गुजरात में गहराया बिजली संकट, कारोबारियों को हजारों करोड़ के नुकसान का डर

दिवाली से पहले बिजली कटौती ने गुजरात के कपड़ा और इंजीनियरिंग उद्योगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बढ़ती मांग और बिजली उत्पादन में कमी के बीच लाखों श्रमिकों की रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है

एक कपड़ा मिल में काम करते लोग (सांकेतिक तस्वीर)

दिवाली से कुछ हफ्ते पहले, जब सूरत के करघे और राजकोट की वर्कशॉप्स में आमतौर पर पूरी क्षमता से काम चल रहा होता है तब गुजरात में बिजली की कमी के कारण उद्योगों में काम बंद किया जा रहा है. सरकारी बिजली वितरण कंपनी दक्षिण गुजरात विज कंपनी लिमिटेड ने बिजली की कमी का हवाला देते हुए तय औद्योगिक फीडरों पर शाम 4 बजे से आधी रात तक बिजली कटौती का एलान किया है. कंपनी ने इसकी वजह बिजली की बढ़ती मांग और उत्पादन में आ रही दिक्कतों को बताया है.

दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) के अध्यक्ष अशोक जीरावाला इसे झटका बताते हुए कहते हैं कि कारोबारियों को दिवाली से पहले के अहम हफ्तों में अपने ऑर्डर पूरे करने और सामान भेजने होते हैं. उनके मुताबिक सरकार ने पिछले 20 से 25 साल में इतनी गंभीर बिजली कटौती नहीं की थी. हालांकि जीरावाला यह भी कहते हैं कि राज्य सरकार आम तौर पर उद्योगों के अनुकूल रही है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस समस्या का हल निकाल लेगी.

SGCCI का अनुमान है कि दक्षिण गुजरात में करीब 25 लाख मजदूरों की रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है और इससे हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है. बुनकरों के एक नेता के मुताबिक, अकेले कपड़ा उत्पादन में हर हफ्ते 300 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है. राजकोट की इंजीनियरिंग इकाइयों ने बुधवार को काम बंद रखने का दिन तय किया है.

फिलहाल विवाद बिजली कटौती के समय को लेकर है. SGCCI चाहता है कि हफ्ते में एक दिन आठ घंटे की बिजली कटौती शाम 7 बजे के बाद शुरू हो जबकि बिजली वितरण कंपनी इसे शाम 6 बजे से शुरू करना चाहती है. वहीं साणंद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (SIA) के एक पदाधिकारी ने छोटे और मझोले उद्योगों को लगातार बिजली देने की मांग की है.

दिवाली के पहले उद्योगों में काम बढ़ने के साथ बिजली की खपत भी बढ़ जाती है (सांकेतिक तस्वीर)

हाल के वर्षों में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच ऐसा दबाव पहले कभी नहीं देखा गया है. इसमें जलवायु में उतार-चढ़ाव की अहम भूमिका रही है. गुजरात में बिजली की सबसे ज्यादा मांग 16 अक्टूबर को रिकॉर्ड 29,822 मेगावाट तक पहुंच गई जो पिछले साल इसी अवधि के 21,822 मेगावाट से 36.6 फीसदी ज्यादा है. सितंबर और अक्टूबर के दौरान बिजली की मांग पिछले वर्षों के मुकाबले करीब 12 फीसदी यानी लगभग 4,000 मेगावाट अधिक रही है.

राज्य सरकार के बयानों के मुताबिक, कमजोर मानसून के बाद लगातार गर्मी पड़ने, अल नीनो के असर, कूलिंग के लिए बिजली की ज्यादा जरूरत, सिंचाई के लिए बिजली की बढ़ी मांग, नवरात्रि में रातभर चलने वाले गरबा कार्यक्रमों और दिवाली से पहले औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के कारण बिजली की मांग में उछाल आया है. अकेले कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग रोजाना करीब 12,000 मेगावाट तक पहुंच जाती है.

दूसरी ओर बिजली की आपूर्ति में गिरावट आई है. आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर में पानी से बिजली बनाने का उत्पादन अच्छी तरह होता है लेकिन गुजरात और पड़ोसी राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण इसमें गिरावट आई है. हवा की रफ्तार धीमी होने से पवन ऊर्जा का उत्पादन भी घटा है.

सूर्यास्त के बाद सौर ऊर्जा का उत्पादन शून्य हो जाता है. ऐसे में शाम 5 बजे से रात 11 बजे के बीच बिजली की सबसे ज्यादा मांग पूरी करने का जिम्मा कोयले और गैस से चलने वाले बिजलीघरों पर आ जाता है. बिजली को बैटरी में जमा करने की क्षमता अभी भी सीमित है. फिलहाल केवल 192 मेगावाट की बैटरी भंडारण क्षमता ही चालू है.

बिजली की कमी का दबाव केवल गुजरात तक सीमित नहीं है. पूरे देश में भी बिजली की आपूर्ति कम पड़ रही है. 19 अक्टूबर को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने बताया कि भारत के कोयले से चलने वाले 191 प्लांटों में से 96 में कोयले का स्टॉक बेहद कम रह गया था.

गुजरात के कपड़ा उद्योग के लिए यह संकट ऐसे समय आया है जब वह पहले से ही घटती मांग, धीमे कारोबार और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की कपड़ा और परिधान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंपालाल बोथरा कहते हैं, "कपड़ा उद्योग मंदी, धीमे कारोबार और भुगतान में देरी से जूझ रहा है. कई व्यापारियों का कारोबार इस बार उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है. कई औद्योगिक इकाइयों में एक शिफ्ट में उत्पादन बंद रखा जा रहा है."

चुनावी साल से पहले सरकार इस संकट को संभालने की कोशिश में जुटी है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 20 अक्टूबर को बिजली की स्थिति की समीक्षा की. मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक उन्होंने ऊर्जा विभाग को बिजली की मांग को नियंत्रित करने के उपायों में तेजी लाने, बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक बिजली उत्पादन की क्षमता की योजना को मजबूत करने का निर्देश दिया.

केंद्र सरकार ने गुजरात को नवंबर तक रोजाना 10 से 11 अतिरिक्त कोयला रेक देने का भरोसा दिया है. इसके बाद यह संख्या बढ़कर रोजाना 13 से 14 रेक होने की उम्मीद है. राज्य ने अक्टूबर में 2,990 मेगावाट, नवंबर में 1,740 मेगावाट और दिसंबर में 1,335 मेगावाट बिजली की अल्पकालिक खरीद के भी इंतजाम किए हैं. लोगों से अपील की गई है कि वे शाम 5 बजे से रात 11 बजे के बीच बिजली का इस्तेमाल करने से बचें.

हालांकि लंबे समय के समाधान इस साल त्योहारों के सीजन तक नहीं मिल पाएंगे. 500 मेगावाट की क्षमता और 1,000 मेगावाट-घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता वाली बैटरी परियोजना मार्च 2027 तक पूरी होने वाली है. उकाई पावर स्टेशन में 800 मेगावाट की एक इकाई सितंबर 2029 तक तैयार होने की उम्मीद है, जबकि राज्य की पहली परमाणु बिजली इकाई के 2032 में चालू होने का अनुमान है.

तब तक गुजरात सरकार का कहना है कि राज्य में बिजली की आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है. हालांकि राज्य के औद्योगिक इलाकों में कारखानों में शाम के समय होने वाली बिजली कटौती का असर पहले से ही दिखने लगा है.

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