दिल्ली चुनाव : BJP से मिल रही कड़ी टक्कर, क्या लाभार्थियों के बूते किला बचा पाएगी AAP?
दिल्ली में जीत की हैट्रिक बनाने के लिए चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी (AAP) का सामना अब तक की सबसे बड़ी चुनौती से भी हो रहा है

आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल और पीएम नरेंद्र मोदी
पिछले दस सालों से दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी यानी 'आप' जीत की हैट्रिक बनाने की दावेदार है. पार्टी नेताओं से बातचीत करने पर पता चलता है कि भले ही वे अब तक की सबसे मुश्किल चुनौती का सामना भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से कर रहे हों, लेकिन पार्टी एक बार फिर से दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त है.
'आप' के अलग-अलग नेताओं से बातचीत करने पर पता चलता है कि पार्टी मोटे तौर पर तीन स्तरीय रणनीति पर काम कर रही है. इनमें पहली रणनीति अपनी मुफ्त सेवाओं वाली योजनाओं के लाभार्थियों के बीच पार्टी को मजबूत बनाए रखने की है. वहीं दूसरी रणनीति हर तरफ से यह साबित करने की है कि ईमानदार अरविंद केजरीवाल को केंद्र की मोदी सरकार अपनी एजेंसियों के माध्यम से लगातार परेशान कर रही है और प्रदेश की सरकार को ठीक से काम नहीं करने दे रही. पार्टी की तीसरी रणनीति बीजेपी के सोशल इंजीनियरिंग की कोशिशों को काउंटर करने की है.
दिल्ली में चुनाव प्रचार अभियान के जरिए 'आप' मुफ्त सेवाओं वाली अपनी छह योजनाओं को प्रमुखता से गिना रही है. इनमें मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी, बुजुर्गों के लिए तीर्थ यात्रा, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, मुफ्त विश्व स्तरीय शिक्षा और मुफ्त दवा और इलाज शामिल है. चुनावों के ठीक पहले आप सरकार ने दो और योजनाओं का वादा किया है. मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना के तहत दिल्ली प्रदेश की हर महिला को हर महीने 2,100 रुपये के आर्थिक सहयोग का वादा किया गया है. वहीं संजीवनी योजना के तहत दिल्ली के वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा का वादा आप ने किया है.
मुफ्त सेवाओं वाली योजनाएं कैसे आप के पक्ष में काम करती हैं, इसे मुफ्त बिजली वाली योजना के उदाहरण से समझा जा सकता है. दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त कर दी. साथ ही यह भी प्रावधान किया कि अगर 400 यूनिट तक बिजली कोई परिवार उपभोग करता है तो उसे 50 फीसद सब्सिडी मिलेगी. इससे अधिक बिजली के उपभोग पर पूरे पैसे लगते हैं.
चालू वित्त वर्ष यानी 2024-25 के लिए आप सरकार ने 3,250 करोड़ रुपये की बिजली सब्सिडी का प्रावधान रखा है. दिल्ली सरकार के बजट दस्तावेजों के मुताबिक 2014-15 से लेकर चालू वित्त वर्ष तक तकरीबन 24,944 करोड़ रुपये आप सरकार ने बिजली सब्सिडी पर खर्च किए हैं. दिल्ली में 22 लाख परिवार ऐसे हैं, जिनका बिजली बिल शून्य आया है.
वहीं दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना का लाभ लेने वाले परिवारों की कुल संख्या 40 लाख के पार है. दिल्ली के कुल मतदाताओं की संख्या तकरीबन 1.55 करोड़ है. इस संख्या को अगर 40 लाख परिवारों में बांटें तो पता चलता है कि आप अपनी बिजली सब्सिडी योजना का सीधा लाभ कितने अधिक मतदाताओं तक पहुंचाने में कामयाब हुई है. पार्टी को उम्मीद है कि न सिर्फ इस योजना बल्कि अन्य ऐसी योजनाओं के लाभार्थी उसके साथ जुड़े रहेंगे और चुनाव में इसका लाभ होगा.
मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले मनोज कुमार दिल्ली में ऑटो चलाते हैं. पहले वे किराये की ऑटो चलाते थे. लेकिन आप सरकार की इलेक्ट्रिक ऑटो योजना के तहत उन्हें अपनी पत्नी सुशीला देवी के नाम पर इलेक्ट्रिक ऑटो मिला. मनोज कहते हैं, "इस बार बीजेपी के पक्ष में माहौल तो दिख रहा है. जो सुविधाएं आप दे रही है, उससे अधिक देने का वादा बीजेपी भी कर रही है. लेकिन जहां तक मेरी बात है, मैं तो केजरीवाल को ही वोट दूंगा. ये ऑटो केजरीवाल ने ही दिया, मैं नमक हरामी नहीं करूंगा."
भले ही बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर पर भी यह कहा गया हो कि कल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी लेकिन आप की तरफ से जमीनी स्तर पर यह प्रचार लगातार किया जा रहा है कि अगर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी तो इन योजनाओं को बंद कर दिया जाएगा.
आप नेताओं की कोई भी सभा या प्रचार तब तक अधूरा रहता है, जब तक उसमें सिलसिलेवार ढंग से यह नहीं बताया जाए कि कैसे चुनी हुई दिल्ली सरकार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों और उपराज्यपाल के माध्यम से परेशान करती है. आप की तरफ से लगातार यह बताया जाता है कि जो भी अच्छे काम वे कर पाए हैं, वे सब बीजेपी की केंद्र सरकार के अड़ंगों से पार पाते हुए किए हैं और अगर ये दिक्कतें न होतीं तो और अच्छा काम करते.
पिछले चुनाव में केजरीवाल ने वादा किया था कि अगर यमुना को साफ नहीं किया तो वोट मांगने नहीं आऊंगा. इस बार केजरीवाल और उनकी पार्टी के लोग ये कह रहे हैं कि केंद्र सरकार के असहयोग की वजह से यह कार्य पूरा नहीं हो पाया. केजरीवाल अपनी सभा में भावुकता का पुट देते हुए खुद को और मनीष सिसोदिया को परेशान करने का मुद्दा भी बार-बार उठाते हैं. वे कहते हैं कि जिस सिसोदिया ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों का कायापलट कर दिया, उसे बीजेपी ने जेल भेज दिया क्योंकि बीजेपी नहीं चाहती कि आपके बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ें!
आप की एक प्रमुख रणनीति बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को काउंटर करने की है. शुरुआती दिनों से आप का चुनावी प्रबंधन देख रहे लोगों का कहना है कि पार्टी ने दूसरी पार्टियों के वोटर तो अपने पक्ष में लाए ही थे लेकिन साथ ही साथ नए वोटर भी दिल्ली में बनाए थे. आप ने अपनी शुरुआत के बाद से लगातार पूर्वांचल के लोगों को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वे दिल्ली में अपना वोटर कार्ड बनवाएं. साथ ही आप ने अपने वैसे समर्थकों को, जो दिल्ली के बाहर वोटर के तौर पर रजिस्टर्ड थे, उन्हें भी अपना वोट दिल्ली लाने के लिए प्रेरित किया.
आप के एक नेता कहते हैं, "जो नए वोटर दिल्ली में आए और हमारे साथ जुड़े, उनमें बीजेपी इस बार सेंध लगाने की कोशिश कर रही है. पूर्वांचल के सबसे अधिक लोगों को टिकट आप देती है. पूर्वांचल के लोग हमारी सरकार में प्रमुख पदों पर रहते हैं. इसके बावजूद बीजेपी ने यह भ्रम फैलाने की कोशिश की कि पार्टी पूर्वांचल विरोधी है." पूर्वांचली वोट बैंक में 'आप' कितना डैमेज कंट्रोल कर पाई, यह तो चुनाव परिणाम से ही पता चलेगा.
इसी तरह से जाट समाज के बीच अपनी स्थिति कमजोर होते देख केजरीवाल ने जाटों के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाया. हालांकि, बीजेपी ने यह कहते हुए कि 'आप' से बीजेपी में आए कैलाश गहलोत की तरफ से प्रस्ताव भेजने के बावजूद 'आप' ने जाट आरक्षण के विषय पर चुप्पी साधे रखी. बीजेपी ने पिछड़ा वर्ग आयोग के प्रमुख हंसराज अहीर की तरफ से भी यह बयान जारी कराया कि दिल्ली सरकार ने जाट आरक्षण को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं भेजा.
अहीर यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने कहा कि दिल्ली के जाटों को आरक्षण देने का सिर्फ एक प्रस्ताव उन्हें मिला है और वह भी बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा की तरफ से आया था. इसी तरह से बीजेपी पुजारी प्रकोष्ठ के कार्यों के प्रभाव को देखते हुए आप ने 'पुजारी ग्रंथी सम्मान' योजना की घोषणा की. इसके तहत मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारों के ग्रंथियों को प्रति महीने 18,000 रुपये की मदद देने का वादा आप ने किया है.
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