चोरबागान भगदड़ के लिए कौन जिम्मेदार?

कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान 19 लोगों की मौत के बाद आयोजन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. सात लोगों की गिरफ्तारी के बीच सवाल है कि क्या जांच में उन लोगों की जवाबदेही भी तय होगी, जो आयोजन के शीर्ष पदों पर थे

चोरबागान में भगदड़ के बाद का मंजर

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के कुछ ही दिन बाद चोरबागान दुर्गा पूजा स्थल के पास एक दीवार पर पेंटिंग बनाई गई. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने आरती करते हुए दिखाया गया था. यह पेंटिंग राज्य में BJP की जीत का जश्न मनाने वाले सबसे चर्चित प्रतीकों में से एक बन गई.

जुलाई की शुरुआत में BJP नेताओं लॉकेट चटर्जी और कौस्तव बागची ने पूजा समिति की ओर से आयोजित भव्य खूंटी पूजा में हिस्सा लिया. यह समारोह दुर्गा पूजा के पंडाल का निर्माण शुरू होने का प्रतीक होता है. इस दौरान घोषणा की गई कि इस साल की पूजा के लिए बिमान साहा कलाकार होंगे और इसकी थीम ‘अकाल बोधन’ होगी.

लेकिन जल्द ही घटनाक्रम ने अलग मोड़ ले लिया. 17 जुलाई को जयंत बनर्जी और उनकी बेटी ने पूजा समिति के बाकी सदस्यों के साथ इस्तीफा दे दिया. वे वर्षों से पूजा के प्रबंधन से जुड़े थे. 

इस्तीफे के बाद BJP नेताओं के दबदबे वाली नई समिति के गठन का रास्ता खुल गया. आरोप लगाया गया कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था. 30 जुलाई को खूंटी पूजा के दूसरे समारोह में नई थीम का अनावरण किया गया. साथ ही साहा की जगह सुशांत शिवानी पॉल को कलाकार नियुक्त किया गया.

इन बदलावों से उत्तर कोलकाता की प्रमुख दुर्गा पूजाओं में शामिल चोरबागान पूजा के प्रबंधन और सार्वजनिक छवि में बड़ा बदलाव आया. हालांकि राजनीतिक तामझाम के बीच शुरू हुए उत्सव पर जल्द ही एक दुखद हादसे का साया छा गया.

17 अक्टूबर की शाम दुर्गा पूजा उत्सव के दूसरे दिन चोरबागान में भगदड़ मच गई. इसमें 19 लोगों की जान चली गई. कोलकाता के सबसे प्रमुख सामुदायिक आयोजनों में शामिल यह पूजा भीड़ से जुड़ी एक भीषण त्रासदी का स्थल बन गई.

हादसे के बाद घायलों और मृतकों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया

पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें पूजा के सचिव राज कुमार सेवड़ा, उपाध्यक्ष शांतनु दुबे, बांस के ढांचे के निर्माण से जुड़े बिप्लब मुखर्जी, भीड़ प्रबंधन और वीआईपी पास की जांच के जिम्मेदार कौशिक सरकार, भीड़ नियंत्रण में लगे पिंटू डे और निजी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले सुमन चक्रवर्ती तथा राजेश पाल शामिल हैं.

हालांकि इन गिरफ्तारियों के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. क्या जवाबदेही सिर्फ आयोजन के रोजमर्रा के कामकाज से सीधे जुड़े लोगों तक सीमित रहेगी? पूजा के मुख्य संरक्षक देबदीप अधिकारी, जो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भतीजे बताए जाते हैं, अध्यक्ष विजय ओझा, जो BJP विधायक हैं, और पार्टी के उत्तर कोलकाता जिला अध्यक्ष तमोघ्न घोष की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. आलोचकों ने पूछा है कि पूजा के संगठनात्मक ढांचे में वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए या नहीं.

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के धड़े ने X पर एक पोस्ट के जरिए यही सवाल उठाया. इसमें पूछा गया कि क्या कोलकाता पुलिस इन वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेगी या मुख्यमंत्री उन्हें बचा रहे हैं. पोस्ट में कहा गया, “क्या @KolkataPolice पहले तीन नामों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी या खुद अवैध मुख्यमंत्री उन्हें संरक्षण दे रहे हैं?” 

पोस्ट में देबदीप को मुख्य संरक्षक, ओझा को अध्यक्ष और घोष को मुख्य सलाहकार बताया गया. यह सवाल भी उठाया गया कि क्या ये लोग हादसे के लिए उतने ही जिम्मेदार नहीं हैं. पोस्ट में ध्यान दिलाया गया कि मुख्यमंत्री ने खुद चोरबागान पूजा पंडाल का उद्घाटन किया था. इसमें यह भी पूछा गया कि उनके दौरे के दौरान सुरक्षा इंतजामों की पर्याप्त जांच हुई थी या नहीं और क्या जान गंवाने वाले लोगों की मौत के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा.

इन आरोपों ने हादसे को लेकर राजनीतिक बहस और तेज कर दी है. हालांकि सबसे अहम सवाल जिम्मेदारी का ही है. भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के इंतजाम कैसे किए गए थे? क्या लोगों की जान जाने से बचाया जा सकता था?

मुख्यमंत्री अधिकारी ने हादसे पर दुख जताया है. उन्होंने मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और नौकरी दिलाने में मदद देने की घोषणा की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान किया है. उत्सव में शामिल होने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने पहले से तय कार्यक्रम रद्द कर घायलों से मुलाकात की.

घायलों और मृतकों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (सीएमसी) ले जाया गया. हालांकि डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें निर्देश दिया था कि वे घायल मरीजों के परिजनों को उनकी पसंद के निजी अस्पताल में मरीजों को स्थानांतरित करने का विकल्प दें. 

पश्चिम बंगाल दौरे पर गए गृहमंत्री अमित शाह घायलों से मुलाकात करते हुए

डॉक्टरों ने कथित तौर पर सवाल उठाया कि सीएमसी जैसे उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थान पर घायलों के इलाज के लिए भरोसा क्यों नहीं किया जा रहा है. इसके बाद ज्यादातर घायलों को निजी अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया. शुभेंदु अधिकारी ने घायलों के लिए भी आर्थिक सहायता की घोषणा की है.

इस बीच प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि पूजा स्थल के पास तैनात पुलिसकर्मी भगदड़ में फंसे लोगों की मदद के लिए आगे नहीं आए. उनके मुताबिक, घायलों और मृतकों को निजी टैक्सियों से अस्पताल पहुंचाया गया.

इन आरोपों के बाद कोलकाता पुलिस और दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ प्रबंधन के उसके चर्चित इंतजामों पर सवाल उठने लगे हैं. शहर की पुलिस को लंबे समय से त्योहार के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को संभालने का श्रेय दिया जाता रहा है. ऐसे में 17 अक्टूबर की घटना ने चिंता और बढ़ा दी है. 

इस हादसे ने बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा को लेकर पहले उठे सवालों की याद भी ताजा कर दी है. 2015 में दक्षिण बंगाल में एक दुर्गा पूजा में भारी भीड़ उमड़ी थी. आयोजकों ने प्रचार किया था कि वहां दुर्गा की सबसे बड़ी प्रतिमा स्थापित की गई है. संभावित भगदड़ रोकने के लिए पुलिस को आखिरकार आयोजन स्थल बंद करना पड़ा था.

चोरबागान मामले में खबर है कि प्रशासन ने दावा किया है कि एक सहायक पुलिस आयुक्त ने भगदड़ की वजह आयोजकों की उस घोषणा को बताया, जिसमें कहा गया था कि पंडाल गिरने वाला है. अगर यह बात सही है, तो इससे कई और सवाल उठते हैं. यह घोषणा किस तरह की गई? भीड़ ने इस पर कैसी प्रतिक्रिया दी? और क्या दहशत को जानलेवा भगदड़ में बदलने से रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम थे?

जाधवपुर के 8बी बस स्टैंड के पास भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPM की ओर से लगाए गए एक पुस्तक स्टॉल को कथित तौर पर तोड़ने में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. इस घटना की वामपंथी कार्यकर्ताओं ने आलोचना की है. उन्होंने चोरबागान हादसे के बाद पुलिस की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं. 

CPM की छात्र इकाई स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के राष्ट्रीय सचिव सृजन भट्टाचार्य ने कहा, “चोरबागान की दुखद घटना के बाद भी यह हैरान करने वाला है कि पुलिस के पास वामपंथी पुस्तक स्टॉल तोड़ने के लिए अब भी वक्त और ऊर्जा है. इससे पता चलता है कि राज्य में किस तरह की अमानवीय सरकार शासन कर रही है. आज जाधवपुर में एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स (APDR) के स्टॉल को तोड़ दिया गया. हमने रात भर लगातार निगरानी रखकर और उन्हें हटाने की कोशिशों का विरोध करके CPM और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के पुस्तक स्टॉलों को बचाया. पुलिस ने बिना किसी स्पष्ट कारण के लाठीचार्ज किया, जिसमें कई युवक और युवतियां घायल हो गए. पुलिस तड़के सुबह फिर लौटी. इसके बाद हम धीरे-धीरे घर चले गए.”

भट्टाचार्य की टिप्पणी ने राज्य में पुलिस की भूमिका को लेकर चल रही बहस में एक और पहलू जोड़ दिया है. वामपंथी दलों का आरोप है कि उनकी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में पुलिस तेजी दिखा रही है जबकि चोरबागान भगदड़ से निपटने के तरीके पर अब भी सवाल बने हुए हैं. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच मुख्यमंत्री ने लोगों से इस त्रासदी का राजनीतिकरण न करने की अपील की है.

17 अक्टूबर की देर रात जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने धार्मिक आयोजनों के दौरान पहले हुई मौतों का जिक्र किया लेकिन उनकी तुलना करने से बचने की सलाह भी दी. मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं सभी को याद दिलाना चाहता हूं कि 2025 में पूजा के दौरान करंट लगने से 13 लोगों की मौत हुई थी जबकि 2022 में उत्तर बंगाल में विसर्जन के दौरान अचानक आई बाढ़ में आठ लोगों की जान चली गई थी. उस समय प्रशासन ने क्या भूमिका निभाई थी, यह सभी को याद है. आज हम सभी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं.”

सरकार इस मामले की जांच के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में विशेष जांच दल गठित करना चाहती है. हादसे के बाद कई पूजा स्थलों पर लोगों के प्रवेश पर पाबंदियां लगा दी गईं जबकि अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग ने कुछ अन्य आयोजकों को नोटिस जारी किए. मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पंडाल में भीड़ संभालने के लिए तैनात होमगार्ड की भूमिका की व्यक्तिगत रूप से जांच करेंगे.

चोरबागान में हुई मौतों से ऐसे सवाल खड़े हुए हैं, जिनका जवाब केवल दुख जताने, मुआवजे की घोषणा करने या राजनीतिक अपील करने से नहीं मिल सकता. पंडाल में जुटे हजारों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजाम पर्याप्त थे? पंडाल की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर कथित चेतावनी को क्या दूसरे तरीके से संभाला जा सकता था? और क्या जांच में गिरफ्तार लोगों के साथ-साथ वरिष्ठ आयोजकों और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी?

कोलकाता में दुर्गा पूजा का मतलब भव्य पंडाल, भारी जनभागीदारी और भीड़ प्रबंधन के विस्तृत इंतजामों से जुड़ा है. ऐसे शहर के लिए चोरबागान की त्रासदी एक गंभीर चेतावनी है कि भव्यता और उत्सव की कीमत कभी भी लोगों की सुरक्षा नहीं होनी चाहिए.

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