गुजरात में BJP की तिरंगा यात्रा अब सिर्फ 'राष्ट्रवाद' जगाने की कवायद नहीं

BJP की तिरंगा यात्रा और मोदी सरकार के 'हर घर तिरंगा' अभियान के मेल के बीच गुजरात में पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने कैडर को भी सक्रिय करती दिख रही है

गुजरात में BJP की तिरंगा यात्रा

10 अगस्त को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में 2.5 किलोमीटर लंबी एक यात्रा को हरी झंडी दिखाई. यह यात्रा शहर के अक्षरधाम मंदिर तक गई. रास्ते में पुलिस बैंड, नासिक ढोल बजाने वाले और पुलिस विभाग की 'डेयरडेविल्स' मोटरसाइकिल टीम का प्रदर्शन था.

पटेल के साथ BJP के गुजरात अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा, शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न वाजा और मुख्य सचिव मनोज कुमार दास भी मौजूद थे. मुख्यमंत्री के साथ राज्य के सबसे वरिष्ठ नौकरशाह और सत्तारूढ़ पार्टी के संगठन प्रमुख का इस तरह एक अर्ध-राजनीतिक गतिविधि के मंच पर साथ खड़ा होना शायद तिरंगा यात्रा को समझने का सबसे संक्षिप्त तरीका है.

तिरंगा यात्रा BJP की पहल है, जिसे 9 अगस्त को देशभर में शुरू किया गया और अब यह पार्टी के मंडल और बूथ स्तर के नेटवर्क तक पहुंच रही है. पार्टी इसे केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के 'हर घर तिरंगा' अभियान के साथ चला रही है. 

यह देशव्यापी अभियान लोगों को स्वतंत्रता दिवस पर अपने घरों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रोत्साहित करता है. दोनों कार्यक्रमों का नाम और दिखने का अंदाज एक जैसा है और गुजरात में तो अक्सर दोनों के लिए एक ही मंच नजर आता है.

गुजरात में 'हर घर तिरंगा' का पांचवां संस्करण चल रहा है. यह अभियान 9 से 17 अगस्त तक चलेगा और ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित है. उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने पूरे राज्य में 1,200 से ज्यादा यात्राएं निकालने और 70 लाख से ज्यादा घरों पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य रखा है.

स्वतंत्रता दिवस से पहले तिरंगा यात्रा गांधीनगर, अहमदाबाद, राजकोट और वडोदरा से होकर गुजरेगी. 2024 में जहां करीब एक लाख लोगों की बड़ी भीड़ जुटी थी, वह सूरत इस साल की सूची में क्यों नहीं है, यह साफ नहीं है.

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अब 'हर घर तिरंगा' के साथ 'हर दिल तिरंगा' का नया नारा दिया है

तिरंगा यात्रा में शामिल संस्थाओं का दायरा पार्टी से काफी आगे तक जाता है. उदाहरण के लिए, कच्छ के गांधीधाम में दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी ने 9 अगस्त को अपने कार्यक्रम की शुरुआत एक यात्रा से की, जिसका नेतृत्व उसके अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह ने किया. 

इसमें केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों, स्कूली बच्चों और दीनदयाल महिला शक्ति केंद्र के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया. यह पोर्ट अथॉरिटी की कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) पहल है.

तिरंगा यात्रा का यह तरीका BJP में काफी पुराना है. दिसंबर 1991 में तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने कन्याकुमारी से एकता यात्रा शुरू की थी. यह यात्रा 14 राज्यों से होकर गुजरी और 1992 में गणतंत्र दिवस के दिन श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के साथ खत्म हुई थी. नरेंद्र मोदी भी इसके आयोजकों में शामिल थे.

तिरंगा यात्रा अभियान की शुरुआत 2016 में BJP अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में हुई थी. उस समय नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम को लेकर देशद्रोह का विवाद चल रहा था. 

अमित शाह ने मंगलौर यूनिवर्सिटी से इसकी शुरुआत की थी और 'राष्ट्रवाद' पर सवाल उठाने वालों को निशाने पर लिया था. 2022 से यह पहल सरकार के कार्यक्रम का हिस्सा बनती दिखी, जब आजादी का अमृत महोत्सव के तहत 'हर घर तिरंगा' अभियान शुरू हुआ. गुजरात में BJP और राज्य सरकार का तंत्र इसे आयोजित करने के लिए एक-दूसरे के संसाधनों का इस्तेमाल करने लगा.

2024 में BJP अध्यक्ष के तौर पर जे.पी. नड्डा ने राजकोट से राष्ट्रीय स्तर की यात्रा शुरू की थी. गुजरात में इसे 'राष्ट्र चेतना यात्रा' नाम दिया गया था. इसका अहमदाबाद में समापन नगर निगम की ओर से आयोजित किया गया था.

इसकी पूरी पटकथा BJP के राष्ट्रवाद वाले नैरेटिव के अनुरूप है- 'नेशन फर्स्ट', 'विकसित भारत 2047', देश को एकजुट करने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल और कांग्रेस पर 'फर्जी राष्ट्रवाद' का आरोप. भूपेंद्र पटेल ने हाल में इसमें एक नया नारा जोड़ दिया है- 'हर घर तिरंगा' अब 'हर दिल तिरंगा' होना चाहिए.

गुजरात में विधानसभा चुनाव 2027 के आखिर में होने हैं. गांधीनगर, अहमदाबाद, राजकोट और वडोदरा के साथ सूरत में विधानसभा की करीब 182 में से 66 सीटें आती हैं. 

राष्ट्रवाद के जश्न के अलावा तिरंगा यात्रा उन कई आयोजनों में से एक है, जिन्हें BJP के कैडर को सक्रिय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. कुल मिलाकर पार्टी चुनावी जंग की तैयारी में जुटी है.

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