कांग्रेस को शामिल करने की मांग पर खतरे में पड़ा AAP का 'गोवा फर्स्ट' गठबंधन
आम आदमी पार्टी (AAP) ने गोवा विधानसभा चुनाव के लिए गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के साथ मिलकर 'गोवा फर्स्ट' गठबंधन बनाया था. लेकिन अब GFP के नेता विजय सरदेसाई कांग्रेस समेत सभी बीजेपी विरोधी दलों को साथ लाने की वकालत कर रहे हैं

'गोवा फर्स्ट' गठबंधन की घोषणा के मौके पर AAP और GFP के नेता (फाइल फोटो)
गोवा में आम आदमी पार्टी (AAP) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के गठबंधन 'गोवा फर्स्ट' के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं. 2027 के चुनाव के लिए कुछ ही हफ्ते पहले बने इस गैर-कांग्रेसी और गैर-बीजेपी गठबंधन का आगे का रास्ता साफ नहीं दिख रहा है.
इसकी वजह GFP अध्यक्ष विजय सरदेसाई का बदलता रुख है. वे कांग्रेस को भी शामिल करते हुए विपक्षी दलों के 'महागठबंधन' की मांग दोबारा उठा रहे हैं ताकि डॉ. प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली सरकार को बड़ी चुनौती दी जा सके.
इस घटनाक्रम के पीछे सरदेसाई के विधानसभा क्षेत्र फतोर्दा के समीकरण भी हो सकते हैं. यह क्षेत्र मडगांव के पास है. माना जा रहा है कि अगर वे तीसरे मोर्चे के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरते हैं तो उन्हें बीजेपी और कांग्रेस, दोनों के बीच से रास्ता निकालना पड़ सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मोर्चे का सबसे पहला नुकसान सरदेसाई को ही उठाना पड़ सकता है.
40 सदस्यीय विधानसभा में AAP के दो विधायक हैं. इनमें बेनाउलिम से वेन्जी विएगास और वेलिम से क्रूज सिल्वा शामिल हैं. वहीं सरदेसाई GFP के इकलौते विधायक हैं. हाल के दिनों में राज्यभर में 'गोवा फर्स्ट' के समर्थन में लगाए गए बैनर हटा दिए गए हैं. इन बैनरों में कांग्रेस और बीजेपी पर निशाना साधा गया था.
AAP का आरोप है "बीजेपी-कांग्रेस की संयुक्त कंपनी ने पिछले एक दशक में मिलकर गोवा को बर्बाद किया है." गोवा में AAP के अध्यक्ष वाल्मीकि नाइक ने सरदेसाई से फैसला करने को कहा कि वे "बीजेपी-कांग्रेस की संयुक्त कंपनी के साथ खड़े हैं या गोवा की जनता के साथ." AAP ने जोर देकर कहा कि उसने शुरुआत से ही 'गोवा फर्स्ट' को गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेसी मोर्चा बताया था.
इधर कांग्रेस ने राज्यभर में 'गोय राखोन यात्रा' शुरू की है. इस बीच विधायक वेन्जी विएगास ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने जनादेश और अपने विधायकों की रक्षा करने में नाकाम रही है. उन्होंने दावा किया कि वे और उनके साथी विधायक क्रूज सिल्वा "बीजेपी के कई प्रलोभनों के बावजूद" पार्टी छोड़कर नहीं गए.
सरदेसाई ने संकेत दिया है कि विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस को शामिल करना जरूरी है. उन्होंने कहा, "राजनीति में मतदाता ही राजा होता है. गोवा के मतदाता महागठबंधन चाहते हैं." उन्होंने जोर देकर कहा कि यह "सभी को साथ लेकर चलने वाला महागठबंधन होना चाहिए जिसमें वे सभी दल शामिल हों जो वास्तव में बीजेपी के विरोधी हैं." सरदेसाई ने कहा कि इसलिए मुख्य विपक्षी दल को निशाना बनाना लोगों को पसंद नहीं है.
इससे पहले GFP के एक नेता ने दावा किया था कि कांग्रेस ने गठबंधन और सरदेसाई के पार्टी में विलय के प्रस्ताव पर फैसला लेने में देर की. इससे सरदेसाई को कांग्रेस के साथ गठबंधन के बारे में दोबारा सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा.
हालांकि सूत्रों का कहना है कि AAP के साथ गठबंधन को लेकर सरदेसाई के पीछे हटने की एक वजह दोनों दलों के बीच मजबूत तालमेल का अभाव भी हो सकती है. उनके विधानसभा क्षेत्र में AAP का मजबूत जमीनी आधार नहीं है.
इसी तरह AAP के प्रभाव वाले इलाकों में GFP की स्थिति भी ऐसी ही है. इसका मतलब है कि दोनों दलों के बीच वोटों का ज्यादा हस्तांतरण नहीं हो पाएगा. किसी भी गठबंधन की सफलता का आकलन करने की एक अहम कसौटी यही होती है कि एक दल के वोट दूसरे दल के उम्मीदवार को कितने मिलते हैं. कांग्रेस के एक नेता ने दावा किया कि GFP और AAP का गठबंधन दोनों में से किसी भी पार्टी को खास फायदा नहीं पहुंचा सकता.
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दामोदर 'दामू' नाइक, जो फतोर्दा से पूर्व विधायक रह चुके हैं, सरदेसाई के खिलाफ फिर चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं. सरदेसाई तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं. कांग्रेस भी उनके विधानसभा क्षेत्र में मजबूत उम्मीदवार उतारकर उन्हें चुनौती देने की कोशिश कर रही है. इस क्षेत्र में ईसाई और मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी-खासी आबादी है.
यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए राहत भरा हो सकता है. माना जा रहा था कि 'गोवा फर्स्ट' दक्षिण गोवा के राजनीतिक रूप से अहम सालसेते तालुका में कांग्रेस के वोट काट सकता है. राज्य की 40 विधानसभा सीटों में से आठ इसी तालुका में हैं. यहां करीब 36 फीसदी रोमन कैथोलिक और लगभग 10 फीसदी मुस्लिम आबादी है.
चर्चा है कि कांग्रेस के कई पदाधिकारी 'गोवा कांग्रेस' नाम की नई पार्टी में शामिल हो सकते हैं. इस पार्टी का नाम कांग्रेस से मिलता-जुलता है. नेताओं और विश्लेषकों का मानना है कि इससे कांग्रेस के मतदाताओं के बीच ‘भ्रम’ पैदा हो सकता है.
लगातार तीन कार्यकाल विपक्ष में रहने के बाद सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस को दक्षिण गोवा की 20 सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करना होगा. उत्तर गोवा में पार्टी की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है.
कांग्रेस को उम्मीद है कि स्थानीय लोगों के हितों और 'माटी के बेटों' की राजनीति करने वाली रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (RGP) के साथ उसका लगभग तय गठबंधन सत्ता में वापसी में मदद करेगा. गोवा के युवाओं के बीच RGP का समर्थन है. AAP के प्रमुख नेता अमित पालेकर और प्रतिमा कूटिन्हो के कांग्रेस में शामिल होने से भी पार्टी को फायदा मिलने की उम्मीद है.
गोवा विधानसभा में RGP का एक विधायक है. इस पार्टी के साथ गठबंधन से कांग्रेस को हिंदू बहुजन समाज के वोट मिलने में मदद मिल सकती है, खासकर उत्तर गोवा में.
2022 में राज्य में तृणमूल कांग्रेस, AAP और RGP जैसी छोटी पार्टियों की मौजूदगी ने काफी हद तक बीजेपी को सत्ता में आने में मदद की थी. सितंबर 2022 में कांग्रेस के 11 में से आठ विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे. 2019 से अब तक कांग्रेस के 18 विधायक बीजेपी में जा चुके हैं.
शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक युगांक नाइक ने कहा कि 2027 के चुनाव में मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधनों के बीच सिमटने की संभावना है. उनके मुताबिक, तीसरे मोर्चे के लिए बहुत कम या बिल्कुल जगह नहीं बचेगी. हालांकि मुख्यमंत्री सावंत की बहुजन समाज के एक वर्ग में लोकप्रियता समेत सामाजिक समीकरण अब भी बीजेपी के पक्ष में हैं.