केन-बेतवा बांध के पास चल रहा ‘चिताभस्म’ आंदोलन अचानक कैसे हुआ खत्म?

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से विस्थापित लोगों के बराबर मुआवजे की मांग को लेकर पड़ोसी पन्ना जिले के लोग मध्य प्रदेश के ही छतरपुर में 'चिताभस्म आंदोलन' कर रहे थे

केन-बेतवा बांध के पास 3 जुलाई से यह आंदोलन चल रहा था

उधर दिल्ली में पुलिस सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले गई और इधर एक दिन बाद 19 जुलाई की सुबह मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला प्रशासन ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के बांध स्थल पर चल रहे ‘चिताभस्म आंदोलन’ को खत्म करा दिया. स्थानीय प्रशासन और पुलिस की एक टीम दौधन बांध स्थल पर पहुंची और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर को गिरफ्तार कर लिया. प्रदर्शनकारियों से भरी करीब तीन बसों को पड़ोसी पन्ना जिले में उनके घरों को वापस भेज दिया गया.

भटनागर पिछले 14 दिनों से अनशन पर थे. यह आंदोलन 17 दिन पहले शुरू हुआ था. जिला प्रशासन के अनुसार, बांध स्थल पर प्रदर्शन कर रहे ज्यादातर लोग केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित नहीं हैं. पन्ना जिले में स्थित रुंझ और मझगाय नाम की दो अन्य परियोजनाओं के कारण करीब 2,000 परिवार विस्थापित हुए थे. उन्हें प्रति परिवार 5 लाख रुपए की दर से मुआवजा दिया गया था. अब वे 12.5 लाख रुपए की दर से मुआवजे की मांग कर रहे हैं. इतनी ही राशि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से विस्थापित परिवारों को दी गई है.

मार्च में पन्ना जिले में उनका आंदोलन शुरू हुआ था. एक महीने बाद यह दौधन में पहुंच गया और ‘चिताभस्म आंदोलन’ का रूप ले लिया. छतरपुर प्रशासन के इस आश्वासन के बाद आंदोलन खत्म कर दिया गया था कि राज्य सरकार उनकी मांग पर विचार करेगी. बाद में मध्य प्रदेश कैबिनेट ने परिवारों को मुआवजे की राशि का अंतर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी. इसके लिए जल्द ही 300 करोड़ रुपए जारी किए जाएंगे.

हालांकि 3 जुलाई को केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के बांध स्थल पर ‘चिताभस्म आंदोलन’ फिर शुरू कर दिया गया. छतरपुर के जिलाधिकारी पार्थ जायसवाल कहते हैं, "केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया चल रही है और 90 प्रतिशत प्रभावित लोगों को इसमें शामिल किया जा चुका है."

19 जुलाई को सुबह 5 बजे प्रदर्शनकारियों को बसों से पन्ना जिले भेज दिया गया. भटनागर को अस्पताल में भर्ती कराया गया. जिलाधिकारी कहते हैं, "छतरपुर जिला प्रशासन को कानून के मुताबिक प्रदर्शन के बारे में कोई लिखित सूचना नहीं मिली थी." उन्होंने कहा कि ब्यारमा नदी का जलस्तर बढ़ रहा था, जिससे प्रदर्शनकारियों की जान को खतरा पैदा हो गया था. इसलिए प्रदर्शन को खत्म कराना पड़ा.

हालांकि भटनागर का दावा है कि आंदोलन को इसलिए बाधित किया गया क्योंकि वह केन-बेतवा लिंक परियोजना में भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले थे. उनका कहना है कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार प्रदर्शन स्थल पर आए थे और प्रदर्शन के बारे में सभी को जानकारी थी. पन्ना पुलिस ने मई में भटनागर को गिरफ्तार किया था. बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी.

Read more!