महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा से योगी को 2027 में मिलेगा फायदा?

योगी आदित्यनाथ सरकार 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा का वादा जल्द पूरा करेगी. इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिला वोटरों को साधने की रणनीति माना जा रहा है

CM Yogi Adityanath Gen-Z plane
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बढ़ती सरगर्मी के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार महिलाओं को साधने के लिए एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की योजना शुरू कर सरकार ने 2022 के विधानसभा चुनाव में किए गए अपने एक अहम वादे को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 26 अगस्त को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में इस योजना की शुरुआत कर सकते हैं. चुनावी लिहाज से देखें तो यह महज एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि करीब डेढ़ साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति का हिस्सा भी मानी जा रही है.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब कोई भी पार्टी महिला वोटरों को नजरअंदाज नहीं कर सकती. पिछले कुछ चुनावों में महिलाओं की मतदान भागीदारी बढ़ी है और राजनीतिक दलों ने भी महिला केंद्रित योजनाओं को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुख जगह दी है.

ऐसे में 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ देना सीधे तौर पर एक ऐसे वर्ग को प्रभावित करेगा, जिसकी रोजमर्रा की आवाजाही में सार्वजनिक परिवहन की महत्वपूर्ण भूमिका है.

चुनावों में अब महिला वोट बैंक की ताकत को कोई भी पार्टी नजरअंदाज नहीं कर सकती (सांकेतिक तस्वीर)

2022 का वादा, 2027 से पहले होगा पूरा

BJP ने 2022 के विधानसभा चुनाव के अपने संकल्प पत्र में उत्तर प्रदेश में 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन में मुफ्त यात्रा का वादा किया था. सरकार अब इस वादे को जमीन पर उतारने जा रही है. इसके लिए हाल में विधानसभा से पारित पूरक बजट में प्रावधान भी किया गया है.

सरकार को उम्मीद है कि योजना का लाभ सीधे महिला यात्रियों तक पहुंचेगा और इसका राजनीतिक संदेश भी जाएगा कि चुनावी वादों को पूरा किया जा रहा है. योजना पर सरकार को करीब 330 करोड़ रुपये सालाना का अतिरिक्त बोझ आने का अनुमान है.

यह रकम यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम यानी UPSRTC को उस राजस्व की भरपाई के रूप में दी जाएगी, जो वरिष्ठ महिलाओं को मुफ्त टिकट देने के कारण उसे नहीं मिलेगा. UPSRTC के मुताबिक उसकी बसों में रोज करीब 20 लाख यात्री सफर करते हैं. इनमें लगभग 33 प्रतिशत महिलाएं हैं.

सर्वे में यह भी सामने आया है कि रोजाना करीब एक लाख ऐसी महिलाएं सरकारी बसों से यात्रा करती हैं, जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है. यानी योजना का दायरा भले ही उम्र की एक सीमा तक सीमित हो, लेकिन लाभार्थियों की संख्या काफी बड़ी है.

इसके जरिए सरकार बुजुर्ग महिलाओं को आर्थिक राहत देने के साथ उनके परिवारों तक भी राजनीतिक संदेश पहुंचाना चाहती है. ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में जहां महिलाएं सरकारी बसों पर अधिक निर्भर हैं, वहां इसका असर और ज्यादा हो सकता है.

रक्षाबंधन पर फ्री सफर का सियासी संदेश

सरकार का महिला केंद्रित संदेश केवल 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं है. रक्षाबंधन के मौके पर सभी उम्र की महिला यात्रियों के लिए मुफ्त बस यात्रा की व्यवस्था भी की गई है. 27 अगस्त सुबह छह बजे से 29 अगस्त की आधी रात तक महिलाएं यूपी रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगी.उनके साथ यात्रा करने वाला एक व्यक्ति भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेगा.

रक्षाबंधन के मौके पर 27 से 29 अगस्त तक सभी महिलाएं UPSRTC की बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगी (सांकेतिक तस्वीर)

यह व्यवस्था पिछले कई वर्षों से रक्षाबंधन के मौके पर लागू होती रही है लेकिन इस बार इसका राजनीतिक संदर्भ ज्यादा महत्वपूर्ण है. विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और महिला मतदाताओं को लेकर BJP, समाजवादी पार्टी और दूसरे दलों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने वाली है. ऐसे में मुफ्त यात्रा जैसी सीधे जेब पर असर डालने वाली योजनाएं राजनीतिक संदेश को मजबूत करती हैं.

लखनऊ में भी रक्षाबंधन की भीड़ को देखते हुए सिटी बस नेटवर्क को सक्रिय किया जा रहा है. सात रूटों पर 115 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी. इन बसों को दुबग्गा डिपो से अलग-अलग रूटों पर लगाया जाएगा.

लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज के मुताबिक महिलाएं अपने साथ एक व्यक्ति के साथ 66 घंटे तक मुफ्त यात्रा कर सकेंगी. सरकार के लिए यह एक ऐसा मौका भी है, जब योजना का प्रत्यक्ष अनुभव बड़ी संख्या में महिलाओं को होगा.

मुफ्त टिकट, अतिरिक्त बसें और त्योहार के दौरान विशेष इंतजाम सरकारी योजना को लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ने में मदद करेंगे.

महिला वोट का गणित

2027 के विधानसभा चुनाव में महिला वोटरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है. BJP पहले से ही महिला लाभार्थियों के बीच अपनी योजनाओं का आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है.

मुफ्त राशन, उज्ज्वला, प्रधानमंत्री आवास, शौचालय और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के बाद अब मुफ्त बस यात्रा का दायरा भी महिला मतदाताओं के एक खास वर्ग तक बढ़ाया जा रहा है. हालांकि इसका चुनावी फायदा अपने आप तय नहीं है.

मुफ्त यात्रा का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि योजना वास्तव में कितनी आसानी से लागू होती है. फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती 60 वर्ष की उम्र की पुष्टि को लेकर है. UPSRTC के पास यात्रियों की उम्र सत्यापित करने की कोई अलग और पुख्ता व्यवस्था नहीं है.

ऐसे में फिलहाल कंडक्टर और बुकिंग सेंटर पर आधार के जरिए उम्र की पहचान करने की व्यवस्था प्रस्तावित है. सरकार योजना के विस्तृत नियम तैयार कर रही है. जानकार बताते हैं कि उम्र की जांच में देरी, बसों में भीड़ या किसी तरह की अव्यवस्था हुई तो योजना का सकारात्मक संदेश कमजोर भी पड़ सकता है.

UPSRTC ने सरकार को सुझाव दिया था कि उम्र की सीमा हटाकर सभी महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाए. इससे उम्र सत्यापन की समस्या खत्म हो जाती और योजना का राजनीतिक दायरा भी काफी बड़ा हो जाता. लेकिन सरकार ने फिलहाल 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को ही इसका लाभ देने का फैसला किया है.

राजनीतिक तौर पर देखें तो यह योजना BJP की महिला केंद्रित रणनीति का एक और हिस्सा है. 2022 में BJP ने महिला वोटरों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी थी. 2027 में समाजवादी पार्टी भी महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता का वादा सामने रख रही है.

ऐसे में मुकाबला सिर्फ कानून-व्यवस्था, विकास और जातीय समीकरणों तक सीमित रहने वाला नहीं है, बल्कि महिलाओं की रोजमर्रा की जरूरतों और आर्थिक राहत के मुद्दे पर भी होगा.

राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी सुमन रावत कहती हैं, “मुफ्त बस यात्रा का लाभ लेने वाली बुजुर्ग महिलाएं भले ही संख्या में सीमित हों लेकिन उनका प्रभाव परिवार के निर्णयों तक पहुंच सकता है. इसलिए सरकार का लक्ष्य केवल एक लाख दैनिक यात्रियों तक लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि उनके जरिए परिवार के दूसरे मतदाताओं तक भी सकारात्मक संदेश पहुंचाना हो सकता है.” 

ऐसे में 2027 के चुनावी मैदान में मुफ्त बस यात्रा BJP के लिए कोई अकेला चुनावी हथियार नहीं होगी, लेकिन महिला मतदाताओं को साधने की उसकी रणनीति में यह एक अहम कड़ी जरूर बन सकती है. 

अब असली सवाल यही है कि मुफ्त सफर का यह सरकारी फैसला वोटरों के मन में भी योगी सरकार के लिए मुफ्त में जगह बना पाता है या नहीं.

Read more!