गांधीनगर में AAP हुई साफ, कांग्रेस को फायदा या BJP हुई और मजबूत?

गांधीनगर नगर निगम चुनाव में AAP का वोट शेयर 21.77 फीसदी से घटकर 4.38 फीसदी रह गया और पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी. दूसरी ओर, कांग्रेस की सीटें और वोट शेयर बढ़े, जबकि BJP ने 44 में से 38 सीटें जीतकर अपना कब्जा बरकरार रखा

AAP and GFP likely to forge new alliance ahead of polls
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)

दिल्ली में जोरदार विरोध प्रदर्शनों और अहमदाबाद तथा गांधीनगर समेत कुछ अन्य शहरों में छिटपुट विरोध प्रदर्शनों के बीच BJP ने गांधीनगर नगर निगम (GMC) पर अपना कब्जा बरकरार रखा. BJP ने 44 में से 38 सीटें जीतीं जो 2021 के मुकाबले तीन कम हैं. कांग्रेस ने पांच सीटें जीतीं जो 2021 के मुकाबले तीन अधिक हैं.

वार्ड 6 की सभी चार सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की. यह एकमात्र वार्ड था जहां BJP को सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. शेष एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) इस बार अपना खाता भी नहीं खोल सकी. उसने 2021 में एक सीट जीती थी और इस बार 32 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे.

इस चुनाव में 59.25 फीसदी मतदान हुआ. AAP का वोट शेयर 2021 के 21.77 फीसदी से घटकर 4.38 फीसदी रह गया. वहीं, कांग्रेस का वोट शेयर 28.02 फीसदी से बढ़कर करीब 37 फीसदी और BJP का 46.49 फीसदी से बढ़कर 56.64 फीसदी हो गया. वोट शेयर में यह बदलाव मामूली नहीं कहा जा सकता लेकिन यह बदलाव सिर्फ एक शहरी इलाके में देखने को मिला है. हालांकि इस इलाके का आधुनिक राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है.

गांधीनगर में लंबे समय से ऐसा होता रहा है कि कांग्रेस चुनाव जीतने के बावजूद सत्ता में नहीं आ पाती थी. 2011 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस ने 18 सीटें जीती थीं जबकि BJP को 15 सीटें मिली थीं. तब मेयर महेंद्रसिंह राणा अन्य पार्षदों के साथ BJP में शामिल हो गए और पार्टी ने नगर निगम की सत्ता अपने हाथ में ले ली.

गांधीनगर में जीत के बाद BJP के नेता (फाइल फोटो)

2016 में दोनों पार्टियों को 16-16 सीटें मिलीं. मेयर के चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्षद प्रवीण पटेल ने पाला बदल लिया और BJP सत्ता में आ गई. 2021 में ही BJP ने पहली बार चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया. इस साल का परिणाम पहला ऐसा चुनावी नतीजा है जिसमें स्पष्ट बहुमत को लेकर कोई संदेह नहीं था.

नगर निगम का क्षेत्र काफी हद तक गांधीनगर उत्तर और गांधीनगर दक्षिण विधानसभा सीटों के अंतर्गत आता है. 2008 में परिसीमन के बाद से दक्षिण सीट पर हर चुनाव में BJP को जीत मिली है जबकि उत्तर सीट 2017 में कांग्रेस के खाते में गई थी. इसके बाद 2022 में BJP की रीताबेन पटेल ने यह सीट फिर से जीत ली. 2019 से गांधीनगर नगर निगम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. इससे पहले इस लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व लालकृष्ण आडवाणी करते थे.

BJP ने बनासकांठा की थरा नगरपालिका पर भी अपना कब्जा बरकरार रखा. यहां उसने 24 में से 19 सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं. देवभूमि द्वारका की ओखा नगरपालिका में BJP ने लड़ी गई 32 सीटों में से 29 पर जीत हासिल की जबकि कांग्रेस को तीन सीटें मिलीं. चार सीटें पहले ही निर्विरोध जीतने के बाद BJP के पास कुल 36 में से 33 सीटें हैं.

राजधानी में BJP का दबदबा बरकरार है लेकिन वोटों का रुझान सुर्खियों में दिखाए गए जितना एकतरफा नहीं है. ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी (AAP) के कमजोर पड़ने के साथ विपक्ष का वोट कांग्रेस के पीछे एकजुट हो गया है. हालांकि 2021 में कांग्रेस और AAP को मिलाकर करीब 50 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा घटकर लगभग 41 प्रतिशत रह गया. BJP विरोधी वोट एक तरफ केंद्रित तो हुआ है लेकिन उसका कुल प्रतिशत भी घटा है.

गांधीनगर के चुनावों पर काफी दिलचस्पी के साथ नजर रखी जाती है क्योंकि यहां के ज्यादातर मतदाता सरकारी कर्मचारी हैं और सत्ता के केंद्र के बेहद करीब रहते हैं. 2.6 लाख मतदाताओं वाला अहमदाबाद का यह जुड़वां शहर एक वैश्विक खेल केंद्र के रूप में उभरने की आकांक्षा रखता है.

इस साल अप्रैल में सभी 15 नगर निगमों में जीत हासिल करने के बाद BJP दिसंबर 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में स्पष्ट रूप से सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उतरेगी. उसका शहरी जनाधार बरकरार है. कांग्रेस राजधानी में अपनी स्थिति में मामूली सुधार का दावा कर सकती है लेकिन तीसरी ताकत के रूप में उभरने की आम आदमी पार्टी (AAP) की कोशिश को बड़ा झटका लगा है. असली परीक्षा ग्रामीण सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात में होगी, जहां इन स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे कोई स्पष्ट संकेत नहीं देते.

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