गोवा में चुनाव से पहले यात्राओं के जरिए BJP की घेराबंदी, क्या हैं विपक्ष के मुद्दे?
गोवा चुनाव से पहले AAP ने नवंबर-दिसंबर में महंगाई के खिलाफ 'म्हारगाई मुक्ति यात्रा' निकालने का ऐलान किया है. इससे पहले कांग्रेस अपनी यात्रा निकाल चुकी है.

गोवा में आम आदमी पार्टी के नेता (फाइल फोटो)
गोवा में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसे देखते हुए राज्य में राजनीतिक यात्राओं का दौर शुरू हो गया है. मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने के लिए कांग्रेस की ओर से राज्य में यात्रा निकाले जाने के बाद अब आम आदमी पार्टी (AAP) ने नवंबर-दिसंबर में 'म्हारगाई मुक्ति यात्रा' निकालने का ऐलान किया है. कोंकणी में 'म्हारगाई' का मतलब महंगाई होता है.
गोवा में AAP के अध्यक्ष वाल्मीकि नाइक के मुताबिक यह यात्रा 27 नवंबर (संविधान दिवस) से शुरू होगी और 19 दिसंबर को खत्म होगी. 19 दिसंबर को गोवा मुक्ति दिवस मनाया जाता है. नाइक ने कहा कि AAP के नेता पूरे राज्य का दौरा कर लोगों की मांगें, उम्मीदें और उनकी समस्याएं सुनेंगे. इस दौरान पार्टी अपनी छह 'आमची गोंयक गारंटी' का भी प्रचार करेगी.
AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का कहना है कि बढ़ती महंगाई ने आम गोवावासियों की जिंदगी मुश्किल कर दी है. उन्होंने पार्टी की छह गारंटी के बारे में भी बताया. इनमें गोवा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट में किए गए विवादित संशोधन को खत्म करना शामिल है, जिसके तहत जमीन को कारोबारी इस्तेमाल के लिए बदला जा सकता है.
इसके अलावा बिना रुकावट बिजली की सप्लाई के साथ मुफ्त बिजली, हर परिवार को 10 लाख रुपए का हेल्थ इंश्योरेंस, महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपए की आर्थिक मदद, महिलाओं के लिए बस में मुफ्त सफर और हर गांव में युवाओं के लिए विश्वस्तरीय खेल के मैदान बनाने का वादा शामिल है. केजरीवाल ने कहा कि इन गारंटीयों का मकसद परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करना है.
AAP की यह मुहिम सितंबर-अक्टूबर में कांग्रेस की 'गोय राखोन यात्रा' (गोवा बचाओ यात्रा) के बाद शुरू हो रही है. इस यात्रा के दौरान कांग्रेस ने राजनीतिक और कारोबारी हितों से गोवा की 'जमीन, पहचान, पर्यावरण और भविष्य' की रक्षा करने का वादा किया था. यात्रा का समापन कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक जनसभा के साथ हुआ था.
'गोय राखोन यात्रा' की याद 2012 में BJP के दिवंगत नेता मनोहर पर्रिकर की ओर से निकाली गई 'जन संपर्क यात्रा' से भी जुड़ती है. उस समय पर्रिकर राज्य में विपक्ष के नेता थे. उनकी इस कोशिश से BJP के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को दिगंबर कामत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ एकजुट करने में मदद मिली थी. इसके कुछ महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई थी.
गोवा में डॉ. प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली BJP सरकार के खिलाफ जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, समुद्र में चलने वाले कैसीनो और अन्य बड़े प्रोजेक्ट जैसे मुद्दों को लेकर विरोध बढ़ रहा है. उदाहरण के लिए, करापुर-सारवन गांव के लोग मुंबई के एक बड़े रियल एस्टेट कारोबारी की ओर से प्रस्तावित बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. कोयले की ढुलाई के लिए रेलवे लाइनों को डबल करने के प्रोजेक्ट का भी विरोध हो रहा है. सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों और कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है. इन प्रोजेक्ट्स से गोवा की आबादी का स्वरूप और सांस्कृतिक पहचान कमजोर हो सकती है.
कांग्रेस ने गोवा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट की विवादित धारा 39(A) को खत्म करने का वादा किया है. इस धारा के तहत जमीन के इस्तेमाल को कारोबारी गतिविधियों के लिए बदला जा सकता है.
दूसरी ओर AAP की 'गोवा फर्स्ट' नाम से तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिशों को झटका लगा है. इस मोर्चे में गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) को भी शामिल किया जाना था लेकिन GFP ने इस गठबंधन से दूरी बना ली और कांग्रेस के साथ बातचीत शुरू कर दी. कांग्रेस ने स्थानीय युवाओं के संगठन रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (RGP) के साथ गठबंधन किया है. हालांकि, RGP में गुटबाजी और सीटों के बंटवारे को लेकर दिक्कतें अब भी बनी हुई हैं.
माना जा रहा था कि 'गोवा फर्स्ट' गठबंधन बनने से विपक्षी वोट बंट जाएंगे. वहीं BJP के सामने लगातार चौथी बार सत्ता में आने की बड़ी चुनौती है. 2022 के चुनाव में AAP, RGP और तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों की मौजूदगी को कांग्रेस-GFP गठबंधन की हार की एक वजह माना जाता है.
कांग्रेस के सामने मतदाताओं का भरोसा जीतने की चुनौती भी है. पार्टी को अपने विधायकों के बार-बार पाला बदलने से झटका लगा है. सितंबर 2022 में हुए ताजा मामले में उसके 11 में से 8 विधायक BJP में शामिल हो गए थे.
AAP के पास दो विधायक हैं. इनमें बेनोलिम से वेन्जी विगास और वेलिम से क्रूज सिल्वा शामिल हैं. वहीं, GFP के एकमात्र विधायक और पार्टी अध्यक्ष विजय सरदेसाई फतोरदा सीट से विधायक हैं. यूनाइटेड गोअन्स डेमोक्रेटिक पार्टी को फिर से सक्रिय करने की कोशिशों से भी कांग्रेस और विपक्ष के वोट बंट सकते हैं.
इसका असर खासकर सैलसेट इलाके में पड़ सकता है. इस इलाके में विधानसभा की कुल 40 सीटों में से 8 सीटें आती हैं. यहां रोमन कैथोलिक (करीब 36 फीसदी) और मुस्लिम (10 फीसदी) आबादी भी काफी है.