मौसम की मार से शुरू हुआ वो सिलसिला जिसने दिल्ली को पानी के लिए तरसा दिया!

कुछ ही दिन पहले दिल्ली से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें लोग पानी टैंकर से पानी लेने के लिए जान जोखिम में डालकर उस पर चढ़ते हुए नजर आ रहे थे

दिल्ली में पानी के लिए टैंकर पर चढ़ते लोग (फाइल फोटो)
दिल्ली में पानी के लिए टैंकर पर चढ़ते लोग (फाइल फोटो)

करीब एक हफ्ता पहले दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इस वीडियो में संजय कैंप एरिया के लोग पानी टैंकर से पानी लेने के लिए जान जोखिम में डालकर उस पर चढ़ते हुए नजर आ रहे थे. यह दृश्य अपने आप में यह बताने के लिए काफी था कि देश की राजधानी दिल्ली में पानी का संकट कितना गहराया हुआ है.

ठीक इसी दौरान पानी की कमी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उसने अदालत से मांग की कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों को निर्देश दिया जाए कि ये राज्य दिल्ली में पानी की सप्लाई बढ़ाएं. बहरहाल, यहां एक सवाल ये उठता है कि दिल्ली में आखिर पानी की किल्लत हुई क्यों?

इस सवाल का जवाब जानने से पहले इस मुद्दे से जुड़ी ताजातरीन जानकारियां आपसे में साझा कर लेते हैं. साथ ही, ये भी समझते हैं कि दिल्ली में पानी की सप्लाई का सिस्टम क्या है, इसे पानी कहां से मिलता है?

हफ्ता भर पहले दिल्ली की 'आप' सरकार जब सुप्रीम कोर्ट में पानी की समस्या की फरियाद लेकर पहुंची तो अदालत ने हिमाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह 7 जून को अपने सरप्लस पानी में से 137 क्यूसेक पानी दिल्ली के लिए छोड़ दे. साथ ही, उसने हरियाणा सरकार से भी राजधानी में पेयजल संकट को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा.

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और केवी विश्वनाथन की पीठ ने हिमाचल सरकार से कहा कि वह 7 जून को हरियाणा जल बोर्ड को पहले से सूचना देकर पानी छोड़े. साथ ही हरियाणा सरकार से दिल्ली को पानी की निर्बाध आपूर्ति के लिए व्यवस्था करने को भी कहा. अदालत ने कहा, "हरियाणा सरकार को हिमाचल से प्राप्त होने वाले पानी को बिना किसी बाधा के दिल्ली के वजीराबाद तक पहुंचने देना चाहिए ताकि दिल्ली के लोगों को पीने का पानी मिल सके."

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पानी की बर्बादी न हो और पानी पर कोई राजनीति न हो. अदालत के आदेश के बाद पत्रकारों से बातचीत में आप के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा, "दिल्ली के लिए पानी की मात्रा 1993 में तय की गई थी. 30 साल बाद भी हमें उतना ही पानी मिल रहा है, जबकि इस दौरान दिल्ली की आबादी कई गुना बढ़ गई है. मैंने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखदेव सुक्खू से दो बार मुलाकात की और हमने कहा कि हम राज्य से पानी खरीदना चाहते हैं और वे सहमत हो गए."

उन्होंने आगे कहा, "हरियाणा सरकार ने कहा कि हम आपको पानी के लिए रास्ता भी नहीं देंगे. क्या केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कोई पहल नहीं करनी चाहिए थी कि हरियाणा पानी के लिए रास्ता दे. आज सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा, यह पहले ही किया जाना चाहिए था. मैं सुप्रीम कोर्ट और हिमाचल प्रदेश सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं."  

दूसरी ओर, भाजपा ने जल संकट के लिए आप सरकार को जिम्मेदार ठहराया और दावा किया है कि हरियाणा दिल्ली को यमुना से 1,049 क्यूसेक पानी की आपूर्ति कर रहा है, जो कि तय मात्रा से भी अधिक है. हरियाणा के कृषि मंत्री कंवर पाल ने यमुनानगर में संवाददाताओं से कहा, "हम समझौते के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी को पानी दे रहे हैं."

साल 1994 में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के बीच यमुना के 'सतही प्रवाह' पर एक जल बंटवारा समझौता हुआ था. इसमें यह कहा गया था दिल्ली को मार्च से जून तक 0.076 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी की आपूर्ति की जाएगी. जबकि सालाना तौर पर यह आवंटन 0.724 बीसीएम होगा. यह  करीब 435 एमजीडी के बराबर है. इसका आवंटन ऊपरी यमुना नदी बोर्ड द्वारा रेगुलेट किया जाता है. 1994 में हुए इस समझौते को अगले साल यानी 2025 में संशोधित किया जाना है. आइए अब समझते हैं कि राजधानी को पानी कहां से मिलता है.

दिल्ली को अपना ज्यादातर पानी यमुना, रावी-व्यास और गंगा नदियों से मिलता है.  उत्तर प्रदेश में ऊपरी गंगा नहर के जरिए गंगा नदी से दिल्ली को 470 क्यूसेक (करीब 254 एमजीडी या दस लाख गैलन प्रतिदिन) पानी मिलता है. इसके अलावा हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करने वाले दो चैनल - कैरियर लाइन्ड चैनल (सीएलसी) और दिल्ली सब ब्रांच (डीएसबी) - दिल्ली को यमुना और रावी-ब्यास नदियों से पानी की आपूर्ति करते हैं.  

सीएलसी एक लाइन्ड चैनल है जिसका उद्देश्य रिसाव से होने वाले पानी के नुकसान को कम करना है. इसके जरिए दिल्ली को 719 क्यूसेक पानी मिलता है. जबकि डीएसबी के माध्यम से इसे 330 क्यूसेक (दोनों को मिलाकर कुल 565 एमजीडी) पानी मिलता है. दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) भी आपूर्ति की मांग को पूरा करने के लिए अपने तईं यमुना से सीधे पानी लेता है. डीजेबी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, दिल्ली को यमुना से सीधे पानी लेने के लिए कोई निश्चित मात्रा आवंटित नहीं की गई है.

देखा जाए तो सीएलसी, डीएसबी और सीधे यमुना से यानी कुल मिलाकर दिल्ली को 612 एमजीडी पानी की आपूर्ति होती है. इसके अलावा दिल्ली जल बोर्ड जल की आपूर्ति भूजल स्रोतों से भी करता है, जिसके जरिए दिल्ली के ट्यूबवेलों और बरसाती कुओं से करीब 135 एमजीडी पानी हासिल होता है. यानी दिल्ली के पास कुल मिलाकर करीब 750 एमजीडी पानी होती है. 2023-24 के आर्थिक सर्वेक्षणों के मुताबिक, गर्मियों के चरम मौसम के दौरान दिल्ली को करीब 1290 एमजीडी पानी की जरूरत होती है.

इसका मतलब हुआ कि दिल्ली जल बोर्ड अगर अपनी पूरी क्षमता के साथ भी काम करे तो वह इस जरूरत को पूरा करने में सक्षम नहीं है. यही वजह है कि हर साल इस तरह की समस्याएं सामने आती हैं. लेकिन इस बार एक और कारक ने इस समस्या के चौड़ी होने में भूमिका निभाई. दरअसल, उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) 12 से 14 मई तक, और फिर 18 मई से 1 जून तक अपनी क्षमता से कम पर काम कर रहा था.

दुर्भाग्य से यही वह समय था जब राजधानी में प्रचंड गर्मी अपना तमाशा दिखा रही थी. और इस वजह से पानी की मांग में भी काफी बढ़ोत्तरी हुई थी. वजीराबाद डब्ल्यूटीपी की क्षमता 131 एमजीडी है और यह बुराड़ी, मॉडल टाउन, सदर बाजार, चांदनी चौक, मटिया महल, बल्लीमारान, पंजाबी बाग, राजघाट और आईटीओ के आसपास के क्षेत्रों और ग्रेटर कैलाश, डिफेंस कॉलोनी और साउथ एक्सटेंशन के कुछ हिस्सों सहित उत्तर, मध्य और दक्षिण दिल्ली के कुछ हिस्सों को पानी की आपूर्ति करता है.

यह क्षमता के मामले में दिल्ली जल बोर्ड के सभी नौ डब्ल्यूटीपी में से तीसरा सबसे बड़ा है, और मुख्य रूप से सीएलसी और डीएसबी के पानी पर निर्भर करता है. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में दिल्ली और हरियाणा के अधिकारियों ने बताया कि यह आपूर्ति बनाए रखी जा रही है. लेकिन यमुना के किनारे स्थित यह प्लांट वजीराबाद जलाशय में नदी से सीधे कुछ पानी भी खींचता है. और यहीं पर दिल्ली जल बोर्ड की आपूर्ति की समस्या है. इन अधिकारियों के मुताबिक इस हवाले से और जानकारी बाद में साझा की जाएगी.

बहरहाल, मई में वजीराबाद डब्ल्यूटीपी का प्रोडक्शन घटकर 102.9 एमजीडी हो गया, जो 2 जून को ही अपनी सामान्य क्षमता पर लौटा. इस दौरान बाकी सभी डब्ल्यूटीपी अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहे थे. पर समस्या यह कि अपने सभी डब्ल्यूटीपी के अपेक्षित रूप से काम करने के बाद भी दिल्ली जल बोर्ड 1000 एमजीडी से थोड़ा अधिक ही पानी का उत्पादन कर सकता है. और मई में इसका उत्पादन घटकर 966 एमजीडी रह गया. तिस पर मुसीबत यह कि जिस दिन वजीराबाद वॉटर प्लांट अपनी क्षमता से कम काम कर रहा था, उसी समय सोनिया विहार डब्ल्यूटीपी भी पॉवर कट की समस्या से अपनी क्षमता से कम उत्पादन कर रहा था.

यहां अब सवाल उठ सकता है कि वजीराबाद डब्ल्यूटीपी आखिर अपनी क्षमता से कम काम क्यों कर रहा था. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में 1 से 24 मई तक सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई.

दिल्ली जल बोर्ड के एक अधिकारी के मुताबिक, कम बारिश का मतलब है कि यमुना में जल बोर्ड के लिए वजीराबाद जलाशय से पानी निकालना संभव नहीं है. जलाशय में पानी का स्तर सामान्य तौर पर 674.5 फीट (समुद्र तल से ऊपर) रहता है. लेकिन 31 मई को इसका स्तर 670.3 फीट ही था. पिछले कुछ दिनों में यह बढ़कर 671 फीट हो गया है.

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ऐसी स्थिति पैदा हुई है. पिछली गर्मियों में वजीराबाद जलाशय में पानी का स्तर इससे भी कम रहा है. उदाहरण के लिए, जून 2022 में यह 667.7 फीट के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया था.

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