कूनो के बाद अब गांधी सागर अभयारण्य बनेगा चीतों का 'दूसरा घर'?

गांधी सागर में पहले से तीन चीते हैं. एक और मादा चीता लाने के पीछे प्रजनन बढ़ाने के साथ दक्षिण अफ्रीकी और बोत्सवाना के चीतों को साथ रखकर आनुवंशिक विविधता बढ़ाने की योजना है

प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 2022 में कूनो नेशनल पार्क से हुई थी (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में एक नई मादा चीता लाई गई है. भारत में चीतों के लिए तैयार किए जा रहे ‘दूसरे घर’ में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 20 सितंबर को इस चीता को एक विशेष रूप से तैयार बाड़े में छोड़ा. इसे ‘CCB 2’ नाम दिया गया है.

कूनो नेशनल पार्क से करीब 300 किलोमीटर दूर स्थित इस अभयारण्य में पहले से दो नर चीते- प्रभास और पावक और एक मादा चीता धीरा मौजूद हैं. कूनो नेशनल पार्क प्रोजेक्ट चीता का मुख्य केंद्र है.

CCB 2 को इस साल फरवरी में बोत्सवाना से पांच अन्य मादा और तीन नर चीतों के साथ कूनो लाया गया था.

प्रभास और पावक को अप्रैल 2025 में कूनो से गांधी सागर लाया गया था. सितंबर में धीरा भी उनके साथ आ गई. लेकिन पिछले एक साल में इस समूह में प्रजनन की कोई खबर नहीं मिली. इसके बाद वन्यजीव अधिकारियों ने गांधी सागर में चीतों की संख्या बढ़ाने के लिए एक और मादा चीता लाने का फैसला किया.

राज्य के वन अधिकारियों ने बताया कि आमतौर पर जब लक्ष्य प्रजनन को बढ़ावा देना होता है तो किसी समूह में मादा चीतों की संख्या नर चीतों से ज्यादा रखी जाती है. धीरा के अभी तक गर्भवती नहीं होने के कारण CCB 2 को गांधी सागर लाया गया.

CCB 2 को गांधी सागर लाने की एक और वजह है. पावक, प्रभास और धीरा दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते हैं. अगर बोत्सवाना से आई CCB 2 का दक्षिण अफ्रीकी चीतों के साथ प्रजनन होता है तो पैदा होने वाले शावक अलग जीन पूल (आनुवंशिक समूह) से होंगे. इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ेगी और शावक ज्यादा स्वस्थ होंगे.

गांधी सागर अभयारण्य मंदसौर और नीमच जिलों में करीब 370 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसकी सीमा राजस्थान से लगती है. चीतों को एक विशेष रूप से तैयार बाड़े में रखा गया है. इस बाड़े को इस तरह बनाया गया है कि चीतों के लिए शिकार भी उपलब्ध रहे और वे खुद सुरक्षित रहें.

चीतों के लिए तीसरा घर नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य में तैयार किया जा रहा है. यह रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व का हिस्सा है जो मध्य प्रदेश के सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला है.

प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत सितंबर 2022 में कूनो नेशनल पार्क से हुई थी. मध्य प्रदेश में फिलहाल 56 चीते हैं. इनमें भारत में जन्मे शावक भी शामिल हैं.

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