गोवा चुनाव से पहले जातीय आरक्षण की सियासी आग कैसे बुझा रही BJP?
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने गौली-धनगर को ST दर्जा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ने और भंडारी समुदाय की आरक्षण के भीतर आरक्षण की मांग पर विचार का भरोसा दिया है

गोवा के सीएम प्रमोद सावंत
गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आरक्षण को लेकर उठ रही सियासी हलचल को शांत करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि गौली-धनगर समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की प्रक्रिया चल रही है.
उन्होंने यह भी भरोसा दिया कि राज्य के सबसे बड़े जातीय समूह भंडारी समुदाय की आरक्षण के भीतर आरक्षण की मांग पर भी विचार किया जा रहा है.
सावंत ने हाल ही में विधानसभा में कहा था, "धनगर समुदाय को ST श्रेणी में शामिल करने की प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है. उन्हें लगा था कि यह प्रक्रिया रुक गई है लेकिन ऐसा नहीं है. इस पर प्रक्रिया चल रही है. आरक्षण के भीतर आरक्षण की प्रक्रिया OBC आयोग में चल रही है." वे गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के विजय सरदेसाई के सवाल का जवाब दे रहे थे.
गोवा की BJP सरकार पर गौली-धनगर समुदाय को जनजाति का दर्जा देने की मांग का दबाव बढ़ रहा है. भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय पहले इस मांग को खारिज कर चुके हैं.
मार्च में भारत के रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय ने कहा था कि यह समुदाय केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सूची में 'धनगर' के रूप में दर्ज है. उसने यह भी कहा था कि मांग पर दोबारा विचार करने के लिए कोई नया आंकड़ा नहीं दिया गया है.
इस झटके के बाद सावंत ने जून में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को पत्र लिखकर समुदाय की ‘अलग सामाजिक-आर्थिक कमजोरियों’ के आधार पर इस मामले की समीक्षा करने की मांग की.
सावंत ने अपने पत्र में लिखा था, "गौली-धनगर वह पहला समुदाय था जिसे गोवा सरकार ने 1963 में ही ST सूची में शामिल करने की सिफारिश की थी. 1992 में गोवा सरकार ने केवल गौली-धनगर समुदाय को अनुसूचित जनजाति घोषित करने की मांग की थी. इसके बाद 1993 में गावड़ा, कुनबी और वेलिप को शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया."
उन्होंने आगे कहा था कि इस समुदाय में आदिम विशेषताएं हैं, इसकी संस्कृति अलग है, यह भौगोलिक रूप से अलग-थलग इलाकों में रहता है और इसकी बस्तियां भी अलग हैं. उन्होंने समुदाय की सामान्य सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन का भी जिक्र किया था.
गोवा की आदिवासी आबादी 1,49,275 है जो राज्य की कुल आबादी का करीब 10.23 फीसदी है. इसमें रोमन कैथोलिक ईसाई भी शामिल हैं. आदिवासी लोगों को गोवा के मूल बसने वाले और निवासी माना जाता है.
उत्तर गोवा में आदिवासी आबादी 56,606 होने का अनुमान है, जो क्षेत्र की 8,18,008 की आबादी का 6.9 फीसदी है. वहीं दक्षिण गोवा में आदिवासी आबादी 92,669 है जो वहां की 6,40,537 की आबादी का 14.47 फीसदी है.
राज्य में गौली-धनगर समुदाय की आबादी करीब 25,000 होने का अनुमान है. तिसवाड़ी को छोड़कर, जिसमें राजधानी पणजी और ओल्ड गोवा शामिल हैं, इस समुदाय की मौजूदगी ज्यादातर तालुकों में है. हालांकि चुनाव में कम मतदाता वाले विधानसभा क्षेत्रों की वजह से यह समुदाय नतीजों को प्रभावित कर सकता है. उदाहरण के लिए, 2022 में सांखलिम सीट पर मुख्यमंत्री सावंत ने कांग्रेस के धर्मेश सगलानी को सिर्फ 666 वोटों से हराया था.
1980 के दशक में गौड़ा, वेलिप, कुनबी और धनगर समुदायों के सदस्यों ने 'मूल गोंयकारांचो एकवोट' आंदोलन शुरू किया था और ST का दर्जा देने की मांग की थी. 2003 में गौड़ा, वेलिप और कुनबी समुदायों को ST श्रेणी में शामिल कर लिया गया.
हालांकि पारंपरिक चरवाहे और जंगलों में रहने वाले समुदाय के रूप में वर्णित धनगरों को इसमें शामिल नहीं किया गया. ST श्रेणी में डुबला, सिद्दी, नाइकडा, वारली और धोडिया जैसे छोटे आदिवासी समूह भी शामिल हैं.
गोवा के आदिवासी मतदाता उन्हें राजनीतिक आरक्षण देने में हो रही देरी से नाराज हैं. अगर इसे लागू किया जाता है तो विधानसभा की 40 में से चार सीटें ST के लिए आरक्षित हो सकती हैं. आदिवासी लोग दो दशक से ज्यादा समय से राजनीतिक आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.
माना जाता है कि इस नाराजगी का असर 2024 के दक्षिण गोवा लोकसभा चुनाव में BJP को झेलना पड़ा जहां पार्टी की पल्लवी डेम्पो को कांग्रेस के कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस (सेवानिवृत्त) ने बड़े अंतर से हरा दिया था.
गोवा की प्रियोल, नुवेम, क्वेपेम, सांगेम और वेलिम विधानसभा सीटों पर आदिवासी समुदायों की संख्या काफी है. नौकरियों और शिक्षा में ST और अनुसूचित जाति (SC) के लिए क्रमशः 12.5 फीसदी और 2 फीसदी आरक्षण है, लेकिन विधानसभा में ST को राजनीतिक आरक्षण नहीं मिला है.
विधानसभा में SC के लिए एक सीट आरक्षित है. यह उत्तर गोवा में महाराष्ट्र की सीमा से लगी पेरनेम सीट है जिसका प्रतिनिधित्व BJP के प्रवीण अर्लेकर करते हैं.
गोवा में ST को राजनीतिक आरक्षण देने वाला विधेयक अगस्त 2025 में संसद से मंजूर हो गया था. केंद्र सरकार ने कानून लागू करने के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है लेकिन यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि गोवा में विधानसभा चुनाव की घोषणा होने तक यह आरक्षण लागू हो पाएगा या नहीं.
शर्मिला पाइस और प्रजल साखरदांडे की किताब 'द क्वेस्ट फॉर गोवा: हिस्ट्री एंड हेरिटेज ऑफ गोवा फ्रॉम एंशिएंट टाइम्स टू 2019' के मुताबिक, गौड़ा और वेलिप कुनबी समुदाय के ही एक उप-समूह के रूप में उभरे हैं.
इसी तरह, गोवा की आबादी का करीब एक-तिहाई हिस्सा माने जाने वाले भंडारी समुदाय ने OBC श्रेणी में आरक्षण के भीतर आरक्षण की मांग की है. भंडारी समुदाय का कहना है कि उनके लिए अलग से तय यह आरक्षण सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेगा.
भंडारी संगठनों ने गोवा में ST के राजनीतिक आरक्षण को लेकर भी चिंता जताई है. उनका कहना है कि यह आरक्षण तभी लागू किया जाना चाहिए जब जातिगत जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाए.
जानकारों का कहना है कि BJP आरक्षण के इस मुद्दे पर दोनों पक्षों को साधने की कोशिश कर सकती है. एक तरफ वह आदिवासी आबादी को आरक्षण का भरोसा दे रही है तो दूसरी तरफ इस कदम के विरोधियों तक भी पहुंच बना रही है.