संगठन-सरकार में जगह न पाने वाले नेताओं को साधने में जुटी BJP

संगठनात्मक बदलाव और मंत्रिमंडल विस्तार से बाहर रह गए नेताओं को साधने के लिए BJP अगले कुछ महीनों में राष्ट्रीय संगठन, राज्यसभा, विधान परिषद और राजनीतिक नियुक्तियों का पूरा रोडमैप लागू करने की तैयारी में है

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ यूपी BJP अध्यक्ष पंकज चौधरी (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) में हाल में हुए संगठनात्मक बदलाव और योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल के लंबे इंतजार के बाद हुए सीमित विस्तार ने पार्टी के भीतर एक नई राजनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है. प्रदेश अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्षों और मोर्चा अध्यक्षों की नई टीम घोषित हो चुकी है. मंत्रिमंडल विस्तार भी हो गया लेकिन दोनों प्रक्रियाओं के बाद भी बड़ी संख्या में ऐसे नेता हैं जिन्हें संगठन या सरकार में अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका. 

राजनीतिक हलकों में अब चर्चा इस बात की है कि BJP इन नेताओं को निराशा में या नाराज छोड़ने के बजाय अपने लंबे समय से आजमाए हुए ‘एडजस्ट’ करने के फॉर्मूले के जरिए अगले अगले कुछ महीनों में चरणबद्ध तरीके से नई जिम्मेदारियां देकर संतुलन बनाने की तैयारी कर रही है.

BJP की रणनीति केवल पद बांटने की नहीं बल्कि चुनावी गणित, सामाजिक प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और संगठनात्मक अनुशासन को साथ लेकर चलने की रही है. यही कारण है कि पार्टी शायद ही कभी सभी राजनीतिक नियुक्तियां एक साथ करती है. पहले संगठन, फिर सरकार, उसके बाद केंद्रीय संगठन, केंद्रीय मंत्रिमंडल, राज्यसभा, विधान परिषद और अंत में आयोगों, निगमों तथा बोर्डों में नियुक्तियों के जरिए अलग-अलग समय पर राजनीतिक संदेश देने की रणनीति अपनाई जाती है. 

यूपी BJP की नई प्रदेश इकाई की घोषणा 25 जून को हो चुकी है और यही टीम 2027 के विधानसभा चुनाव तक संगठन का नेतृत्व करेगी.. इससे पहले 10 मई को योगी मंत्रिमंडल का सीमित विस्तार हुआ था. अब निगाहें BJP के राष्ट्रीय संगठन के पुनर्गठन पर टिकी हैं. पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपनी नई राष्ट्रीय टीम गठित करने वाले हैं. 

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश को इसमें महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिल सकता है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, राष्ट्रीय संगठन का पुनर्गठन उन नेताओं के लिए पहला बड़ा अवसर होगा जो प्रदेश संगठन या मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना सके. उनके मुताबिक, "राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से दो राष्ट्रीय महामंत्री, तीन उपाध्यक्ष सहित लगभग दस पदाधिकारियों को जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. इससे संगठनात्मक और सामाजिक दोनों तरह का संतुलन बनाने में मदद मिलेगी." राजनीतिक चर्चाओं में जिन नेताओं के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं, उनमें राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, अशोक कटारिया, संतोष सिंह, विनोद सोनकर, रेखा वर्मा, पंकज सिंह, अश्विनी त्यागी और गोविंद नारायण शुक्ल शामिल हैं. इनमें से अधिकांश नेताओं के नाम पहले प्रदेश संगठन अथवा मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं में भी थे. 

हालांकि BJP के भीतर यह भी माना जा रहा है कि राष्ट्रीय संगठन अंतिम पड़ाव नहीं होगा. पार्टी के कई सांसद इस संभावना पर भी नजर लगाए हुए हैं कि संगठनात्मक प्रक्रिया पूरी होने के बाद या उसके समानांतर केंद्र सरकार में भी मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो उत्तर प्रदेश से कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए BJP राज्य में अपना राजनीतिक प्रतिनिधित्व और मजबूत करना चाहेगी. 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP की सबसे बड़ी ताकत उसकी ‘राजनीतिक टाइमिंग’ रही है. पार्टी कभी भी सभी दावेदारों को एक साथ संतुष्ट करने का प्रयास नहीं करती. इसके बजाय अवसरों को चरणबद्ध तरीके से वितरित किया जाता है, जिससे असंतोष भी नियंत्रित रहता है और हर चरण में राजनीतिक संदेश भी जाता है. 

एक वरिष्ठ मंत्री स्वीकार करते हैं कि यह BJP की स्थापित कार्यशैली है. उनके शब्दों में, "राजनीतिक समायोजन के लिए चरणबद्ध दृष्टिकोण BJP की प्रमुख संगठनात्मक ताकतों में से एक रहा है. इससे पार्टी चुनावी जरूरतों के हिसाब से जातीय, क्षेत्रीय और लैंगिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाते हुए नेताओं की आकांक्षाओं का प्रबंधन कर पाती है और असंतोष को नियंत्रित रखने में सफल रहती है." 

दरअसल, अगले कुछ महीनों में BJP के सामने अवसरों की पूरी श्रृंखला मौजूद है. नवंबर में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की करीब दस सीटें खाली होने जा रही हैं. इसके बाद जनवरी में विधान परिषद की लगभग इतनी ही सीटें खाली होंगी. BJP परंपरागत रूप से इन चुनावों के उम्मीदवार समय से पहले घोषित करती रही है. ऐसे में संगठन में लंबे समय से सक्रिय लेकिन प्रत्यक्ष चुनावी राजनीति से बाहर नेताओं के लिए यह भी एक बड़ा अवसर माना जा रहा है. 

वर्ष 2027 से पहले सरकारी आयोगों, निगमों और बोर्डों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है. यह प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले BJP इन संस्थाओं में भी नियुक्तियां कर संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश करेगी.

दिलचस्प यह भी है कि BJP केवल नए चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति नहीं अपना रही बल्कि पुराने नेताओं को फिर से सक्रिय करने की भी तैयारी कर रही है. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपने लखनऊ प्रवास के दौरान कार्यकर्ताओं से स्पष्ट कहा था कि वे पूर्व पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से नियमित संपर्क बनाए रखें. इसके बाद प्रदेश संगठन ने सभी जिलों से ऐसे नेताओं की सूची मांगी है, जो पहले संगठन या सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं लेकिन फिलहाल सक्रिय जिम्मेदारी में नहीं हैं. 

प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा ने भी संगठनात्मक बैठकों में कहा कि सनातन परंपरा अनुभवी लोगों के मार्गदर्शन को महत्व देती है और BJP उसी भावना के साथ पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रही है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी संपर्क और समन्वय को आगामी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इसके पीछे केवल भावनात्मक कारण नहीं हैं. BJP समझती है कि जिन नेताओं ने संगठन को उस दौर में खड़ा किया जब पार्टी सत्ता में नहीं थी, उनका स्थानीय स्तर पर अब भी प्रभाव है. अगर ऐसे नेताओं की उपेक्षा होती है तो चुनावी स्तर पर इसका असर पड़ सकता है. इसलिए पार्टी उन्हें सम्मानजनक भूमिका देकर कार्यकर्ताओं तक सकारात्मक संदेश पहुंचाना चाहती है. इसी रणनीति के तहत प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों और 98 संगठनात्मक जिलों में नए प्रभारियों की नियुक्ति की तैयारी भी चल रही है. पार्टी का प्रयास है कि विधानसभा प्रभारियों का राजनीतिक अनुभव संबंधित क्षेत्र के संभावित प्रत्याशी से अधिक हो, ताकि संगठनात्मक अनुशासन बना रहे और चुनावी प्रबंधन प्रभावी ढंग से हो सके. 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP इस समय दो समानांतर रणनीतियों पर काम कर रही है. पहली, युवा नेतृत्व को आगे लाकर संगठन में ऊर्जा बनाए रखना और दूसरी, अनुभवी नेताओं को सम्मानजनक भूमिका देकर संगठनात्मक निरंतरता बनाए रखना. यही कारण है कि नितिन नवीन के नेतृत्व में राष्ट्रीय संगठन में अपेक्षाकृत युवा चेहरों को जगह देने की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं को सलाहकार, प्रभारी या राजनीतिक नियुक्तियों के जरिए जोड़े रखने की तैयारी भी दिखाई दे रही है. 

सामाजिक समीकरण भी इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा होंगे. उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग, दलित, सवर्ण, महिला, युवा और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को संतुलित करना BJP के लिए राजनीतिक जरूरत है. यही वजह है कि किसी एक चरण में सभी समीकरण नहीं साधे जाते बल्कि अलग-अलग नियुक्तियों के माध्यम से पूरे चुनावी चक्र में संदेश दिया जाता है कि प्रत्येक वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है. यही कारण है कि प्रदेश संगठन की घोषणा और मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी BJP के भीतर राजनीतिक गतिविधियां थमी नहीं हैं. पार्टी के भीतर यह व्यापक धारणा है कि अभी कई दौर की नियुक्तियां बाकी हैं और अंतिम तस्वीर अगले कुछ महीनों में ही स्पष्ट होगी. 

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