डीके शिवकुमार के कैबिनेट विस्तार के गणित में महिलाएं क्यों नहीं हुईं फिट?
कर्नाटक में कांग्रेस के मिड-टर्म कैबिनेट विस्तार में सात नए चेहरों को मौका मिला और जातीय संतुलन साधने की कोशिश हुई. फिर भी महिला प्रतिनिधित्व पूरी तरह गायब रहा

दो महीने से चले आ रहे सस्पेंस को खत्म करते हुए 3 अगस्त को कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले 19 मंत्रियों के नामों को मंजूरी दे दी. इसके साथ ही सरकार के कार्यकाल के बीच में होने वाले मंत्रिमंडल फेरबदल की प्रक्रिया पूरी हो गई.
डी.के. शिवकुमार ने 3 जून को 13 मंत्रियों वाले शुरुआती मंत्रिमंडल के साथ मुख्यमंत्री पद संभाला था. इनमें लगभग सभी नेता सिद्धरामैया के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के अनुभवी मंत्री रहे थे.
कर्नाटक मंत्रिमंडल में अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं. 19 मंत्री पदों के लिए उम्मीदवार चुनते समय कांग्रेस ने नए चेहरों को प्राथमिकता दी. शिवकुमार मंत्रिमंडल में सात नेता पहली बार मंत्री बने हैं. इनमें रिजवान अरशद, अजय सिंह, के.एस. बसवंथप्पा, टी. रघुमूर्ति, के.एम. शिवलिंगे गौड़ा, एच.सी. बालकृष्ण और विजयानंद कशप्पनवर शामिल हैं.
नए चेहरों में विधायक लक्ष्मण सावदी, बसवराज रायारेड्डी, पुट्टरंगशेट्टी, रुद्रप्पा लामानी और पी.एम. नरेंद्रस्वामी भी शामिल हैं. हालांकि ये पहले की सरकारों में मंत्री रह चुके हैं.
3 अगस्त को जारी शुरुआती सूची में 20 नामों को मंजूरी दी गई थी. लेकिन बेंगलुरु में शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले आखिरी समय में कुछ बदलाव किए गए. अहम बात यह रही कि केवल 19 नए मंत्रियों ने ही पद की शपथ ली. इससे मंत्रिमंडल में एक पद अभी भी खाली है. यह पद पहले गायत्री शांतिगौड़ा के लिए तय माना जा रहा था जिन्होंने हाल ही में विधान परिषद के चुनाव से जुड़े एक मामले में अपील जीती थी.
पार्टी नेतृत्व की मंजूरी वाली सूची में गायत्री शांतिगौड़ा इकलौती महिला थीं. लेकिन कांग्रेस ने फिलहाल इस पद पर फैसला टाल दिया है. ऐसे में शिवकुमार के मौजूदा मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री नहीं है.
19 नए मंत्रियों में से सात सिद्धरामैया सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं. वहीं पिछली सरकार के कुल 12 मंत्री शिवकुमार की नई टीम में जगह नहीं बना सके.
यह मंत्रिमंडल फेरबदल 2023 में बनी कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद किया गया है. पिछले एक साल से सरकार के कार्यकाल के मध्य बिंदु के करीब पहुंचने और नेतृत्व परिवर्तन की संभावना के चलते कांग्रेस विधायकों में बेचैनी बढ़ रही थी.
कई महीनों की अटकलों के बाद मई में कांग्रेस ने 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार में बदलाव का फैसला किया.
इस प्रक्रिया में सिद्धरामैया, जो दो कार्यकाल मिलाकर कुल आठ साल तक मुख्यमंत्री रहने वाले कर्नाटक में सबसे लंबे समय तक पद पर रहने मुख्यमंत्री हैं, ने शिवकुमार के लिए पद छोड़ा. शिवकुमार लंबे समय से इस मौके का इंतजार कर रहे थे.
मंत्री पदों के लिए हुई तीखी खींचतान से कई वरिष्ठ विधायक नाराज हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली. इसे स्वीकार करते हुए शिवकुमार ने पार्टी नेताओं से धैर्य रखने की अपील की. उन्होंने याद दिलाया कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्हें भी कम से कम दो बार मंत्री बनने का मौका नहीं मिला था. नए मंत्रियों के साथ कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “इन मामलों में हम जरूरी कदम उठाएंगे. महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व देंगे.”
मंत्रिमंडल का पुनर्गठन करते समय कांग्रेस ने अहम जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है. पूरे मंत्रिमंडल में अनुसूचित जाति के सात और अनुसूचित जनजाति के तीन मंत्री हैं. प्रभावशाली वीरशैव-लिंगायत समुदाय के सात और वोक्कालिगा समुदाय के छह मंत्री हैं. खुद शिवकुमार भी वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं. इसके अलावा विभिन्न अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों के छह मंत्री हैं. तीन मंत्री मुस्लिम हैं. वहीं एक ईसाई सदस्य के साथ 33 सदस्यीय मंत्रिमंडल पूरा होता है.
इस बीच जी.एस. पाटिल को विधानसभा का अध्यक्ष नामित किया गया है. वहीं सलीम अहमद को विधान परिषद का सभापति बनाए जाने के लिए चुना गया है.