केरल कांग्रेस में अध्यक्ष का फैसला क्यों नहीं हो पा रहा?
केरल में कांग्रेस पांच महीने से पूर्णकालिक प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त नहीं कर पाई है. दिल्ली में हाईकमान की राजनीतिक व्यस्तता के बीच कई दौर की चर्चा के बावजूद नाम पर सहमति नहीं बन पा रही

केरल में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी इस साल मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ को वी.डी. सतीशन सरकार में बिजली मंत्री बनाए जाने के बाद से पार्ट-टाइम प्रदेश अध्यक्ष के भरोसे काम चला रही है. पांच महीने और कई दौर के विचार-विमर्श के बाद भी इस पर सहमति नहीं बन पाई है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की जिम्मेदारी किस नेता को सौंपी जाए, .
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व इन दिनों नई दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में काफी व्यस्त है. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर इंडिया टुडे को बताया, "केरल में PCC अध्यक्ष की नियुक्ति और नई टीम के गठन में देरी की वजह दिल्ली में हमारे नेताओं की राजनीतिक व्यस्तताएं हैं. दिवाली के बाद हाईकमान व्यापक सहमति के आधार पर इस बारे में फैसला ले सकता है."
मीडिया में चर्चा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य कोडिकुन्निल सुरेश या राजस्व मंत्री ए.पी. अनिलकुमार इस पद की दौड़ में सबसे आगे हैं. कांग्रेस नेता ने कहा, "मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, कोडिकुन्निल को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का समर्थन हासिल है जबकि के.सी. वेणुगोपाल के करीबी नेताओं ने अनिलकुमार का नाम आगे किया है. हालांकि हाईकमान ने अभी तक इन नियुक्तियों पर चर्चा शुरू नहीं की है."
सुरेश और अनिलकुमार दोनों दलित नेता हैं और उनका राजनीतिक रिकॉर्ड भी अच्छा रहा है. सुरेश आठ बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं. मनमोहन सिंह सरकार के दूसरे कार्यकाल में वे केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री थे. वहीं अनिलकुमार पिछले 25 साल से केरल विधानसभा की वांडूर (आरक्षित) सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जोसेफ वाझक्कन, कांग्रेस सांसद शफी परमबिल और कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझलनादन के नाम भी PCC अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में शामिल थे.
कांग्रेस नेता ने कहा, "PCC अध्यक्ष का नाम तय करने से पहले हाईकमान राज्य के वरिष्ठ नेताओं से सलाह-मशविरा करेगा. जाति, क्षेत्र और साख जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा. पार्टी सत्ता में है, इसलिए PCC अध्यक्ष की भूमिका अहम होनी चाहिए. उसे सरकार और पार्टी के बीच तालमेल बनाने के साथ-साथ दोनों का बचाव भी करना होगा."
सतीशन चाहेंगे कि PCC अध्यक्ष ऐसा हो जिससे किसी भी तरह सरकार की छवि खराब न हो. इसकी एक वजह संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के संयोजक और कांग्रेस सांसद अदूर प्रकाश का मामला है. प्रकाश ने मुख्यमंत्री पर सरकार में एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाते हुए बगावत कर दी थी. उन्होंने खड़गे और राहुल गांधी, दोनों से इसकी शिकायत की थी.
राजनीतिक विश्लेषक संजीव रामचंद्रन कहते हैं, "अगर सतीशन के किसी आलोचक को PCC अध्यक्ष बना दिया जाता है तो उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. ओमान चांडी को भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था. उस समय PCC अध्यक्ष वी.एम. सुधीरन ने 2014 से 2016 के बीच सरकार के कई फैसलों पर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई थी. केरल में PCC अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के बीच टकराव होने पर अक्सर मुख्यमंत्री को ही पद छोड़ना पड़ा है."
कांग्रेस के पूर्व विधायक और PCC के पूर्व उपाध्यक्ष वाझक्कन ने इंडिया टुडे को बताया कि अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और कामकाज के आधार पर उन्हें PCC अध्यक्ष पद के लिए एक मजबूत दावेदार माना जा सकता है. 69 वर्षीय नेता ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि इस बारे में जल्द फैसला होगा क्योंकि इससे पार्टी और सरकार दोनों मजबूत होंगी."
PCC में नियुक्तियों में देरी से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की चिंता बढ़ गई है. PCC के पूर्व अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने कहा है कि पार्टी शासित राज्य में इस अनिश्चितता की वजह से संगठन कमजोर हुआ है. मुल्लापल्ली ने मीडिया से कहा, "पूर्णकालिक PCC अध्यक्ष नहीं होने की वजह से कांग्रेस समय पर अपना राजनीतिक रुख, विचार और मुद्दे सामने नहीं रख पा रही है."