बीजेपी सरकार में फिर लौट रही है बिमल गुरूंग की सियासी ताकत!

तृणमूल कांग्रेस के शासन में राजनीतिक हाशिये पर रहे गोरखा नेता बिमल गुरूंग अब एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहे हैं. उत्तर बंगाल को प्राथमिकता दे रही बीजेपी सरकार के साथ बढ़ती नजदीकियां उनकी राजनीतिक वापसी के संकेत मानी जा रही हैं

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात करते गोरखा जनमुक्ति मोर्चा प्रमुख बिमल गुरूंग

कभी गोरखालैंड आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा रहे बिमल गुरूंग पिछले करीब पांच साल से दार्जिलिंग की राजनीति में हाशिये पर दिखाई दे रहे थे. गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) प्रमुख का प्रभाव तृणमूल कांग्रेस के शासन के दौरान लगातार घटता गया. बदलते राजनीतिक समीकरण, कानूनी मामले और पहाड़ के नए नेताओं के उभरने से उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही थी.

हालांकि पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद यह तस्वीर तेजी से बदलती दिखाई दे रही है. उनकी बढ़ती राजनीतिक अहमियत का संकेत 29 जुलाई को कोलकाता में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ हुई लंबी बैठक से भी मिला. इस बैठक में पहाड़ के विकास, चाय बागानों, गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन, परिवहन ढांचे और स्कूल शिक्षकों की भर्ती जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई.

बैठक के बाद गुरूंग ने बताया कि GJM ने 7 अक्टूबर को पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को दार्जिलिंग आने का निमंत्रण दिया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब बीजेपी सरकार उत्तर बंगाल को राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकता दे रही है. गुरूंग के लिए इसे राजनीतिक वापसी के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस साल हुए विधानसभा चुनाव में दार्जिलिंग की तीनों पहाड़ी सीटों पर बीजेपी की बड़ी जीत में गुरूंग की अहम भूमिका रही. उनके संगठनात्मक नेटवर्क और गोरखा समुदाय के एक बड़े वर्ग में लोकप्रियता ने बीजेपी को उस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद की. 

पिछले कुछ दिनों में गुरूंग ने शुभेंदु अधिकारी सरकार के कई मंत्रियों से भी मुलाकात की है. इससे राज्य सरकार और GJM के बीच बढ़ती नजदीकियों और गुरुंग की सक्रियता का संकेत मिलता है.

27 जुलाई को GJM के प्रतिनिधिमंडल ने कानून मंत्री बिराज बिस्वास से मुलाकात की और तृणमूल कांग्रेस के शासन के दौरान गोरखालैंड आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की. पार्टी का कहना था कि इन मामलों की वजह से उसके कई नेताओं को बरसों तक पहाड़ से दूर रहना पड़ा.

अगले ही दिन गुरूंग ने पंचायत मंत्री दिलीप घोष से मुलाकात की. उन्होंने करीब दो दशक बाद पहाड़ में हुए पहले ग्रामीण पंचायत चुनाव के बाद नव-निर्वाचित पंचायतों को ज्यादा अधिकार देने की मांग की. प्रतिनिधिमंडल ने हर पंचायत में अलग से आपदा प्रबंधन ढांचा विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा ताकि बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से बेहतर तरीके से निपटा जा सके.

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ बैठक में GJM ने तृणमूल शासन के दौरान गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उठाई. पार्टी ने बीजेपी सरकार से इस मामले से जुड़ी सरकारी फाइलें दोबारा खोलने का आग्रह किया है.

गुरूंग ने बताया कि गोरखालैंड राज्य की लंबे समय से लंबित मांग पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार सहित त्रिपक्षीय वार्ता की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह अगले सप्ताह पहाड़ का दौरा करेंगे और परिवहन से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करेंगे.

बीजेपी सरकार के लिए गुरूंग आज भी दार्जिलिंग पहाड़ियों के बड़े हिस्से में मजबूत जनसमर्थन रखने वाले कुछ चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं. वहीं गुरूंग के लिए कोलकाता में हुई ये बैठकें अहम और बड़ा संकेत हैं.

वर्षों की राजनीतिक अनिश्चितता के बाद अनुभवी गोरखा नेता एक बार फिर पश्चिम बंगाल की पहाड़ी राजनीति के केंद्र में अपनी जगह बनाते दिखाई दे रहे हैं. आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि उनकी यह वापसी दार्जिलिंग की राजनीति में उन्हें कितनी बड़ी भूमिका दिला पाती है.

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