श्रीलंका की 'रावणेश्वरा' और 30 लाख दीये, अयोध्या का दीपोत्सव इस साल खास क्यों?

अयोध्या में इस बार दीपोत्सव में 56 घाटों पर 30 लाख दीयों का प्रज्ज्वलन, तीन देशों की रामलीला, 2100 ड्रोन शो और देशभर की लोककलाओं का अनूठा संगम दिखेगा

Dussehra 2026
इस बार अयोध्या में श्रीलंका की रामलीला 'रावणेश्वरा' की खास प्रस्तुति होगी (सांकेतिक तस्वीर)

रामनगरी अयोध्या में इन दिनों सुबह से देर रात तक चहल-पहल है. कहीं फूलों से सजे तोरण द्वारों को अंतिम रूप दिया जा रहा है तो कहीं सड़कों और चौराहों पर रंग-बिरंगी रोशनी की झालरें लगाई जा रही हैं. वातावरण में घुलती रामधुन और मंदिरों से आती घंटियों की आवाज के बीच पूरी नगरी अपने आराध्य के स्वागत में सज रही है. सरयू के घाटों पर हजारों हाथ मिट्टी के दीयों को कतारों में सजा रहे हैं. 

राम की पैड़ी के सभी 56 घाटों पर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र स्वयंसेवक अलग-अलग ब्लॉक में बैठकर दीयों की ऐसी ज्यामितीय संरचना तैयार कर रहे हैं, जो सात नवंबर की शाम रोशनी के विशाल समंदर में तब्दील हो जाएगी. 

अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियों का यह दृश्य इस बार कुछ खास है. आयोजन के दसवें संस्करण में 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य तो है ही, साथ में देश के अलग-अलग राज्यों की लोक कलाओं, अंतरराष्ट्रीय रामलीला, भव्य रामरथ, पुष्पक विमान और आधुनिक तकनीक के जरिए रामायण की सांस्कृतिक विरासत को नए अंदाज में प्रस्तुत करने की तैयारी है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित हो रहा दसवां दीपोत्सव इसलिए भी खास है क्योंकि यह एक दशक में अयोध्या के दीपोत्सव की यात्रा और उसके विस्तार को रेखांकित करेगा. सात नवंबर को होने वाले मुख्य आयोजन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामकथा पार्क में भगवान श्रीराम का राजतिलक करेंगे. इसके बाद राम की पैड़ी सहित विभिन्न घाटों पर 30 लाख मिट्टी के दीये प्रज्ज्वलित किए जाएंगे.

अयोध्या के सभी 56 घाटों पर दीये प्रज्ज्वलित किए जाएंगे (फाइल फोटो)

अयोध्या के इस पांच दिवसीय आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आधुनिक तकनीक का ऐसा मेल देखने को मिलेगा, जिसमें अयोध्या की स्थानीय परंपराओं के साथ देश और दुनिया की रामकथा की विविध छवियां भी शामिल होंगी.

56 घाटों पर 30 लाख दीये

दसवें दीपोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण राम की पैड़ी के सभी 56 घाटों पर 30 लाख दीयों का प्रज्ज्वलन होगा. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की टीम कई दिनों से तैयारियों में जुटी है. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों के हजारों छात्र स्वयंसेवकों को अलग-अलग घाटों और ब्लॉक में जिम्मेदारी सौंपी गई है. 

छात्रों को बसों के माध्यम से सीधे नदी तट तक पहुंचाया जा रहा है. घाट समन्वयकों की देखरेख में दीयों को निर्धारित ज्यामितीय ग्रिड में सजाया जा रहा है ताकि उनमें तेल डालने, बाती लगाने और निर्धारित समय पर प्रज्ज्वलन की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी हो सके.

दीयों की संख्या के साथ इस बार आयोजन की व्यवस्थाओं का विस्तार भी किया गया है. राम की पैड़ी परिसर में दर्शकों की क्षमता बढ़ाकर 15 हजार की जा रही है. पहली बार यहां फुटर गैलरी भी तैयार की गई है. सरयू तट पर 2187 अर्चकों और महिलाओं की ओर से महाआरती की जाएगी. इतने बड़े स्तर पर होने वाला यह धार्मिक आयोजन दीपोत्सव के दृश्य को और भव्य बनाएगा. दीपों की कतारों के साथ सरयू की लहरों पर पड़ती रोशनी और एक साथ उठती आरती की लौ श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण होगी.

अयोध्या का ड्रोन शो भी इस बार खास होने वाला है (सांकेतिक तस्वीर)

दीपोत्सव की सजावट का विस्तार अयोध्या शहर से निकलकर गोंडा सीमा तक पहुंच गया है. पुराने सरयू पुल को विशेष प्रकाश सज्जा, फूलों और तोरण द्वारों से सजाया जा रहा है. पुल पर आतिशबाजी का भी आयोजन होगा. इससे सरयू के दोनों किनारों पर रोशनी का आकर्षक दृश्य दिखाई देगा. अयोध्या में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों, उदया चौराहे, चूड़ामणि चौराहे, धर्मपथ और लता चौक को भी विशेष रूप से सजाया गया है. 

रामपथ पर डिवाइडर से लेकर दोनों ओर लगे होर्डिंग रामायण के प्रसंगों और रामराज्य की अवधारणा को सामने रख रहे हैं. कहीं लंका विजय के बाद श्रीराम की अयोध्या वापसी का चित्रण है तो कहीं रामचरितमानस की चौपाइयों के जरिए आदर्श शासन की कल्पना प्रस्तुत की गई है.

इस बार रोशनी के पारंपरिक आयोजन को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा गया है. राम की पैड़ी पर ग्रीन बुलेट शो के साथ 2100 ड्रोन का शो आकर्षण का केंद्र होगा. रामायण थीम पर 300 फीट लंबा और 50 फीट ऊंचा सिनेमैटिक फसाड तैयार किया जा रहा है. इसके अलावा लेजर शो और प्रोजेक्शन मैपिंग के जरिए रामायण के प्रसंगों को जीवंत करने की तैयारी है. इन कार्यक्रमों के लिए कर्मचारियों की ओर से लगातार रिहर्सल किया जा रहा है.

पुष्पक विमान और 15 फीट ऊंचा रामरथ 

दसवें दीपोत्सव में भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने और उनके राज्याभिषेक के प्रसंग को भव्य स्वरूप देने के लिए कई विशेष संरचनाएं तैयार की जा रही हैं. इनमें पुष्पक विमान और राम दरबार प्रमुख हैं. पर्यटन विभाग की ओर से तैयार कराया जा रहा पुष्पक विमान 30 फीट लंबा, 12 फीट चौड़ा और 16 फीट ऊंचा होगा. वहीं राम दरबार की ऊंचाई करीब 20 फीट रखी गई है. 

प्लाई और कैनवास सामग्री से तैयार की जा रही इन संरचनाओं के निर्माण में बंगाल सहित दूसरे राज्यों के कारीगर जुटे हैं. सरयू नदी में रामायण थीम पर आधारित तीन नावें भी उतारी जाएंगी. इनसे नदी का दृश्य रामायण के प्रसंगों से जुड़ता नजर आएगा.

रामकथा पार्क में 15 फीट ऊंचा रामरथ भी तैयार किया जा रहा है. 16 फीट लंबा और 12 फीट चौड़ा यह रथ भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान सहित अन्य दिव्य स्वरूपों से सुसज्जित होगा. रामरथ पर सवार इन स्वरूपों के माध्यम से श्रीराम के अयोध्या आगमन का दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा. इस बार पहली बार अयोध्या की 16 टीमें भी रामलीला शोभायात्रा में शामिल होंगी. इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा.

इस दीपोत्सव की एक बड़ी विशेषता अंतरराष्ट्रीय रामलीला का आयोजन भी है. इस बार तीन देशों की चार टीमें रामकथा का मंचन करेंगी. इनमें दक्षिण अफ्रीका की दो, श्रीलंका और लाओस की एक-एक टीम शामिल हैं. पहले नेपाल और थाईलैंड की टीमों के भी आने की योजना थी, लेकिन अब ये टीमें आयोजन में शामिल नहीं होंगी.

दीपोत्सव के दौरान प. बंगाल की छऊ और दूसरे प्रदेशों की लोककलाओं का प्रदर्शन होगा (सांकेतिक फोटो)

श्रीलंका की टीम की प्रस्तुति 'रावणेश्वरा' विशेष आकर्षण होगी. इसमें रावण के उस व्यक्तित्व को प्रमुखता दी जाएगी, जिसमें उसे केवल रामकथा के प्रतिनायक के रूप में नहीं, बल्कि कुशल शासक, वेदों के ज्ञाता, महान योद्धा, संगीत साधक और शिवभक्त के रूप में प्रस्तुत किया जाता है. पारंपरिक वेशभूषा, मुकुट, आभूषण और नृत्य-नाट्य के माध्यम से श्रीलंका की सांस्कृतिक परंपराओं की झलक भी देखने को मिलेगी.

दक्षिण अफ्रीका की दो टीमें और लाओस की टीम भी अपनी-अपनी सांस्कृतिक शैली में रामकथा का मंचन करेंगी. इस तरह दीपोत्सव में रामायण की कथा को अलग-अलग देशों की सांस्कृतिक दृष्टि से देखने का अवसर मिलेगा. रामकथा के इन अंतरराष्ट्रीय स्वरूपों के जरिए अयोध्या का धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भारत की सीमाओं से आगे तक पहुंचेगा.

लोककलाओं का महासंगम

इस बार उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ देश के कई राज्यों के लोक कलाकार अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियां देंगे. पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक, प्रदेश के कलाकार दूसरे राज्यों से आए कलाकारों के साथ मिलकर अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करेंगे. इसका उद्देश्य दीपोत्सव के माध्यम से भारत की लोक कलाओं और परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है. 

उत्तर प्रदेश की ओर से अयोध्या के कलाकार बधवा, फरुवाही और डमरू-शंख की प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत करेंगे. मथुरा के कलाकार ब्रज के प्रसिद्ध मयूर और बम रसिया नृत्य प्रस्तुत करेंगे. प्रयागराज का ढेढ़िया, बांदा का पै डंडा, सोनभद्र का मंडल-सिंघा और कर्मा, गोरखपुर का वनटांगिया, पीलीभीत का थारू और झांसी का राई नृत्य भी दर्शकों को देखने को मिलेगा. 

इसके अलावा सुल्तानपुर का नटवारी, बहराइच का डोमकच और गाजीपुर तथा आजमगढ़ का धोबिया नृत्य प्रदेश की क्षेत्रीय सांस्कृतिक विविधता को सामने रखेगा. दूसरे राज्यों की लोक परंपराओं का रंग भी इस बार दीपोत्सव में दिखाई देगा. पश्चिम बंगाल का पुरुलिया छऊ नृत्य, श्री खोल वादन और कर्नाटक का ढोलु कुनिथा अपनी विशिष्ट लय और प्रस्तुति शैली के साथ शामिल होंगे. 

राजस्थान का घूमर, आंध्र प्रदेश का बोनालू, ओडिशा का मुखौटा नृत्य, शाही जात्रा, रणप्पा चढ़ैया और शंख वादन कार्यक्रम का हिस्सा होंगे. बिहार का झिझिया, गुजरात का तलवार रास और मध्य प्रदेश का गुदुम बाजा भी दर्शकों को आकर्षित करेंगे. तमिलनाडु के कावड़ी, करगम और मयूर नृत्य के साथ देश के अन्य हिस्सों के कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे. 

इन प्रस्तुतियों में लोकजीवन, धार्मिक आस्था, क्षेत्रीय इतिहास और परंपराओं की अलग-अलग झलक देखने को मिलेगी. पश्चिम बंगाल के छऊ की मुखौटा शैली और राजस्थान के घूमर की लय से लेकर दक्षिण भारत के पारंपरिक नृत्यों तक, अयोध्या का मंच देश की सांस्कृतिक विविधता को एक साथ समेटेगा. इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों की भागीदारी भी विशेष रूप से बढ़ाई गई है. पहली बार अयोध्या की 16 टीमें रामलीला शोभायात्रा में शामिल होंगी.

कुल मिलाकर, दसवें दीपोत्सव में अयोध्या केवल 30 लाख दीयों की रोशनी से जगमगाती नगरी के रूप में ही सामने नहीं आएगी, बल्कि यह रामायण, लोककला, धार्मिक परंपरा और आधुनिक तकनीक के संगम का मंच भी बनेगी.

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