गोवा में कांग्रेस की 27 दिन की पदयात्रा से गरमाई राजनीति
गोवा में 27 दिन की इस पदयात्रा में कांग्रेस के कई बड़े नेता शामिल हो रहे हैं. लगातार तीन कार्यकाल से विपक्ष में बैठी पार्टी इस जनसंपर्क अभियान के जरिए सत्ता तक पहुंचने की कोशिश कर रही है

गोवा में कांग्रेस की पदयात्रा
कांग्रेस ने राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की तर्ज पर राज्यभर में पदयात्रा शुरू करके गोवा के चुनावी माहौल को गरमा दिया है.
गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (GPCC) ने 22 सितंबर को 27 दिन की ‘गोय राखोन यात्रा’ (गोवा संरक्षण यात्रा) शुरू की. पार्टी का कहना है कि यह यात्रा गोवा की ‘जमीन, पहचान, पर्यावरण और भविष्य’ को राजनीतिक या कारोबारी हितों से बचाने के लिए है. यात्रा 18 अक्टूबर को खत्म होगी.
विधानसभा में विपक्ष के नेता यूरी अलेमाओ इस यात्रा के संयोजक हैं. इसमें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी शामिल हो रहे हैं.
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, सचिन पायलट और कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी यात्रा में शामिल हो सकते हैं.
अलेमाओ ने कहा, "यह गोवा के लोगों का गोवा के लिए आंदोलन है. हम जमीन पर कब्जा, पहाड़ों की कटाई, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों की बिक्री (रिश्वतखोरी) के खिलाफ लड़ रहे हैं. गोवा को मुट्ठी भर निहित स्वार्थ वाले लोगों की संपत्ति नहीं बनने दिया जा सकता."
कांग्रेस ने सत्ता में आने के तुरंत बाद गोवा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट की विवादित धारा 39(ए) को खत्म करने का वादा किया है. यह धारा व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए जमीन के रूपांतरण की अनुमति देती है. अलेमाओ ने यह भी कहा है कि अनियंत्रित दोहन के बजाय टिकाऊ पर्यटन पर जोर देने वाली पर्यटन नीति बनाई जाएगी.
गोवा में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने हैं. लगातार तीन कार्यकाल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस अब सत्ता पक्ष की तरफ लौटने की उम्मीद कर रही है. हालांकि पार्टी को अपने विधायकों को साथ रखने में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. सितंबर 2022 में उसे सबसे बड़ा झटका लगा जब कांग्रेस के 11 में से आठ विधायक BJP में शामिल हो गए थे.
विधायकों को साथ रखने में पार्टी की यह नाकामी उसके लिए चुनौती मानी जा रही है. यह ऐसे समय में है जब BJP सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल बढ़ने और गोवा की सांस्कृतिक पहचान के कमजोर पड़ने जैसे मुद्दों पर असंतोष की चर्चा है.
कांग्रेस की यह यात्रा 2012 की शुरुआत में गोवा विधानसभा में तत्कालीन विपक्ष के नेता मनोहर पर्रिकर की ‘जन संपर्क यात्रा’ की याद दिलाती है. करीब दो हफ्ते चली इस यात्रा ने BJP कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को तत्कालीन दिगंबर कामत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ लामबंद किया था. कुछ महीने बाद हुए चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई थी.
AICC के गोवा प्रभारी और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री माणिकराव ठाकरे ने कहा कि यह पदयात्रा सभी 40 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी. ठाकरे ने कहा, "इस यात्रा में गोवा की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और इस सरकार के दौरान जमीन पर कब्जे के मुद्दों पर ध्यान दिया जा रहा है."
GPCC के कार्यकारी अध्यक्ष सुनील कवथनकर ने कहा कि राज्य की राजधानी पणजी से शुरू हुई यह यात्रा पहले उत्तरी गोवा से होकर गुजरेगी और 4 अक्टूबर को दक्षिणी गोवा में प्रवेश करेगी. उन्होंने कहा, "यह ऐतिहासिक यात्रा है. हाल के वर्षों में पहली बार गोवा में इस तरह का जनसंपर्क अभियान शुरू किया गया है."
हर दिन की यात्रा खत्म होने के बाद शाम को कांग्रेस की ओर से ‘मांड’ यानी पारंपरिक सभा आयोजित की जाती है. इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पार्टी नेताओं के भाषण होते हैं. गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को कांग्रेस मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के विधानसभा क्षेत्र सांकेलिम में कार्यक्रम आयोजित करेगी.
पदयात्रा अलेमाओ के विधानसभा क्षेत्र कुंकोलिम में खत्म होगी. इसके पीछे वजह यह है कि यहां ‘चीफटेन मेमोरियल’ है. यह स्मारक जुलाई 1583 के विद्रोह में पुर्तगालियों के हाथों मारे गए 16 स्थानीय सरदारों की याद में बनाया गया था.
कुंकोलिम के हिंदू सरदारों ने स्थानीय लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए कथित तौर पर मजबूर करने की कोशिशों के खिलाफ जेसुइट पादरियों और उनके स्थानीय सहयोगियों के विरुद्ध विद्रोह किया था. इसके जवाब में पुर्तगाली अधिकारियों ने सरदारों को बातचीत के लिए बुलाया और फिर उन्हें गिरफ्तार करके मौत की सजा दे दी.
कांग्रेस ने सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी समूहों, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और स्थानीय युवाओं के संगठन रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (RGP) के नेताओं को भी यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है.
RGP ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है. करापुर-सारवन के ग्रामीणों को भी यात्रा में शामिल होने के लिए कहा गया है. इन ग्रामीणों ने मुंबई के एक प्रभावशाली रियल एस्टेट डेवलपर की प्रस्तावित बड़े पैमाने की आवासीय परियोजना का विरोध किया है.
कोयला ढोने के लिए रेलवे लाइनों की डबल-ट्रैकिंग का विरोध कर रहे लोगों को भी इसमें शामिल होने के लिए कहा गया है. RGP नेताओं ने कांग्रेस के साथ बातचीत की है.
हालांकि BJP के खिलाफ विपक्षी दलों का बड़ा गठबंधन बनाने की कांग्रेस की कोशिश को झटका लगने की आशंका है. आम आदमी पार्टी (AAP) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) ने मिलकर तीसरा मोर्चा बना लिया है. उनके ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन से विपक्षी वोट बंटने की संभावना है. वहीं BJP राज्य में लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है.
AAP के दो विधायक हैं- बेनाउलिम से वेन्जी वीगास और वेलिम से क्रूज सिल्वा. GFP के इकलौते विधायक और पार्टी अध्यक्ष विजय सरदेसाई फातोर्दा से विधायक हैं. इस मोर्चे का दक्षिण गोवा के महत्वपूर्ण सालसेटे तालुका में कांग्रेस को नुकसान पहुंचने की आशंका है.
यहां 40 में से आठ विधानसभा क्षेत्र हैं. इस क्षेत्र में रोमन कैथोलिक आबादी करीब 36 फीसदी और मुस्लिम आबादी करीब 10 फीसदी है.
चर्चा है कि कांग्रेस के कुछ पदाधिकारी ‘गोवा कांग्रेस’ नाम की नई पार्टी में शामिल हो सकते हैं. नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इससे नाम एक जैसा होने की वजह से कांग्रेस के मतदाताओं में भ्रम पैदा हो सकता है.
पूर्व GPCC अध्यक्ष अमित पाटकर मौजूदा अध्यक्ष गिरीश चोडनकर की नियुक्ति से नाराज बताए जा रहे हैं. वे पार्टी की बैठकों से दूर रहे हैं जिससे उनके अगले कदम को लेकर सवाल उठ रहे हैं. वहीं सरदेसाई के हालिया बयानों से संकेत मिला है कि GFP कांग्रेस को शामिल करते हुए बड़े गठबंधन के लिए दरवाजे खुले रखे हुए है.