केरल में ‘वंदे मातरम’ पर छिड़ा विवाद
केरल के मुख्य सचिव ने सरकारी कार्यक्रमों में पूरा ‘वंदे मातरम’ गाने का निर्देश दिया लेकिन सरकार के दो मंत्रियों ने इससे अलग रुख अपनाया

इधर दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली के लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम’ की भव्य प्रस्तुति की तैयारी चल रही है. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के नेतृत्व वाली केरल सरकार राष्ट्रगीत को लेकर अलग-अलग संकेत दे रही है.
वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) सरकार के दो प्रमुख मंत्रियों के. मुरलीधरन (स्वास्थ्य) और पी.के. कुन्हालीकुट्टी (उद्योग) ने कहा है कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे.
उनका रुख केरल के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा की ओर से जारी सर्कुलर के उलट है. इसमें कहा गया था कि हर घर तिरंगा सप्ताह (9 से 17 अगस्त) के दौरान सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ पूरा गाया जाए. यह सप्ताह हर साल स्वतंत्रता दिवस से पहले मनाया जाता है. सिन्हा ने केंद्र सरकार के निर्देश के बाद 6 अगस्त को यह सर्कुलर जारी किया था.
इस विरोधाभास ने UDF सरकार को राजनीतिक रूप से मुश्किल स्थिति में डाल दिया है. विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने मुख्य सचिव के सर्कुलर का हवाला देते हुए सरकार पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एजेंडे के आगे झुकने का आरोप लगाया है.
केरल में राज्यपाल या केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरे गाने की परंपरा रही है. इस साल UDF सरकार के शपथ ग्रहण समारोह और राज्यपाल के विधानसभा में अभिभाषण के दौरान भी इसी परंपरा का पालन किया गया था.
विजयन की आलोचना और UDF की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की ओर से सर्कुलर पर उठाई गई आपत्तियों के बाद सतीशन सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य में ‘वंदे मातरम’ के केवल दो अंतरे गाए जाएंगे.
‘वंदे मातरम’ को बंगाली उपन्यासकार और कवि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में देश को मातृ देवी के रूप में प्रस्तुत करते हुए उसकी स्तुति में लिखा था. उन्होंने इसे अपने उपन्यास ‘आनंदमठ’ में भी शामिल किया.
यह कविता स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक नारे की तरह लोकप्रिय हुई. हालांकि इसके कुछ हिस्सों पर मुसलमानों ने ‘हिंदू प्रतीकों’ को लेकर आपत्ति जताई, जिससे वे असहज महसूस करते थे. आखिरकार, इसके कुल छह अंतरों में से पहले दो को राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता दी गई. BJP लंबे समय से इस फैसले का विरोध करती रही है और अब इसे बदलने की मांग कर रही है.
केरल BJP के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने ‘वंदे मातरम’ पर UDF और लेफ्ट फ्रंट दोनों के रुख को चुनौती देते हुए कहा कि राष्ट्रगीत को पूरा नहीं गाने का विकल्प मौजूद नहीं है. उन्होंने सवाल किया कि क्या राष्ट्रगान (जन गण मन) को लेकर भी कभी ऐसे सवाल उठाए जाएंगे.
राजनीतिक विवाद को और बढ़ाते हुए शिक्षा मंत्री और IUML नेता एन. शम्सुद्दीन ने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव ने राज्यपाल के निर्देश पर ‘वंदे मातरम’ को लेकर आदेश जारी किया था. राजभवन ने इस आरोप का खंडन किया है.
इससे पहले एक और विवाद तब खड़ा हुआ था, जब कासरगोड जिले में प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों के लिए आयोजित ‘फ्रीडम क्विज’ में हिंदुत्व विचारक वी.डी. सावरकर की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका को लेकर एक सवाल शामिल किया गया था. सवाल कथित तौर पर था: “किस स्वतंत्रता सेनानी को अंग्रेजों ने सबसे ज्यादा सजा दी?” कथित तौर पर उत्तर पुस्तिका में सावरकर को सही जवाब बताया गया था.
सामान्य शिक्षा विभाग ने कासरगोड के पल्लाथडका के एक प्राथमिक स्कूल शिक्षक को निलंबित कर दिया, जिन्हें क्विज के लिए सवाल तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी.
व्यापक स्तर पर, सतीशन सरकार की केंद्र की PM-SHRI स्कूल उन्नयन योजना को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने के फैसले की विपक्ष और IUML दोनों ने आलोचना की है. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि PM-SHRI को लागू करते हुए वह पाठ्यक्रम की स्वायत्तता या योजना के लिए स्कूलों के चयन का विशेष अधिकार नहीं छोड़ेगी.
विपक्ष इससे प्रभावित नहीं है और इन फैसलों की श्रृंखला को RSS के सामने ‘पूरी तरह आत्मसमर्पण’ के रूप में देखता है. विजयन ने कहा, “UDF सरकार के विवादित फैसले अलग-अलग नीतिगत विचलन नहीं हैं बल्कि राज्य के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को छोड़कर RSS के एजेंडे के आगे झुकने की कोशिश हैं. राष्ट्रगीत का पूरा पाठ गाने के लिए सरकार की ओर से सर्कुलर जारी करना RSS के एजेंडे के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण है.”