‘ड्राई स्टेट’ गुजरात में कैसे चल रहा शराब का कारोबार?

भावनगर में जहरीली शराब से 13 मौतें और 30 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की घटना ने शराबबंदी के बावजूद चल रहे अवैध कारोबार को फिर सामने ला दिया है

One of the key proposals is the introduction of a single liquor licence for hotels operating multiple restaurants, bars and service areas within the same premises.
शराब कानूनों के तहत दर्ज मामलों में गुजरात देश में सबसे आगे है (सांकेतिक तस्वीर)

गुजरात के भावनगर जिले में 18 अगस्त से अब तक जहरीली शराब पीने से कम से कम 13 लोगों की मौत हो चुकी है और 30 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 36 घंटे के भीतर मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ने के बीच पुलिस ने 12 संदिग्ध शराब तस्करों को हिरासत में ले लिया है.

भावनगर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक आर.वी. असारी ने बताया कि 21 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

पुलिस के मुताबिक घटना घोघा तालुका के खरकड़ी गांव में एक खेत में आयोजित जमावड़े के दौरान हुई. यहां एक समूह ने कथित तौर पर लोकप्रिय IMFL यानी इंडियन मेड फॉरेन लिकर ब्रांड के नाम से बेची जा रही नकली शराब पी थी. 

जिले के अधिकारियों ने बताया कि यह जहरीली देसी शराब यानी हूच का मामला नहीं था. गुजरात में पहले भी इस तरह के स्थानीय स्तर पर केमिकल मिलाकर बनाई गई शराब पीने से सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है.

पहली मौत 18 अगस्त की शाम हुई. इसके बाद मौतों को सिलसिला जारी रहा और 23 अगस्त की रात को दो और लोगों ने दम तोड़ दिया. शुरुआती जांच में पता चला है कि शराब की आपूर्ति मध्य प्रदेश से की गई थी. पुलिस ने कहा कि तस्करी के नेटवर्क के जरिए लाई गई अवैध शराब के करीब 90 प्रतिशत स्टॉक को बरामद कर लिया गया है और इसके आपूर्तिकर्ताओं की पहचान भी कर ली गई है.

पुलिस की विशेष शाखा स्टेट मॉनिटरिंग सेल ने जांच अपने हाथ में ले ली है. भावनगर के वरतेज इलाके के अंबलीवाड़ी में संदिग्ध मिलावट वाली जगह से फॉरेंसिक टीम ने नमूने जुटाए हैं.

यह मामला चौंकाने वाला जरूर है, लेकिन कोई अकेली घटना नहीं है. जुलाई 2022 में भावनगर और पड़ोसी बोटाद गुजरात में एक दशक से ज्यादा समय की सबसे घातक जहरीली शराब त्रासदी के केंद्र रहे थे. 

गुजरात में मध्य प्रदेश और राजस्थान से शराब तस्करी होती है (सांकेतिक तस्वीर)

उस समय गांवों में जहरीली शराब पीने से 42 लोगों की मौत हुई थी. शराब तस्करों ने चोरी किए गए औद्योगिक मिथाइल अल्कोहल में पानी मिलाकर उसे 20 रुपए प्रति पाउच की दर से देसी शराब के तौर पर बेचा था.

पुलिस महानिदेशक आशीष भाटिया ने बताया था कि उस समय फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई थी कि मृतकों ने मेथनॉल का सेवन किया था. पुलिस ने सैकड़ों लीटर यह रसायन बरामद किया था.

उस समय की इस त्रासदी को 2009 के बाद राज्य की सबसे बड़ी शराब त्रासदी बताया गया था. 2009 में अहमदाबाद में जहरीली शराब पीने से तीन दिनों में 148 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद गठित एक आयोग ने औद्योगिक मेथनॉल के परिवहन और भंडारण पर सख्त नियंत्रण की सिफारिश की थी. हालांकि आलोचकों का कहना है कि इन दिशानिर्देशों को लागू करने में गंभीरता नहीं दिखाई गई.

बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं गुजरात के ड्राई स्टेट मॉडल की एक संरचनात्मक समस्या की ओर भी इशारा करती हैं. 1960 से गुजरात में शराब के निर्माण, बिक्री और रखने पर पूरी तरह प्रतिबंध है. यह नीति महात्मा गांधी की विरासत से जुड़ी है. 2017 में कानून में संशोधन के बाद 1949 के गुजरात प्रोहिबिशन एक्ट के तहत अपराधों के लिए 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया.

आलोचकों का मानना है कि शराबबंदी ने शराब की आपूर्ति को रोकने के बजाय उसे अंडरग्राउंड कारोबार की ओर धकेल दिया है. उनका कहना है कि शराब तस्कर मध्य प्रदेश, राजस्थान और दमन से शराब और कच्ची शराब की तस्करी करते हैं या स्थानीय स्तर पर देसी शराब बनाते हैं. 

मुनाफा बढ़ाने के लिए इसमें कई बार सस्ती और जानलेवा औद्योगिक मेथनॉल मिलाया जाता है. यह कारोबार उन दिहाड़ी मजदूरों की मांग पर भी चलता है जो ब्रांडेड शराब खरीदने में सक्षम नहीं हैं और कानूनी तौर पर उसे हासिल नहीं कर सकते.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी इस समानांतर अर्थव्यवस्था के पैमाने को दिखाते हैं. गुजरात में शराबबंदी और शराब कानूनों के तहत दर्ज मामलों की संख्या लगातार देश में सबसे ज्यादा रही है. 

2022 में यहां ऐसे 3.10 लाख मामले दर्ज किए गए थे जबकि इससे एक साल पहले इनकी संख्या 2.83 लाख थी. NCRB के पहले के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में दर्ज ऐसे मामलों में गुजरात की हिस्सेदारी करीब आधी रही है.

2022 की बोटाद त्रासदी के बाद राज्य के DGP ने बताया था कि उससे पहले के 19 महीनों में ही शराबबंदी कानून के तहत 2.50 लाख से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया था. कार्रवाई के ये आंकड़े भी दिखाते हैं कि प्रतिबंध के बावजूद अवैध शराब का कारोबार कितना गहरा हो चुका है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और भावनगर के पूर्व सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने आरोप लगाया कि प्रभावित इलाके में नकली शराब की करीब 250 बोतलें बेची गई थीं. उनकी पार्टी ने पहली मौत से निपटने में लापरवाही का आरोप भी लगाया. 

कांग्रेस का दावा है कि शव को पोस्टमार्टम के बिना उज्जैन भेजने की अनुमति दी गई और जहरीली शराब पीने के बाद कुछ पीड़ितों की आंखों की रोशनी चली गई.

कांग्रेस ने BJP पर रिश्वत लेने और अवैध शराब का कारोबार चलाने वालों को खुली छूट देने का आरोप लगाया. पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि सत्ताधारी पार्टी के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा क्यों नहीं दिया.

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