पांच हफ्ते में तीन बड़ी जिम्मेदारियां, BJP संगठन में हरीश द्विवेदी का कद कैसे बढ़ा?

2024 में बस्ती से लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी BJP ने हरीश द्विवेदी को संगठन में बनाए रखा. पांच हफ्तों में राष्ट्रीय महामंत्री, भाजयुमो के राष्ट्रीय प्रभारी और बिहार-कर्नाटक के प्रभारी की जिम्मेदारी मिलने से उनका संगठनात्मक दायरा तेजी से बढ़ा है

Harish Dwivedi
नितिन नवीन के साथ हरीश द्विवेदी (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल के जिले बस्ती से निकले हरीश द्विवेदी का भारतीय जनता पार्टी (BJP) संगठन में कद तेजी से बढ़ा है. 17 अगस्त 2026 को उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय टीम में महामंत्री बनाया गया. 10 सितंबर को भारतीय जनता युवा मोर्चा का राष्ट्रीय प्रभारी और 23 सितंबर को बिहार तथा कर्नाटक का प्रभारी नियुक्त किया गया. 

करीब पांच सप्ताह में मिली इन जिम्मेदारियों ने उनके संगठनात्मक दायरे को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया है. 2024 में बस्ती लोकसभा सीट से चुनाव हारने के बाद भी पार्टी में उनकी भूमिका कम नहीं हुई, बल्कि संगठन के स्तर पर बढ़ती गई. 

23 सितंबर को BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह प्रभारी घोषित किए. हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक का प्रभार मिला. बिहार में संगीता यादव और रोहन गुप्ता सह प्रभारी हैं, जबकि कर्नाटक में डॉ. कसम वेंकटेश्वरलु सह प्रभारी बनाए गए हैं. इससे पहले द्विवेदी असम के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.

22 अक्टूबर 1973 को बस्ती में जन्मे हरीश द्विवेदी ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया. उनकी राजनीतिक शुरुआत 1991 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई. 1993 से 1995 तक उन्होंने बस्ती में संगठन की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद BJP युवा मोर्चा में प्रदेश सह मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष रहे. 

वे 2010 से 2013 तक वह उत्तर प्रदेश भाजयुमो के अध्यक्ष रहे. 2012 में बस्ती सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली. इसके दो साल बाद लोकसभा चुनाव ने उनके राजनीतिक सफर को नई दिशा दी. 

हरीश द्विवेदी 2024 का लोकसभा चुनाव हार गए थे (फाइल फोटो)

2014 में BJP ने उन्हें बस्ती लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया. हरीश द्व‍िवेदी ने पहली बार चुनाव जीता. 2019 में भी पार्टी ने उन्हें इसी सीट से उतारा और वे लगातार दूसरी बार सांसद बने. संसद की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक हरीश द्विवेदी 16वीं और 17वीं लोकसभा के सदस्य रहे. ऊर्जा, वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी समेत विभिन्न समितियों में काम किया. 29 सितंबर 2021 से वह लोकसभा की याचिका समिति के अध्यक्ष रहे. 

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 86 प्रतिशत रही और उन्होंने 328 सवाल पूछे. 17वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 74 प्रतिशत और सवालों की संख्या 190 रही. सांसद रहते हुए वह BJP के राष्ट्रीय सचिव भी बने और उत्तर प्रदेश से बाहर संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालने लगे. 

2024 में हार लेकिन संगठन में बढ़ी भूमिका

2014 और 2019 में बस्ती से जीत दर्ज करने वाले द्विवेदी 2024 में तीसरी बार चुनाव मैदान में उतरे. इस बार समाजवादी पार्टी के राम प्रसाद चौधरी ने उन्हें 1,00,994 मतों से हराया. चौधरी को 5,27,005 और द्विवेदी को 4,26,011 वोट मिले. 

लेकिन चुनावी हार के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका खत्म नहीं हुई. BJP ने उन्हें संगठन में बनाए रखा और असम का प्रभारी बनाया. इसके बाद राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में भी संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई. इससे उनका फोकस लोकसभा की चुनावी राजनीति से बढ़कर संगठन संचालन की ओर गया. यही बदलाव उनकी मौजूदा भूमिका को समझने की अहम कड़ी है. 

बस्ती से चुनाव हारने के बावजूद पार्टी ने उनके संगठनात्मक अनुभव का इस्तेमाल जारी रखा और 2026 में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बड़ी जिम्मेदारियां मिलीं. 

पार्टी के वरिष्ठ नेता बताते हैं, “हरीश द्विवेदी ने अपने संगठनात्मक कामकाज से यूपी में तत्कालीन संगठन महामंत्री रहे सुनील बंसल का विश्वास जीता था. वे बंसल के नजदीकी नेताओं में शुमार थे. फिर उनकी संगनात्मक कामकाज की शैली को और विस्तार देते हुए उन्हें असम का प्रभारी बनाया गया था. असम विधानसभा चुनाव में BJP की जीत ने हरीश द्व‍िवेदी को पार्टी के भीतर कुशल रणनीतिकार के रूप में पहचान दी.” 

अगस्त-सितंबर में तेजी से बढ़ा दायरा

17 अगस्त 2026 को BJP ने नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम घोषित की और हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया. करीब तीन सप्ताह बाद 10 सितंबर को उन्हें भाजयुमो का राष्ट्रीय प्रभारी बनाया गया. इसके 13 दिन बाद 23 सितंबर को बिहार और कर्नाटक का प्रभार मिला. 

इन नियुक्तियों को अलग-अलग घटनाओं की बजाय उनके संगठनात्मक सफर के अगले चरण के रूप में देखा जा सकता है. द्विवेदी को पहले उत्तर प्रदेश में युवा संगठन चलाने का अनुभव मिला, फिर सांसद और राष्ट्रीय सचिव के तौर पर काम किया और बाद में असम जैसे राज्य की संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाली. 

अब उनके पास एक साथ दो राज्यों का प्रभार है. बिहार और कर्नाटक दोनों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं. राजनीतिक विश्लेषक बीना राय बताती हैं, “बिहार में BJP का संगठन गठबंधन की राजनीति और राज्य के जटिल सामाजिक समीकरणों के बीच काम करता है. कर्नाटक दक्षिण भारत में BJP के महत्वपूर्ण राज्यों में है. ऐसे में दोनों राज्यों की जिम्मेदारी का मतलब अलग-अलग राजनीतिक और संगठनात्मक परिस्थितियों में काम करना है. यही अब हरीश द्विवेदी के सामने एक बड़ी चुनौती भी है.” 

बिहार में द्विवेदी के साथ दो सह प्रभारी लगाए गए हैं. कर्नाटक में भी उनके साथ सह प्रभारी की नियुक्ति हुई है. इससे संकेत मिलता है कि पार्टी ने दोनों राज्यों में जिम्मेदारियों को साझा करते हुए संगठनात्मक कामकाज का ढांचा तैयार किया है.

BJP ने भरोसा क्यों जताया?

पार्टी ने इन नियुक्तियों के लिए कोई एक आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है. हालांकि द्विवेदी के करीब तीन दशक लंबे संगठनात्मक अनुभव को उनकी मौजूदा भूमिका की पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है. 

1991 में एबीवीपी से शुरुआत के बाद बस्ती में संगठन का काम, उत्तर प्रदेश भाजयुमो की अध्यक्षता, दो लोकसभा चुनावों में जीत, संसदीय समितियों में जिम्मेदारी, राष्ट्रीय सचिव का पद और असम का प्रभार हरीश द्विवेदी को संगठन और चुनाव, दोनों स्तरों का अनुभव देते हैं. 

इसके अलावा उनकी राजनीतिक यात्रा सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रही. असम के बाद अब बिहार और कर्नाटक की जिम्मेदारी मिलने से दूसरे राज्यों में संगठन के साथ काम करने का उनका अनुभव और विस्तृत होगा. 

नया ब्राह्मण चेहरा?

हरीश द्विवेदी की कहानी उत्तर प्रदेश के लिहाज से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बस्ती अवध और गोरखपुर क्षेत्र का मध्य बिंदु है. यहां की राजनीति में ब्राह्मण वर्ग का खासा दखल रहता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरीश द्व‍ि‍वेदी के जरिए पार्टी ने पूर्वांचल में एक नया ब्राह्मण चेहरा तैयार करने की कोश‍िश की है. 

बस्ती निवासी श‍िक्षक रमेश पांडेय बताते हैं, “हरीश ब्राह्मण जाति से तो आते ही हैं साथ में युवाओं में भी इनका अच्छा प्रभाव है. हरीश के जरिए पार्टी ने यह संदेश देने की भी कोश‍िश की है कि BJP में संगठन का काम करके ऊपर तक पहुंचा जा सकता है.” 

हरीश द्व‍िवेदी के मामले में BJP  के संगठनात्मक ढांचे का एक पहलू भी सामने आता है. किसी नेता की भूमिका केवल उसके चुनावी प्रदर्शन से तय नहीं होती. लंबे संगठनात्मक अनुभव, कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क और अलग-अलग राज्यों में काम करने की क्षमता भी पार्टी में जिम्मेदारी का आधार बन सकती है. इस तरह बस्ती से शुरू हुई हरीश द्व‍िवेदी की राजनीतिक यात्रा अब BJP के राष्ट्रीय संगठन में उनके बढ़ते दायरे की कहानी बन चुकी है.

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