ने लगेगा, जिससे सड़क की हालत पहले से भी खराब दिखाई दे सकती है.
पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता नबा दत्ता ने भी सवाल उठाया कि सड़कों को चमकीले रंगों से रंगने की वजह ठीक से बताई गई है या नहीं. उन्होंने यह भी पूछा कि सड़क इस्तेमाल करने वालों पर इसके असर का पर्याप्त आकलन किया गया है या नहीं.
विपक्ष ने जवाबदेही की मांग की
इस घटना को लेकर विपक्षी कांग्रेस, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के धड़े और CPM ने भी आलोचना की है. इन दलों ने सौंदर्यीकरण अभियान से जुड़े सड़क सुरक्षा के पहलुओं पर सवाल उठाए हैं.
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले AITC धड़े ने X पर कथित हादसों के वीडियो साझा करते हुए लिखा, "अभी-अभी पेंट किया गया फ्लाईओवर मौत का जाल बन गया है. बारिश की पहली फुहार पड़ते ही बाइक फिसलने लगीं और हादसे होने लगे." पार्टी ने इस मामले में पॉल से जवाबदेही तय करने की मांग की. उसने कहा, "बंगाल के लोगों को सुरक्षित सड़कें चाहिए, खतरनाक बुनियादी ढांचा नहीं."
प्रदेश कांग्रेस के महासचिव आशुतोष चटर्जी ने पॉल और कोलकाता नगर निगम की आयुक्त एवं प्रशासक स्मिता पांडे को पत्र लिखा. उन्होंने सड़कों पर सामान्य पेंट के इस्तेमाल से पैदा होने वाले संभावित सुरक्षा खतरों की ओर ध्यान दिलाया. चटर्जी ने कहा कि मोटर वाहनों के लिए बनी सड़कों पर चमकदार पेंट का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. इससे टायरों की पकड़ कम हो सकती है और वाहन फिसलने का खतरा बढ़ सकता है.
CPM नेता पार्थ प्रतिम बिस्वास ने भी फ्लाईओवर की सड़कों को रंगने के फैसले की आलोचना की. उन्होंने कहा, "यह सड़क सुरक्षा नियमों के खिलाफ है और सड़क निर्माण के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है. चमकदार पेंट के कणों का इस्तेमाल वाहन चालकों और बाइक सवारों की जान खतरे में डालता है खासकर बारिश के दौरान."
अब सरकार की जांच में यह पता लगाना होगा कि जिन लोगों के गिरने की खबरें आई हैं वे पेंट की गई सतहों के कारण गिरे या इसके पीछे कोई और वजह थी. जांच पूरी होने तक वायरल वीडियो के चलते प्रशासन को इन सवालों का सामना करना पड़ रहा है कि कोलकाता को त्योहार के लिए सजाने की मुहिम में सड़कों पर चलने वालों की सुरक्षा का पर्याप्त ध्यान रखा गया था या नहीं.