केरल में महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा को लेकर विरोध क्यों बढ़ा?
महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा योजना के खिलाफ निजी बस ऑपरेटर हड़ताल पर जा रहे हैं तो वहीं केरल की सरकारी बसों का संचालन भी प्रभावित हो सकता है

कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार ने 15 जून को महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के लिए प्रियदर्शिनी बस योजना शुरू की थी. इसके तहत केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई है. निजी बस संचालकों के संगठन का कहना है कि इस योजना ने उस सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अस्थिर कर दिया है, जिस पर अब तक उनका दबदबा था.
ऑल केरल बस ऑपरेटर्स ऑर्गेनाइजेशन के महासचिव टी. गोपीनाथन कहते हैं, "हम राज्य सरकार की बसों में महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों को मुफ्त यात्रा देने के फैसले के खिलाफ नहीं हैं. सरकार इसके लिए KSRTC को भुगतान भी करेगी. हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि निजी बस संचालकों को भी ऐसी ही रियायत दी जाए."
गोपीनाथन का दावा है कि राज्य में 70 प्रतिशत मार्गों पर निजी बसें चलती हैं, जबकि KSRTC केवल एक-तिहाई मार्गों पर सेवाएं देता है. उन्होंने आरोप लगाया, "सरकार मोटर वाहन विभाग का इस्तेमाल निजी बस मालिकों को परेशान करने के लिए कर रही है."
केरल के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में करीब 7,000 निजी बसें और 4,000 से अधिक KSRTC बसें हैं. पिछले आठ वर्षों में निजी बसों की संख्या लगातार घटी है. 2018 में जहां 12,900 निजी बसें थीं, वहीं अब उनकी संख्या घटकर 7,000 रह गई है. प्रियदर्शिनी योजना शुरू होने के बाद करीब 500 निजी बसों का संचालन भी बंद हो गया. संचालकों का कहना है कि इसकी वजह परिचालन में हो रहा घाटा है.
गोपीनाथन ने कहा कि निजी बस संचालकों के लिए अब कारोबार चलाना मुश्किल हो गया है, क्योंकि उन्हें बैंक ऋण चुकाने और कर्मचारियों का वेतन देने जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं. उन्होंने आरोप लगाया, "राज्य सरकार ने एक ही फैसले में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को खत्म कर दिया है. इस उद्योग पर करीब 28,000 परिवारों की आजीविका निर्भर है."
प्राइवेट बस ऑपरेटरों का कहना है कि उनका 20 जुलाई का आंदोलन तिरुवनंतपुरम स्थित सचिवालय से शुरू होगा और यह अनिश्चितकाल तक चलेगा. इससे पहले भी कोट्टायम, पथानामथिट्टा, इडुक्की और कासरगोड जिलों में वे बीच-बीच में प्रदर्शन कर चुके हैं.
पूर्व परिवहन मंत्री के.बी. गणेश कुमार का कहना है कि प्रियदर्शिनी योजना सिर्फ निजी बस मालिकों ही नहीं, बल्कि KSRTC की वित्तीय स्थिति को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है. उन्होंने कहा, "इस योजना के दूरगामी असर होंगे. यह KSRTC के लिए भी व्यवहारिक नहीं है क्योंकि निगम पहले से ही कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का भुगतान करने के लिए संघर्ष कर रहा है."
हर दिन करीब 20 लाख यात्रियों को सेवा देने वाला KSRTC रोजाना 18 लाख से अधिक टिकट बेचता है. इसके बावजूद निगम की वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर है. वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक उसका कुल घाटा करीब 21,000 करोड़ रुपए पहुंच गया था. प्रियदर्शिनी योजना के बाद उसकी 3,000 से अधिक बसों में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ने की उम्मीद है. मुफ्त यात्रा करने वालों को शून्य मूल्य वाले 'प्रियदर्शिनी टिकट' जारी किए जाएंगे.
सरकार ने प्रियदर्शिनी योजना के कारण हर साल होने वाले 700 करोड़ रुपए से अधिक के संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए KSRTC को अतिरिक्त आय के स्रोत तलाशने के निर्देश दिए हैं. इसी दिशा में निगम टिकटों के पीछे निजी विज्ञापन प्रकाशित करने के विकल्प पर विचार कर रहा है.
साथ ही, सतीशन सरकार ने 2026-27 के राज्य बजट में मुफ्त यात्रा योजना की घोषणा करते हुए स्टेज कैरिज बसों पर लगने वाले त्रैमासिक वाहन कर को आधा कर दिया था.
सार्वजनिक परिवहन विशेषज्ञ पी. कृष्णकुमार ने कहा, "यह कदम संघर्ष कर रहे सरकारी ट्रांसपोर्ट सेक्टर को अप्रत्यक्ष वित्तीय सहायता देने जैसा है. यह भी संभव है कि सरकार भविष्य में निजी बसों में भी इसी तरह की मुफ्त यात्रा सुविधा लागू करे."