सिर्फ तीन साल में कैसे बिखर गया अतीक अहमद का कुनबा?
अतीक-अशरफ की हत्या से शुरू हुआ परिवार के बिखरने का सिलसिला अब आबान की मौत तक पहुंच चुका है. तीन साल में एक बेटा एनकाउंटर में मारा गया, दो जेल में हैं, एक की सड़क हादसे में मौत हो गई और परिवार की कई महिलाएं अब भी फरार हैं

अतीक अहमद (बीच में) का एक बेटा अली (बाएं) जेल में बंद है, दूसरे बेटे आबान (दाएं) की रोड एक्सीडेंट में मौत हो चुकी है
प्रयागराज की गलियों में कभी जिस नाम का खौफ कानून से भी बड़ा माना जाता था, आज वही अतीक अहमद का परिवार अपने अस्तित्व की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहा है.
कभी राजनीति, अपराध और आर्थिक ताकत के दम पर पूरे पूर्वांचल में प्रभाव रखने वाला यह कुनबा पिछले तीन वर्षों में ऐसी घटनाओं से गुजरा कि परिवार का लगभग हर सदस्य किसी न किसी त्रासदी, जेल या फरारी का हिस्सा बन गया.
6 अगस्त को झांसी में सड़क हादसे में अतीक के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद की मौत इस सिलसिले की ताजा और सबसे दर्दनाक कड़ी बन गई है.
आबान की मौत ने सिर्फ एक बेटे की जिंदगी नहीं छीनी, बल्कि उस परिवार के भविष्य की एक और संभावना भी खत्म कर दी, जिसके मुखिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में पुलिस कस्टडी के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
तीन साल पहले शुरू हुआ यह सिलसिला अब उस मुकाम पर पहुंच चुका है, जहां कभी पांच बेटों वाले अतीक परिवार में एक बेटा मुठभेड़ में मारा जा चुका है, दो जेलों में बंद हैं, एक की सड़क हादसे में मौत हो गई और केवल एक बेटा सामान्य जीवन की ओर लौटने की कोशिश करता दिखाई देता है.
दूसरी ओर पत्नी शाइस्ता परवीन, भाई अशरफ की पत्नी जैनब और बहन नूरी अब भी फरार हैं. एक समय का सबसे प्रभावशाली माफिया परिवार आज बिखराव, कानूनी संकट और लगातार घटती पारिवारिक मौजूदगी की कहानी बन चुका है.
15 अप्रैल 2023 से शुरू हुआ पतन का सबसे बड़ा अध्याय
अतीक अहमद के साम्राज्य के पतन की शुरुआत वास्तव में उमेश पाल हत्याकांड के बाद हुई. 24 फरवरी 2023 को उमेश पाल की हत्या ने पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था और राजनीति को झकझोर दिया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ ने अतीक नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने का अभियान शुरू किया. सबसे पहले पुलिस ने अतीक के तीसरे बेटे असद अहमद को मुख्य आरोपी बनाया.
लगातार पीछा करने के बाद 13 अप्रैल 2023 को झांसी में एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में असद और शूटर गुलाम मारे गए. बेटे की मौत की खबर सुनकर अतीक अदालत परिसर में फूट-फूटकर रो पड़ा था. लेकिन यह परिवार के लिए आने वाले और बड़े झटकों की शुरुआत भर थी.
महज दो दिन बाद 15 अप्रैल 2023 की रात प्रयागराज के मेडिकल कॉलेज परिसर में मीडिया के सामने पुलिस कस्टडी में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया. अपराध जगत में दशकों तक दबदबा रखने वाले दो भाइयों का अंत कुछ ही सेकंड में हो गया.
उस समय अतीक के दो छोटे बेटे अहजम और आबान नाबालिग होने के कारण बाल संरक्षण गृह में थे. उमेश पाल हत्याकांड के बाद पुलिस उन्हें चकिया स्थित घर से लेकर गई थी. अतीक और अशरफ की हत्या के समय भी दोनों बाल संरक्षण गृह में ही रह रहे थे.
बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बाल कल्याण समिति ने दोनों को उनकी बुआ परवीन कुरैशी की सुपुर्दगी में सौंपा. बाल संरक्षण गृह से बाहर निकलने के बाद दोनों सबसे पहले कसारी-मसारी कब्रिस्तान पहुंचे, जहां उन्होंने अपने पिता और चाचा की कब्र पर फातिहा पढ़ी. यह दृश्य उस परिवार की बदलती तस्वीर का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया था.
पांच बेटों की पांच अलग-अलग किस्मत
अतीक अहमद के पांचों बेटों की जिंदगी पिछले तीन वर्षों में बिल्कुल अलग दिशाओं में चली गई, लेकिन किसी की भी कहानी सामान्य नहीं रही. सबसे बड़े बेटे उमर अहमद का नाम देवरिया जेलकांड में सामने आया. आरोप था कि देवरिया जेल में बंद अतीक के इशारे पर एक कारोबारी के साथ मारपीट की गई थी.
इस मामले में सीबीआई जांच शुरू हुई और बाद में उमर ने एजेंसी के सामने आत्मसमर्पण किया. अभी वह लखनऊ जेल में बंद है और गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहा है. दूसरे बेटे अली अहमद पर रंगदारी, धमकी और कई अन्य गंभीर आरोप दर्ज हैं. पहले नैनी जेल में बंद रहे अली को बाद में झांसी जेल स्थानांतरित कर दिया गया.
आबान जिस दिन सड़क हादसे का शिकार हुआ, उसी दिन वह अपने भाई अली से मिलने झांसी जा रहा था. हादसे ने परिवार की एक और कड़ी तोड़ दी. अब अली के संभावित पैरोल पर बाहर आने की चर्चा जरूर शुरू हुई है लेकिन उसकी कानूनी मुश्किलें बरकरार हैं.
तीसरे बेटे असद अहमद की कहानी सबसे चर्चित रही. उमेश पाल हत्याकांड में कथित तौर पर हथियार चलाते हुए उसका वीडियो वायरल हुआ. पुलिस ने उसे मुख्य शूटरों में शामिल माना और 13 अप्रैल 2023 को झांसी में मुठभेड़ में वह मारा गया. असद की मौत के साथ अतीक के उत्तराधिकारी माने जाने वाले चेहरे का अंत हो गया.
चौथे बेटे अहजम ने अपेक्षाकृत अलग रास्ता चुना. बाल संरक्षण गृह से निकलने के बाद वह कुछ समय तक प्रयागराज में बुआ के घर रहा और बाद में उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता चला गया. बताया जाता है कि वह राजनीति विज्ञान से ग्रेजुएशन कर रहा है. फिलहाल वही परिवार का ऐसा सदस्य है जो आपराधिक मामलों से दूर रहकर सामान्य जीवन की कोशिश करता दिखाई देता है.
सबसे छोटे बेटे आबान अहमद का जीवन भी विवादों से पूरी तरह अछूता नहीं रहा. बाल संरक्षण गृह से निकलने के बाद वह हटवा में अपनी बुआ के घर रहने लगा. बाद में वह कई बार सार्वजनिक रूप से चर्चा में आया. सितंबर 2025 में वह भाई अली से मिलने नैनी जेल तीन लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचा था.
इसके कुछ महीने बाद सोशल मीडिया पर वायरल एक रील को लेकर उसके खिलाफ धूमनगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई. उस वीडियो में कथित तौर पर धमकी भरे संवाद और आपराधिक छवि प्रस्तुत करने वाले दृश्य शामिल थे. अब झांसी में सड़क हादसे ने उसकी जिंदगी भी खत्म कर दी.
जेल, फरारी और खत्म होता पारिवारिक ढांचा
अतीक परिवार की त्रासदी सिर्फ बेटों तक सीमित नहीं रही. आज भी परिवार की सबसे महत्वपूर्ण महिला सदस्य कानून की नजर से दूर हैं. अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन पर कई मामलों में इनाम घोषित है और वे तीन वर्षों से फरार चल रही हैं.
अशरफ की पत्नी जैनब और अतीक की बहन नूरी भी जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर हैं. दूसरी ओर, परिवार की अधिकांश संपत्तियां पहले ही सरकारी कार्रवाई का सामना कर चुकी हैं. प्रयागराज में अतीक का आलीशान घर बुलडोजर कार्रवाई में ढहा दिया गया. करोड़ों रुपए की चल-अचल संपत्तियां जब्त या कुर्क की गईं.
आर्थिक आधार कमजोर पड़ने के साथ अतीक अहमद के परिवार का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी लगभग समाप्त हो गया. कभी प्रयागराज में इस परिवार का नाम स्थानीय राजनीति, ठेकेदारी और कारोबारी गतिविधियों में प्रभाव का पर्याय माना जाता था.
लेकिन पिछले तीन वर्षों में लगातार हुई पुलिस कार्रवाई, मुकदमों, संपत्ति जब्ती और पारिवारिक बिखराव ने उस पूरे ढांचे को लगभग समाप्त कर दिया. परिवार के कई पुराने सहयोगी भी दूरी बना चुके हैं और जो कभी अतीक के इर्द-गिर्द दिखाई देते थे, वे अब सार्वजनिक रूप से उससे जुड़ने से बचते हैं.
झांसी बन गया अतीक परिवार के लिए मनहूस शहर
अतीक परिवार के पिछले तीन वर्षों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो झांसी का नाम बार-बार सामने आता है. 13 अप्रैल 2023 को इसी शहर में एसटीएफ ने असद अहमद का एनकाउंटर किया था. उस घटना ने अतीक परिवार की कमर तोड़ दी थी.
इसके बाद वर्ष 2025 में अली अहमद को झांसी जेल भेजा गया. परिवार के लिए झांसी फिर महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया. 6 अगस्त 2026 को आबान अपने भाई अली से मिलने कार से झांसी जा रहा था. उसके साथ चार अन्य लोग भी थे. रास्ते में तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकरा गई और आबान की मौके पर ही मौत हो गई. सू
चना मिलते ही उसका भाई अहजम और अन्य रिश्तेदार झांसी पहुंच गए. जांच एजेंसियों की पुरानी पड़ताल में आबान का नाम एक अन्य कारण से भी सामने आया था. पुलिस के अनुसार, उमेश पाल हत्याकांड के दौरान जिन आईफोन फेसटाइम आईडी के माध्यम से कथित बातचीत हुई थी, उन्हें बनाने में आबान की भूमिका सामने आई थी.
जांच में दावा किया गया था कि उसने अतीक और अशरफ समेत कई लोगों की अलग-अलग फेसटाइम आईडी तैयार की थीं. हालांकि आबान के खिलाफ दर्ज मुकदमों की कानूनी प्रक्रिया अलग रही, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिला कि परिवार के सबसे छोटे सदस्य तक भी आपराधिक घटनाक्रम की छाया पहुंच चुकी थी.