बिहार में आग लगने की घटनाएं अचानक बढ़ क्यों गई हैं?

बिहार में पिछले एक हफ्ते के दौरान आग लगने की घटनाओं में तीस से ज्यादा लोगों जान जा चुकी है

अगलगी की घटना का शिकार पटना का पाल होटल
अगलगी की घटना का शिकार पटना का पाल होटल

अप्रैल की 25 तारीख को पटना जंक्शन के पास पाल होटल में अचानक भीषण आग लग गई. इस दुर्घटना में सात लोगों की मौत उसी दिन हो गई और 20 से अधिक लोग जख्मी हुए, जिनका इलाज चल रहा है. उसी रोज पूर्वी चंपारण में आग लगने से आठ लोगों की मौत हो गई. अगले दिन दरभंगा में छह लोगों की मौत हुई, 27 को रोहतास में चार और मानपुर में एक व्यक्ति आग में झुलस कर मर गया.

28 अप्रैल को फिर सुल्तानगंज में एक बच्चे की मौत शॉर्ट सर्किट से लगी आग से हो गई. 28-29 की दरम्यानी रात पूर्णिया में खुश्कीबाग की फल एवं सब्जी मंडी जलकर खाक हो गई और अगले दिन बेतिया में शॉर्ट सर्किट के चलते 200 घर खाक हो गए और चार लोगों की मौत हो गई. यह अप्रैल महीने के आखिरी हफ्ते के पांच दिनों की कहानी है. हजारों घर और दुकान खाक हो गए हैं और 31 लोगों की मौत हो गई है.

यह तब है जब अगलगी के लिए कुख्यात वैशाख का महीना अभी शुरू नहीं हुआ है. चुनावी मौसम में जब वोटर उदासीन हैं और माहौल जोशीला नहीं है. ऐसे में अगलगी की ये घटनाएं बिहार के प्रशासन के लिए पेशानी पर बल डालने वाली साबित हो रही हैं. पिछले कुछ सालों से राज्य में अगलगी की घटनाएं इस कदर नहीं हुआ करती थीं. 2018 तक राज्य में आग लगने से जहां तीन सौ से अधिक लोग हर साल मारे जाते थे. वहीं 2020 में सिर्फ 28 लोग मरे. 2021 और 2022 में भी सौ का आंकड़ा पार नहीं हुआ. मगर इस साल महज पांच दिनों में 31 लोगों की मौत डराने वाली है. 

मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि इस साल तापमान में अचानक बढ़ोत्तरी, दिन और रात के तापमान में अंतर का कम होना और हवाएं तेज चलना ऐसी वजहें हैं, जिनके कारण इस तरह की परेशानी पैदा हो रही है. बिहार मौसम सेवा केंद्र के निदेशक डॉ. सीएन प्रभु कहते हैं, "इस साल अप्रैल में ही तापमान 40 डिग्री पार कर गया. पिछले एक हफ्ते के दौरान कई जिलों में तापमान 40 डिग्री से अधिक है. यह बड़ी समस्या है."

बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार के उपाध्यक्ष उदयकांत मिश्रा इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं, "नमी की कमी वो असली वजह है जिसके कारण अगलगी की घटनाएं विकराल हो रही हैं. इस साल ऐसा लग रहा है जैसे वसंत आया ही नहीं. ठंड से सीधे भीषण गर्मी आ गई. इसकी वजह से हवा में आर्द्रता न के बराबर है. पेड़ों के कटने, निर्माण कार्यों में तेजी और लो फ्लाइंग एयरक्राफ्ट के परिचालन में अधिकता की वजह से भी आर्द्रता कम हो रही है. मगर इसके बावजूद हमारी जिम्मेदारी है कि हम आग से बचने के लिए समाज को तैयार करें और आग लगने पर उनका बचाव करें ताकि कैजुअलटी कम से कम हो."

प्राधिकार मानता है कि बिहार में आग की घटनाओं के पीछे कई कारक काम करते हैं. राज्य में आग लगने की सबसे अधिक घटनाएं खेत-खलिहानों में, शहरी झुग्गियों में, ऐसी ग्रामीण बस्तियों में जहां फूस के घर हों, होटलों, मॉल और अस्पतालों में हुआ करती हैं. बीड़ी, पटाखे, चूल्हे की आग, गैस सिलिंडर का लापरवाही से इस्तेमाल आदि इसके प्रमुख कारण हैं. मगर सबसे महत्वपूर्ण कारण इन दिनों शॉर्ट सर्किट के कारण लगने वाली आग है. 

प्राधिकार की तरफ से इसे रोकने के लिए हर साल दिशा-निर्देश जारी होते हैं और अखबारों में विज्ञापन दिए जाते हैं. उदयकांत मिश्रा बताते हैं कि फायर फाइटिंग के बदले हमें फायर इंजीनियरिंग पर फोकस करना चाहिए और हमारी अपनी ऐसी तैयारी हो कि हम आग लगने की घटनाओं को रोक सकें या कम कर सकें.

वे आगे बताते हैं कि राज्य में 2017 तक अस्पतालों में खूब अगलगी की घटनाएं होती थीं. फिर प्राधिकार ने 16 बिंदु का चेकप्वाइंट बनाया, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रिसिटी लोड कम करना था. इससे पिछले कुछ वर्षों में अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं में काफी गिरावट आई. मिश्रा के मुताबिक वही काम दूसरे भवनों में भी करना चाहिए.

उदयकांत मिश्रा इन उपायों को तो बताते हैं, मगर सच यह है कि राज्य में 2017 में बनी अग्नि सुरक्षा कार्ययोजना क्रियान्वयन समिति जो 2021 तक काफी सक्रिय रही थी. जिसके सदस्य नियमित बैठकें कर आग को रोकने का प्रयास करते थे. इसकी बैठक जून, 2023 से अब तक एक बार भी नहीं हुई है. इस समिति के अध्यक्ष खुद उदयकांत हैं और सदस्य सचिव बिहार अग्निशमन सेवा की महानिदेशक शोभा अहोतकर हैं. ऐसी खबरें हैं कि शोभा अहोतकर इन बैठकों में शामिल नहीं हो रही हैं. 

हालांकि पाल होटल वाली घटना के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर होटलों में फायर सेफ्टी की जांच हो रही है. पटना शहर के 150 होटलों की जांच में पाया गया कि किसी में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. मौसम विभाग भी इन घटनाओं को लेकर अलर्ट हो गया है. विभाग एक मई से प्रखंड स्तर पर आग लगने की संभावना की पूर्व चेतावनी जारी करने का काम शुरू कर रहा है.

दरअसल कमी आपसी समन्वय की है. हर विभाग अपने स्तर पर जुटा है, मगर कोई बैठक में एक साथ बैठने को तैयार नहीं है. अग्नि सुरक्षा कार्ययोजना क्रियान्वयन समिति जो पिछले चार-पांच सालों में राज्य में आग लगने की घटनाओं को रोकने में सफल हुई, उसकी बैठक अगर नियमित हो तो अपेक्षित नतीजे सामने आ सकते हैं.  

Read more!