BJP सरकार में कितनी अलग होगी बंगाल की दुर्गा पूजा?

शुभेंदु अधिकारी सरकार ने दुर्गा पूजा को लेकर कई अहम नियम बदले हैं. रेड रोड कार्निवल खत्म करने से लेकर अष्टमी पर शराबबंदी तक, इस बार पूजा का अंदाज ममता बनर्जी के दौर से काफी अलग होगा

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दुर्गा पूजा की कई व्यवस्थाओं को बदलने का आदेश दिया है

BJP शासित पश्चिम बंगाल में इस साल दुर्गा पूजा का आयोजन काफी बदले हुए अंदाज में होने जा रहा है. शुभेंदु अधिकारी सरकार ने ममता बनर्जी के दौर की कई जानी-पहचानी व्यवस्थाओं को हटाकर कड़े नियम लागू किए हैं. इसके साथ ही राज्य के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सव में लोगों की भागीदारी का तरीका भी बदला जा रहा है.

मुख्यमंत्री ने 7 सितंबर को दुर्गा पूजा आयोजकों को संबोधित करते हुए ऐलान किया कि महाष्टमी के दिन पूरे बंगाल में शराब की दुकानें और बार बंद रहेंगे. बंगाल में किसी सरकार की ओर से पूजा को लेकर इस तरह की यह पहली गाइडलाइन है. इसके अलावा पूजा स्थलों और प्रतिमा विसर्जन जुलूसों में डीजे पर भी रोक रहेगी.

सरकार ने कोलकाता के रेड रोड पर होने वाली बहुचर्चित पूजा के बाद के कार्निवल को भी खत्म कर दिया है. पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौर में होने वाले इस आयोजन में चुनिंदा दुर्गा प्रतिमाओं को विसर्जन से पहले प्रदर्शित किया जाता था.

इसके बजाय शुभेंदु सरकार कोलकाता के ईडन गार्डन्स में चार घंटे का महालया कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रही है. इसमें ड्रोन और आतिशबाजी होगी. 

ममता बनर्जी की सरकार में कार्निवल दुर्गा पूजा का सबसे भव्य आयोजन हुआ करता था (फाइल फोटो)

इसके अलावा शहर और छह अन्य कस्बों में रोड शो भी होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईडन गार्डन्स के इस कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है.

ये बदलाव ऐसे समय में किए गए हैं जब BJP सरकार दुर्गा पूजा पर अपनी छाप छोड़ने की कोशिश कर रही है. इससे पहले 15 साल तक रही तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सरकारी सहयोग से होने वाले पूजा आयोजनों को त्योहारों के कैलेंडर का प्रमुख हिस्सा बना दिया था.

कार्निवल से महालया के आयोजन तक

ममता सरकार के प्रमुख सार्वजनिक आयोजनों में शामिल रहा रेड रोड कार्निवल अब नहीं होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपने आधिकारिक आयोजनों को महालया के आसपास केंद्रित करेगी.

अधिकारी ने कहा, "महालया पर ईडन गार्डन्स में सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा. इसमें ड्रोन और आतिशबाजी होगी. पूरा कार्यक्रम चार घंटे का होगा. हम रोड शो भी करेंगे."

उन्होंने दीघा में भी ऐसा ही एक अलग कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया. इसके अलावा छह कस्बों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और कोलकाता में गंगा के चार घाटों पर सजावट की जाएगी.

BJP पिछली सरकार के कार्निवल की बार-बार आलोचना करती रही है. खासकर पिछले साल जब उत्तर बंगाल में भीषण बाढ़ के बीच ममता बनर्जी इसमें शामिल हुई थीं.

सीमित आर्थिक सहायता

सरकार ने पूजा समितियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी बदल दी है. पहले आयोजकों को व्यापक स्तर पर अनुदान दिया जाता था. इस साल 1 लाख रुपए की सहायता उन छोटी पूजा समितियों के लिए होगी जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है.

मुख्यमंत्री का कहना है, "छोटी पूजा समितियों को आर्थिक सहायता दी जाएगी. जिनका बजट बड़ा है, उनसे मैं अनुरोध करता हूं कि वे सरकार से फंड न मांगें. सरकार उन लोगों की मदद करेगी जो आर्थिक सहायता के बिना पूजा आयोजित नहीं कर सकते."

मूर्ति विसर्जन पर सरकार की खास नजर है (फोटो : AI)

हालांकि सरकार ने सभी आयोजकों को कुछ रियायतें दी हैं. इनमें मुफ्त बिजली और अनिवार्य अग्नि सुरक्षा लाइसेंस के शुल्क से छूट शामिल है. कुछ पूजा आयोजकों ने पहले ही सहायता राशि नहीं लेने का फैसला किया है.

विसर्जन पर नजर

सरकार ने पूजा से जुड़े यातायात और विसर्जन जुलूसों से होने वाली परेशानी को कम करने की भी कोशिश की है.

शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "दुर्गा पूजा के लिए कोई भी राष्ट्रीय राजमार्ग बंद नहीं किया जा सकता." उन्होंने साफ किया कि पूजा पंडालों को कोलकाता की 13 प्रमुख सड़कों को बंद करने की अनुमति नहीं होगी. इनमें रेड रोड, प्रिंस अनवर शाह रोड, डी.एल. खान रोड, हॉस्पिटल रोड, स्ट्रैंड रोड, लेनिन सरणी और पार्क सर्कस का सेवन-प्वाइंट क्रॉसिंग शामिल हैं.

सभी प्रतिमाओं का विसर्जन 24 अक्टूबर तक पूरा करना होगा. इसके अगले दिन लक्ष्मी पूजा है. दुर्गा पूजा का त्योहार 16 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक मनाया जाएगा.

'धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाएं'

सरकार ने कोलकाता में तेजी से लोकप्रिय हो रही थीम आधारित पूजा पर भी ध्यान दिया है. ये पूजा अब शहर के त्योहारों की पहचान बन चुकी हैं. मुख्यमंत्री ने आयोजकों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि प्रतिमाओं, पंडालों, थीम और सजावट से धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे. साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को विकृत न किया जाए.

यह अपील त्योहार के दौरान कलात्मक प्रयोगों की सीमा को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच आई है. इसके अलावा 7 सितंबर के एक कार्यक्रम के लिए BJP के विज्ञापन को लेकर हुए विवाद के बाद भी यह बात सामने आई है. इस विज्ञापन में देवी दुर्गा को पारंपरिक 10 की जगह 11 भुजाओं के साथ दिखाया गया था.

इस विज्ञापन को लेकर काफी विवाद हुआ. विपक्षी तृणमूल कांग्रेस ने BJP पर बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं का अनादर करने का आरोप लगाया. कार्यक्रम में इस्तेमाल किए गए बैनर में भी वही तस्वीर थी लेकिन बाद में अतिरिक्त हाथ को ढक दिया गया.

इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने माफी मांगी. उन्होंने कहा, "मां दुर्गा को 10 की जगह 11 हाथों के साथ दिखाने वाले गलत सरकारी विज्ञापन के लिए मैं माफी मांगता हूं. हम आगे से ज्यादा सावधान रहेंगे और अधिकारियों को भी चेतावनी दी है."

नई राजनीतिक छाप

इस विवाद ने BJP सरकार की उस कोशिश को असहज पृष्ठभूमि दे दी है, जिसमें वह खुद को बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षक दिखाना चाहती है. हालांकि पूजा को लेकर घोषित किए गए सभी फैसलों को एक साथ देखें तो वे उस तरीके से साफ तौर पर अलग हैं, जिस तरह तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अनुदान, सार्वजनिक आयोजनों और चर्चित रेड रोड कार्निवल के जरिए खुद को पूजा कैलेंडर का हिस्सा बनाया था.

नई सरकार का तरीका सार्वजनिक आयोजनों पर ज्यादा कड़े नियम, सीमित और चुनिंदा आर्थिक सहायता तथा अपने स्तर पर बहुत बड़े महालया कार्यक्रम का मेल है. लेकिन इसमें राजनीति भी है. 

11 भुजाओं वाली दुर्गा के विज्ञापन ने तृणमूल कांग्रेस को BJP की सांस्कृतिक साख पर सवाल उठाने का नया मुद्दा दे दिया है. वहीं सरकार का कहना है कि नए नियमों का मकसद धार्मिक भावनाओं की रक्षा करना और बंगाली संस्कृति को बनाए रखना है.

तृणमूल कांग्रेस ने कहा, "मां का घर लौटना लाखों बंगालियों के लिए पवित्र है. फिर भी बंगाल की बात करने का दावा करने वाली सरकार बंगाली संस्कृति, परंपराओं और उन त्योहारों से लगातार दूर होती दिख रही है जो बंगाल की पहचान तय करते हैं."

वहीं शुभेंदु अधिकारी ने नए तरीके को अलग रूप में पेश करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा, "छह कस्बों में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. कोलकाता के गंगा के चार घाटों को पूजा के लिए सजाया जाएगा... हम इस दुर्गा पूजा में बंगाली संस्कृति को बनाए रखेंगे."

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