दो साल तक पोस्टिंग नहीं, आंध्र प्रदेश में IAS अफसरों के साथ ऐसा क्यों हुआ?

आंध्र प्रदेश में कई आईएएस अधिकारी हफ्तों और महीनों तक बिना पोस्टिंग रहे हैं. इनमें एक अधिकारी को दो साल से ज्यादा इंतजार करना पड़ा जबकि उनके खिलाफ कोई सतर्कता या विभागीय जांच भी नहीं चल रही थी

सीएम के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को मिली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की जिम्मेदारी. (Photo: Representational)
चंद्रबाबू नायडू के मुख्यमंत्री बनने के बाद कई अफसरों की तैनाती अटकी रही है (सांकेतिक फोटो)

आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू सरकार ने 12 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर कई हफ्तों से पोस्टिंग का इंतजार कर रहे नौ आईएएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपीं. इनमें से एक अधिकारी का इंतजार करीब 120 हफ्ते यानी दो साल और चार महीने बाद खत्म हुआ.

2006 बैच के आईएएस अधिकारी डी. मुरलीधर रेड्डी जून 2024 से बिना किसी पोस्टिंग के थे. यानी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार के सत्ता में आने के बाद से उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं मिली थी. 

इस गठबंधन ने युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) को करारी शिकस्त देकर सत्ता हासिल की थी. अब आखिरकार रेड्डी को जनजातीय कल्याण विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है. इसके साथ ही एम.एम. नायक इस पद का अतिरिक्त प्रभार संभालने की जिम्मेदारी से मुक्त हो गए हैं.

रेड्डी उन करीब एक दर्जन आईएएस और दो दर्जन आईपीएस अधिकारियों में शामिल थे जिन्हें 2024 की दूसरी छमाही में आंध्र प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कोई पोस्टिंग नहीं दी गई थी. इसकी एक संभावित वजह राज्य और सत्ता के गलियारों में बनी यह धारणा थी कि इनमें से कई अधिकारी पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी और YSRCP के अन्य वरिष्ठ नेताओं के करीबी रहे थे. आरोप था कि इनमें से कुछ अधिकारी "नियमों और प्रक्रियाओं की परवाह किए बिना" पिछली सरकार के निर्देशों के मुताबिक काम करते थे.

बाद में बिना पोस्टिंग वाले अधिकारियों की संख्या धीरे-धीरे कम हुई लेकिन ज्यादातर को कम महत्वपूर्ण या लूप लाइन वाली जिम्मेदारियां दी गईं. हालांकि रेड्डी के साथ-साथ 1988 बैच की अधिकारी येर्रा श्रीलक्ष्मी का इंतजार भी जारी रहा. श्रीलक्ष्मी जगन सरकार में नगरपालिका प्रशासन और शहरी विकास (एमएयूडी) विभाग की विशेष मुख्य सचिव रह चुकी थीं. सत्ता हस्तांतरण के कुछ ही दिनों बाद उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से संबद्ध कर दिया गया था. वे भी 20 जून 2024 से नई पोस्टिंग का इंतजार कर रही थीं.

IAS अधिकारी मुरलीधर रेड्डी (फाइल फोटो)

श्रीलक्ष्मी उन आईएएस अधिकारियों में शामिल हैं, जिन पर जगन के आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप लगे हैं. CBI ने आरोप लगाया था कि 2007 से 2009 के दौरान उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की सचिव रहते हुए श्रीलक्ष्मी ने अपने पद का दुरुपयोग किया. 

आरोप के मुताबिक उन्होंने कर्नाटक के पूर्व मंत्री गली जनार्दन रेड्डी और अन्य लोगों की कंपनियों को ओबुलापुरम में खनन के पट्टे दिलाए. नवंबर 2011 में गिरफ्तार होने के बाद वs अक्टूबर 2012 तक हैदराबाद की जेल में रहीं. इसके बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया.

दिसंबर 2020 में जगन ने उन्हें नगरपालिका प्रशासन और शहरी विकास विभाग का सचिव नियुक्त किया. बाद में उन्होंने इसी विभाग में प्रधान सचिव और विशेष मुख्य सचिव के रूप में भी काम किया. TDP नेताओं ने उन पर अमरावती राजधानी परियोजना को नुकसान पहुंचाने में जगन की मदद करने का आरोप लगाया था.

सूत्रों के मुताबिक, श्रीलक्ष्मी ने पोस्टिंग पाने के लिए उपमुख्यमंत्री और जन सेना प्रमुख पवन कल्याण से हस्तक्षेप करने की गुहार भी लगाई थी लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ. कैडर में सबसे वरिष्ठ अधिकारी श्रीलक्ष्मी को आखिरकार जून के अंतिम सप्ताह में नायडू सरकार ने फिर जिम्मेदारी दी. उन्हें 30 जून को सेवानिवृत्त होने से महज चार दिन पहले सामान्य प्रशासन विभाग में विशेष मुख्य सचिव नियुक्त किया गया.

हालांकि रेड्डी के मामले में नायडू सरकार के पास कोई जांच नहीं थी. न तो विजिलेंस जांच, न विभागीय जांच और न ही किसी अन्य तरह की पड़ताल. ऐसे में दो साल से अधिक समय तक उन्हें पद से दूर रखने को उचित ठहराने का कोई आधार सामने नहीं आया.

राज्य सिविल सेवा से पदोन्नत होकर आईएएस बने रेड्डी आंध्र प्रदेश मेडिकल सर्विसेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एपीएमएसआईडीसी) के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रह चुके हैं. इसके अलावा वे सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल पॉवर्टी (एसईआरपी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी रहे हैं. जून 2024 में उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग से संबद्ध कर दिया गया था.

गौरतलब है कि कुरनूल के रहने वाले रेड्डी का रिश्ता YSRCP सरकार में वित्त मंत्री रहे बुग्गना राजेंद्रनाथ रेड्डी से है. वे जगन मोहन रेड्डी के भी दूर के रिश्तेदार हैं. सूत्रों के मुताबिक, रेड्डी ने पिछले दो साल में कई बार नायडू से मुलाकात कर पोस्टिंग मांगी. लेकिन "मुख्यमंत्री कार्यालय में पहले काम कर चुके एक-दो अधिकारियों ने उनके बारे में नकारात्मक धारणा बना दी थी जिसके कारण उन्हें इंतजार करना पड़ा."

जब रेड्डी ने अपनी किस्मत मानकर इंतजार करना शुरू कर दिया था तभी उनकी पोस्टिंग का आदेश आ गया.

इंडिया टुडे ने मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद से यह जानने की कोशिश की कि आंध्र प्रदेश में आईएएस अधिकारियों को अक्सर हफ्तों या महीनों तक बिना किसी पोस्टिंग के क्यों रखा जाता है. यह सवाल इसलिए भी अहम है कि मुख्यमंत्री नायडू हर तीन महीने में कलेक्टरों का सम्मेलन करते हैं, जिसमें सभी आईएएस अधिकारी शामिल होते हैं. इन बैठकों में वह प्रशासन की दक्षता बढ़ाने और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर देते हैं. रिपोर्ट लिखे जाने तक मुख्य सचिव की ओर से कोई जवाब नहीं मिला था.

कुछ अधिकारी इस स्थिति पर नाराजगी जताते हैं. उनका कहना है कि जहां कुछ अधिकारियों को बिना किसी आधिकारिक वजह के पद नहीं दिया जाता वहीं दूसरे अधिकारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ डाल दिया जाता है.

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