दिया मिर्जा के दिवाली वीडियो पर सवाल उठाने वालों को हाई कोर्ट ने क्या कहा?

दिवाली पर पर्यावरण संरक्षण की अपील करने वाली दिया मिर्जा BJP नेताओं के निशाने पर आ गईं. विवाद के बाद BMC ने उनका वीडियो भी हटा दिया था

दिया मिर्जा (वीडियो ग्रैब)

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नियंत्रण वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को झटका देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसे अभिनेत्री दिया मिर्जा का एक वीडियो फिर से अपलोड करने का निर्देश दिया है. इस वीडियो में उन्होंने लोगों से पर्यावरण के अनुकूल तरीके से दिवाली मनाने की अपील की थी.

दिया मिर्जा उन लोगों में शामिल थीं, जिन्हें BMC ने इस अभियान के लिए चुना था. नगर निगम ने जब उनकी अपील वाला वीडियो अपलोड किया तो मुंबई BJP अध्यक्ष और विधायक अमित साटम ने इसकी कड़ी आलोचना की. साटम ने X पर लिखा था, "@mybmc हमें @deespeak से #Diwali मनाने का तरीका सीखने की जरूरत नहीं है. हमारी परंपराएं हमारी संस्कृति में गहराई से रची-बसी हैं."

इसके बाद BMC ने जल्द ही वीडियो हटा लिया. हालांकि ऐसा माना गया कि साटम ने चुनिंदा तौर पर दिया मिर्जा को निशाना बनाया. उन्होंने माधुरी दीक्षित, अजिंक्य रहाणे, निशिगंधा वाड और हर्षदा खानविलकर जैसी हस्तियों की अपीलों को नजरअंदाज किया.

साटम ने कहा, "इस देश में कुछ लोग और कुछ हस्तियां ऐसी हैं जो भारत में अराजकता फैलाने वाली ताकतों के साथ हाथ मिलाती दिख रही हैं... और सत्ता परिवर्तन सुनिश्चित करने में जुटी हैं. हमें ऐसे लोगों से दीपावली मनाने का तरीका सीखने की जरूरत नहीं है. यह देश पिछले 5,000 साल से दीपावली मनाता आ रहा है और आगे भी मनाता रहेगा." साटम ने यह टिप्पणी उन लोगों पर निशाना साधते हुए की, जिन्हें उन्होंने "टुकड़े-टुकड़े गैंग" कहा.

उनके साथ सुर मिलाते हुए BJP नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नीतेश राणे ने सवाल उठाया कि पर्यावरण से जुड़े मुद्दे केवल दिवाली और होली जैसे हिंदू त्योहारों के दौरान ही क्यों उठाए जाते हैं, रमजान के दौरान क्यों नहीं.

साटम और राणे के रुख का समर्थन मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े ने भी किया. उन्होंने कहा, "हमने दिया मिर्जा को 100 फीसदी काली सूची में डाल दिया है. महायुति के कार्यकाल में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने और हिंदू त्योहारों, हिंदुओं तथा हिंदुत्व के खिलाफ बोलने वालों को BJP काली सूची में डालना सुनिश्चित करेगी." उन्होंने यह भी कहा कि वह मुंबई नगर आयुक्त अश्विनी भिड़े से पूछेंगी कि BMC के अभियान के लिए हस्तियों की सूची को मंजूरी देने से पहले उनकी सहमति क्यों नहीं ली गई.

मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 के मुताबिक, नगर आयुक्त के पास कार्यकारी शक्तियां होती हैं. वहीं, शहर के प्रथम नागरिक महापौर को सामान्य सभा की बैठकों की अध्यक्षता करने जैसी शक्तियां दी गई हैं. महापौर के पास सीमित वैधानिक और कार्यकारी अधिकार होते हैं.

कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने BJP नेताओं की टिप्पणियों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि यह उनकी परोक्ष रूप से नफरत भड़काने वाली राजनीति का हिस्सा है. वहीं, BMC में विपक्ष के नेता और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता किशोरी पेडनेकर ने BMC में साटम के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से जुड़े उपमहापौर संजय घाड़ी ने भी विपक्ष का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि नगर निगम को मिर्जा का वीडियो नहीं हटाना चाहिए था.

अब 3 नवंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट की खंडपीठ ने जागरूकता से जुड़े इस वीडियो पर हो रही राजनीति की आलोचना की और BMC को इसे दोबारा अपलोड करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि वीडियो में समाज के लिए अच्छा संदेश दिया गया है. पर्यावरण संरक्षण के उपायों को "सांप्रदायिक रंग" नहीं दिया जाना चाहिए.

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