केरल में PSC परीक्षा विवाद ने बढ़ाई वाम मोर्चे की मुश्किलें

कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से गठित SIT ने पिछली वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल में हुई परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की ओर इशारा किया है

यह विवाद 13 जुलाई 2023 को हुई एक लिखित परीक्षा से जुड़ा है

2019 से केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) की ओर से आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की चल रही जांच ने CPI(M) के नेतृत्व वाले वाम गठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.

संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) ने कथित तौर पर पिछली वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल में हुई KPSC परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों की ओर इशारा किया है.

राज्यपाल आर.वी. आर्लेकर ने भी मामले में दखल दिया है. उन्होंने KPSC के खिलाफ संभावित दंडात्मक कार्रवाई को लेकर कानूनी राय मांगी है. KPSC के बोर्ड का गठन पिछली वाम मोर्चा सरकार ने किया था और डॉ. एम.आर. बैजू इसके अध्यक्ष हैं. KPSC एक संवैधानिक निकाय है. ऐसे में माना जा रहा है कि आर्लेकर इन शिकायतों को राष्ट्रपति के पास भेजने पर विचार कर रहे हैं. 

मामला मुख्य रूप से 13 जुलाई 2023 को हुई एक लिखित परीक्षा से जुड़ा है. यह परीक्षा राज्य योजना बोर्ड में तीन पदों पर नियुक्ति के लिए आयोजित की गई थी. ये पद उद्योग एवं बुनियादी ढांचा प्रभाग, परिप्रेक्ष्य नियोजन प्रभाग और योजना समन्वय प्रभाग के प्रमुख के थे.

इस परीक्षा में 228 उम्मीदवार शामिल हुए थे. KPSC ने उद्योग एवं बुनियादी ढांचा प्रभाग के पद के लिए 31 मई 2025 को रैंक सूची जारी की. इसमें सबसे ऊपर रहे अरुण जे. प्रताप की जून में नियुक्ति कर दी गई.

हालांकि, सूची में तीसरे स्थान पर रहे श्याम कृष्णन के. ने अपनी आन्सर शीट के मूल्यांकन की जांच के लिए सूचना का अधिकार (RTI) का सहारा लिया. उन्हें कथित तौर पर पता चला कि 100 अंकों में से 58 अंकों के सवालों के उत्तरों का मूल्यांकन ही नहीं किया गया था. इसका मतलब था कि रैंक सूची केवल 42 अंकों के सवालों के आधार पर तैयार की गई थी.

केरल सरकार में काम करने वाले कृष्णन ने इंडिया टुडे को बताया, "जब मुझे पता चला कि सूची में तीसरे स्थान पर होने के बावजूद मेरे अंक उम्मीद से कम हैं, तो मुझे शक हुआ कि किसी को फायदा पहुंचाने के लिए मेरी उत्तर पुस्तिका से छेड़छाड़ की गई है. मैंने RTI के जरिए इसका खुलासा करने का फैसला किया."

इस बीच, सूची में पांचवें स्थान पर रहे वी.एस. जयलाल ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का रुख किया. उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में विसंगतियों और KPSC के मनमाने तरीके से काम करने का आरोप लगाया. SIT ने कृष्णन और जयलाल, दोनों के बयान दर्ज किए हैं.

वहीं इस मामले पर संवैधानिक विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि राज्यपाल के दखल की कोशिश कहीं बेअसर न हो जाए. सुप्रीम कोर्ट के वकील और पूर्व लोकसभा सांसद डॉ. सेबेस्टियन पॉल ने कहा, "राज्यपाल का इसमें शामिल होने का प्रयास बेकार है. उत्तर पुस्तिकाओं से कथित छेड़छाड़ का KPSC मामला पहले से अदालत में है और राज्य सरकार ने भी शिकायतों की जांच के आदेश दिए हैं. राज्यपाल को राज्य के हर दूसरे आपराधिक मामले को राष्ट्रपति के पास भेजते हुए नहीं देखा जा सकता."

डॉ. पॉल कहते हैं कि KPSC मामला और राजनीतिक पक्षपात के आरोप, दोनों ही CPI(M) और उसकी पिछली सरकार के लिए झटका हैं.

KPSC का यह मामला ऐसे संवेदनशील समय में सामने आया है जब देश के कुछ हिस्सों में भर्ती परीक्षाओं में कथित धोखाधड़ी के खिलाफ युवा और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस मामले पर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा है कि आरोप बेहद गंभीर हैं. उनकी पार्टी कांग्रेस के युवा संगठन ने भी प्रदर्शन किए हैं.

केरल में विपक्ष ने CPI(M) को घेरने के लिए 2019 के सिविल पुलिस अधिकारी भर्ती मामले को भी उठाया है. इस मामले में CPI(M) के छात्र संगठन के तीन नेताओं पर कथित तौर पर शीर्ष रैंक हासिल करने का आरोप लगा था. बाद में उन्हें रैंक सूची से हटा दिया गया था.

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