केरल BJP में क्यों नहीं दिख रही एकजुटता?

चुनावी फंड में कथित गड़बड़ी से लेकर सबरीमाला के पुजारियों पर उठे सवाल तक, BJP नेताओं के बयानों ने पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों को उजागर कर दिया है

केरल BJP के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर (फाइल फोटो)

केरल में तीन विधानसभा सीटें जीतने के बाद BJP जिस उत्साह में थी, वह अब मंद पड़ता दिख रहा है. राज्य इकाई कई विवादों से घिरी है जिनकी वजह से पार्टी नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. हालात तब और बिगड़ गए जब यह चर्चा शुरू हुई कि केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने चुनावी फंड के कथित दुरुपयोग के मामले में तीन पदाधिकारियों को उनके पद से हटा दिया है.

चुनावी फंड में कथित गड़बड़ी करीब 12 करोड़ रुपए की बताई जा रही है. इसके बाद चंद्रशेखर ने इंटरनल ऑडिट का आदेश दिया है. जिन तीन पदाधिकारियों को हटाया गया, उनमें एक कथित तौर पर प्रदेश सचिव, दूसरा राज्य समिति का सदस्य और तीसरा जोनल सचिव था.

इंडिया टुडे से नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बात करते हुए BJP के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "प्रारंभिक जांच में चुनावी फंड के कथित दुरुपयोग के संकेत मिले हैं. कई नेताओं ने राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष को फर्जी बिलों और संदिग्ध खातों में मनी ट्रांसफर के कथित सबूत सौंपे हैं."

ऑडिट टीम विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान बनाए गए बिलों और ट्रांसफर किए गए फंड की जांच कर रही है. 18 जुलाई को ब्रिटेन की छुट्टी से लौटने के बाद इस मामले पर राजीव चंद्रशेखर से चर्चा होने की संभावना है. चंद्रशेखर के करीबी नेताओं का मानना है कि पार्टी के भीतर उनके विरोधी चुनावी फंड घोटाले के मुद्दे पर उन्हें घेरने की कोशिश कर रहे हैं.

इसी बीच BJP एक और विवाद में घिर गई है. पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष के.एस. राधाकृष्णन ने मांग की है कि सबरीमला मंदिर के वंशानुगत तंत्री (मुख्य पुजारी) रहे थाझामोन परिवार से यह अधिकार वापस ले लिया जाए. इसी परिवार के पास मंदिर के धार्मिक अनुष्ठानों को कराने का विशेष अधिकार है. राधाकृष्णन का तर्क है कि मौजूदा तंत्री और थाझामोन माडोम परिवार के सदस्य कंदरारु राजीवारु को केरल पुलिस ने सबरीमला सोना चोरी मामले में आरोपी बनाया है और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था.

राधाकृष्णन ने सबरीमला मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) से मांग की कि वह थाझामोन परिवार से तंत्री के अधिकार वापस ले. उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2006 में कोच्चि पुलिस ने पूर्व तंत्री कंदरारु मोहनारु को कथित ब्लैकमेल और वसूली के एक मामले में गिरफ्तार किया था. वर्ष 2012 में एर्णाकुलम की एक अदालत ने मोहनारु को बरी कर दिया था, जबकि 11 अन्य लोगों को दोषी ठहराया था. इस विवाद के बाद TDB ने उनसे तंत्री का दर्जा वापस ले लिया था.

राधाकृष्णन के बयान को राजीव चंद्रशेखर ने खारिज कर दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि तंत्री की नियुक्ति कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है और इस मामले पर BJP नेताओं की राय पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं मानी जानी चाहिए. केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेतृत्व ने भी माना कि तंत्री की नियुक्ति को लेकर की गई टिप्पणी अनावश्यक थी.

राज्य BJP के सामने एक और मुश्किल तब खड़ी हो गई जब केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) के संचालन को लेकर उसके महासचिव जी. सुकुमारन नायर की आलोचना की. NSS ऊंची जाति के नायर हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन है. राधाकृष्णन ने भी NSS के पदाधिकारियों की आलोचना की क्योंकि उन्हें चंगनाश्शेरी स्थित NSS के संस्थापक मन्नाथु पद्मनाभन की समाधि, मन्नम समाधि, पर जाने की अनुमति नहीं दी गई थी.

हालांकि राजीव चंद्रशेखर ने इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि वह NSS और उसके पदाधिकारियों का बहुत सम्मान करते हैं.

पार्टी के भीतर ये मतभेद ऐसे समय सामने आए हैं, जब BJP को जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने और हालिया चुनावी सफलता का लाभ उठाकर जमीनी स्तर पर अपना संगठन मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए था. RSS के एक वरिष्ठ नेता ने इन मतभेदों को लंबे समय में BJP के लिए नुकसानदेह बताया. उन्होंने कहा, "केरल में BJP ने अपनी राजनीतिक जगह बनाई है. लेकिन अगर पार्टी को राज्य की सत्ता हासिल करने के अपने लक्ष्य तक पहुंचना है, तो नेताओं को अपने अहंकार और निजी एजेंडे छोड़कर साथ मिलकर काम करना होगा."

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