जर्दालु आम कैसे बना पीरपैंती की महिलाओं की नई पहचान?

भागलपुर के पीरपैंती में अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से जर्दालु आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिली लेकिन बागों से विदेशी बाजार तक के इस सफर ने यहां की महिलाओं को रोजगार के नए अवसर और नई पहचान भी दी

एफपीओ सदस्य बेबी देवी जर्दालु आम के साथ
एफपीओ सदस्य बेबी देवी जर्दालु आम के साथ

बिहार के पीरपैंती के बागों से जब चुने गए जर्दालु आमों की पहली खेप दुबई के लिए रवाना हुई, तब ट्रकों में सिर्फ फलों की पेटियां नहीं थीं. उनके साथ जा रहे थे सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं के सपने, उनका आत्मविश्वास और वर्षों की मेहनत का सम्मान.

कभी स्थानीय मंडियों तक सीमित रहने वाला बिहार का जीआई टैग प्राप्त जर्दालु आम आज संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बाजारों तक पहुंच रहा है. इस बदलाव के केंद्र में हैं पीरपैंती की महिलाएं, जिन्होंने खेतों की मेड़ से निकलकर ग्लोबल वैल्यू चेन में अपनी पहचान बनाई है. इस परिवर्तन की मजबूत नींव रखी है अदाणी फाउंडेशन ने, जिसने निर्माणाधीन पीरपैंती पावर प्रोजेक्ट के आसपास के गांवों में विकास की जमीन तैयार की.

अगस्त 2026 में अपने 30 साल पूरे कर चुका अदाणी फाउंडेशन, एग्रो पॉइंट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के साथ मिलकर जर्दालु आम की वैल्यू चेन के हर चरण को मजबूत कर रहा है. फाउंडेशन ने अब तक एग्रो पॉइंट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, ब्रांडिंग, बाजार और वैल्यू एडिशन के माध्यम से मजबूत किया है. इसका परिणाम यह हुआ कि किसान अब सिर्फ आम नहीं बेच रहे, बल्कि गुणवत्ता, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट के जरिए अपने प्रोडक्ट का बेहतर दाम भी हासिल कर रहे हैं. इस पूरी प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है. 

एफपीओ सदस्य बेबी देवी कहती हैं, “जब हमने अपने हाथों से पैक किए गए जर्दालु आम को दुबई जाते देखा तो लगा कि हमारी मेहनत दुनिया तक पहुंच गई है. यह सिर्फ आम का निर्यात नहीं, बल्कि गांव की महिलाओं के आत्मविश्वास की भी उड़ान है.” 

महिलाओं की जिंदगी में बदलाव

ब्रांडिंग से लेकर पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं. आज पीरपैंती की महिलाएं सिर्फ बगीचों में काम नहीं करतीं. वे आम की तुड़ाई से लेकर छंटाई, ग्रेडिंग, सफाई, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट की हर महत्वपूर्ण प्रक्रिया में जिम्मेदारी निभा रही हैं. उनकी बारीक समझ और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता ने जर्दालु आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार की कसौटी पर खरा उतारा है.

छोटी पसाहीचक गांव की एफपीओ सदस्य सुनीता देवी कहती हैं, “पहले हम आम स्थानीय व्यापारियों को उनकी बताई कीमत पर बेच देते थे. एफपीओ से जुड़ने के बाद हमें बेहतर बाजार मिला, वैज्ञानिक तरीके सीखे और निर्यात की प्रक्रिया समझ में आई. अब मेरी आय बढ़ी है. मैं बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्च और बचत में योगदान देती हूं. सबसे बड़ी बात, अब परिवार के फैसलों में मेरी राय भी सुनी जाती है.”

भागलपुर के पीरपैंती में अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से मजबूत हुए एफपीओ ने जर्दालु आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया. इसके साथ ही सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को आय, पहचान और नेतृत्व का नया अवसर मिले.

गांव में लौटा आत्मविश्वास

जब पीरपैंती के जर्दालु आम दुबई के लुलु मॉल और उसकी चेन के बाजारों तक पहुंचे तो गांव के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं थी. यह सिर्फ एक्सपोर्ट नहीं था बल्कि उस विश्वास की जीत थी कि ग्रामीण भारत की मेहनत भी दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंच सकती है.

एफपीओ की निदेशक मंजू देवी मानती हैं कि इस पहल ने महिलाओं की सोच बदल दी है. “एफपीओ ने केवल हमारी आय नहीं बढ़ाई बल्कि महिलाओं को सीखने, नेतृत्व करने और आगे बढ़ने का मंच दिया है. आज हमें विश्वास है कि गांव की महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं.”

अदाणी फाउंडेशन के प्रशिक्षण ने महिलाओं और युवतियों को वैज्ञानिक बागवानी, गुणवत्ता मानक, फसल कटाई के बाद प्रबंधन, स्वच्छता और पैकेजिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया. अब गांव की बेटियां खेती को केवल परंपरागत काम नहीं बल्कि सम्मानजनक व्यवसाय और उद्यमिता के अवसर के रूप में देखने लगी हैं. 

अब एग्रो पॉइंट एफपीओ, अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से आम प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन इकाई स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इससे आम आधारित उत्पादों का उत्पादन होगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और महिलाओं के नेतृत्व में नए उद्यम विकसित होंगे. यह पहल सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है. इसका उद्देश्य पीरपैंती को जर्दालु आम आधारित ग्रामीण उद्यमिता का मॉडल बनाना है.

आज पीरपैंती की कहानी साबित करती है कि जब सही प्रशिक्षण, मजबूत संस्थागत सहयोग और बाजार तक पहुंच मिलती है तो बदलाव केवल खेतों और बगीचों में नहीं दिखता बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, परिवारों की खुशहाली और पूरे समाज की सोच में दिखाई देता है. दुबई तक पहुंचा जर्दालु आम सिर्फ बिहार की मिठास नहीं ले गया बल्कि अपने साथ यह संदेश भी लेकर गया कि अवसर मिलने पर गांव की महिलाएं दुनिया के किसी भी मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं.

Read more!