एकनाथ शिंदे के लिए फिर खुल सकता है मुख्यमंत्री पद का रास्ता?
शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के विलय के बाद लोकसभा में एकनाथ शिंदे की ताकत बढ़ी है. इसके साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी भूमिका और मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मान्यता दे दी गई है. इस फैसले से न केवल संसद में शिंदे की पार्टी की संख्या बढ़ी है बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता की राजनीति में भी उनकी स्थिति मजबूत हुई है.
अब शिंदे की पार्टी के लोकसभा में 13 सांसद हैं, जिनमें 2024 में शिवसेना के टिकट पर चुने गए सात सांसद भी शामिल हैं. इसके मुकाबले, महायुति की बड़ी सहयोगी BJP के महाराष्ट्र से लोकसभा में 9 सांसद हैं. शिवसेना के राज्यसभा में भी दो सांसद हैं. इन दल-बदल के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के पास लोकसभा में सिर्फ तीन और राज्यसभा में एक सांसद बचा है.
शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इन घटनाक्रमों से NDA में शिंदे का प्रभाव बढ़ा है. नेता ने कहा, "शिंदे की एनडीए में ताकत बढ़ी है. शिवसेना (UBT) में हुई टूट से संसद में NDA की संख्या बढ़ी है, जो परिसीमन विधेयक पारित कराने के दौरान केंद्र सरकार के लिए अहम साबित होगी."
माना जाता है कि शिंदे की BJP के केंद्रीय नेतृत्व, खासकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अच्छी करीबी है. कहा जा रहा है कि वे फिर से महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं. 2024 के विधानसभा चुनाव में महायुति ने 288 में से 237 सीटें जीतकर बड़ी जीत हासिल की थी. इसमें BJP को 132 और शिंदे की पार्टी को 57 सीटें मिली थीं. इसके बाद BJP के देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया गया.
हालांकि ऐसी अटकलें हैं कि फडणवीस को राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाने के लिए दिल्ली भेजा जा सकता है, जिससे महाराष्ट्र में नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत पड़ेगी. ऐसे में शिंदे अपनी बढ़ी हुई राजनीतिक ताकत के दम पर अवसर देख रहे हैं.
शिवसेना के नेता ने कहा कि उनकी पार्टी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में दो अतिरिक्त पद मिल सकते हैं, जिनमें एक कैबिनेट मंत्री का पद भी शामिल हो सकता है. दावेदारों में शिंदे के बेटे और कल्याण से लगातार तीसरी बार लोकसभा सांसद बने डॉ. श्रीकांत शिंदे, परभणी से सांसद संजय उर्फ बंडू जाधव और धाराशिव (उस्मानाबाद) से सांसद ओमराजे निंबालकर शामिल हैं, जो शिवसेना (UBT) छोड़कर शिंदे की शिवसेना में आए हैं. फिलहाल, शिवसेना के पास केंद्र में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में प्रतापराव जाधव के रूप में एक राज्य मंत्री है.
BJP के एक वरिष्ठ विधायक का कहना है कि शिंदे के मजबूत होने से नुकसान BJP का नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे की पार्टी का होगा. उनका दावा है कि शिंदे आगे भी शिवसेना (UBT) के कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों को अपनी पार्टी में शामिल करा सकते हैं. उन्होंने कहा, "शिवसेना (UBT) के सामने अब मुंबई के कुछ हिस्सों तक सीमित एक स्थानीय पार्टी बनकर रह जाने का खतरा है."
महाराष्ट्र की राजनीति में एक और हलचल की चर्चा है. शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), जिसके लोकसभा में 8 सांसद, राज्यसभा में एक सांसद और महाराष्ट्र विधानसभा में 10 विधायक हैं, उसके बारे में भी कहा जा रहा है कि वह NDA के साथ जाने पर गंभीरता से विचार कर रही है. अगर विलय नहीं भी होता है, तो पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि टूट से बचने के लिए वह मुद्दों के आधार पर NDA को समर्थन दे सकती है.