टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की जांच से खुलेंगी यूपी के हथियार नेटवर्क की कड़ियां?

टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में सीतापुर और आजमगढ़ की दो महिलाओं की गिरफ्तारी से हथियारों की सप्लाई के नेटवर्क पर सवाल उठे हैं. बाबा सिद्दीकी हत्याकांड और यूपी में पकड़े गए हथियार तस्करों के पुराने मामलों की कड़ियां भी जांच के दायरे में हैं

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टाइगर श्रॉफ पर हमले के 2 शूटर हरियाणा के रहने वाले हैं. (Photo: ITG)

मुंबई में 18 अक्टूबर को अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग की जांच में उत्तर प्रदेश का कनेक्शन सामने आया है.  इस मामले में गिरफ्तार चार लोगों में सीतापुर की 30 वर्षीय राधा और आजमगढ़ की 23 वर्षीय बबीता शामिल हैं. दोनों हरियाणा के सोनीपत में रह रही थीं. इनके अलावा सोनीपत के ही 21 वर्षीय कुणाल और 19 वर्षीय सुमित को भी गिरफ्तार किया गया है. 

जांचकर्ताओं को संदेह है कि दोनों महिलाओं ने हथियारों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले कैरियर की भूमिका निभाई थी. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिलाओं को हथियारों की आपूर्ति करने वाले लोगों से किसने मिलवाया, उन्हें मुंबई जाने के लिए किसने कहा और फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियार को हमलावरों तक पहुंचाने में उनकी क्या भूमिका थी. 

जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क को अमेरिका में बैठा अनिल पंडित संचालित कर रहा था. उसके लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का संदेह है. हालांकि इस कथित संबंध और नेटवर्क में प्रत्येक आरोपी की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.

सीतापुर के पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल के मुताबिक राधा के माता-पिता ने पुलिस को जानकारी दी है कि उसकी शादी करीब दस साल पहले हुई थी और पांच साल पहले उसका तलाक हो गया था. वह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर में रह रही थी और एक प्राइवेट कंपनी में मजदूरी करती थी. 

राधा के माता-पिता के मुताबिक वह साल में एक बार अपने गांव आती थी और इस बार दिवाली के आसपास आने वाली थी. एसपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि पुलिस ने राधा के पैतृक गांव में भी उसके बैकग्राउंड की जांच की है. आजमगढ़ के एसएसपी अनिल कुमार के मुताबिक, दिल्ली और मुंबई पुलिस की संयुक्त टीम ने पूछताछ के लिए कोटियार गांव से बबीता को हिरासत में लिया था. 

मामले में गिरफ्तार दो महिलाएं

उन्होंने बताया कि बबीता ने करीब दो से तीन साल पहले एक पैकेजिंग यूनिट में काम किया था. दोनों महिलाओं की पृष्ठभूमि की जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि उनका आपराधिक नेटवर्क से संपर्क कैसे बना और क्या वे पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रही थीं.

अमृतसर से दिल्ली होते हुए मुंबई पहुंचा हथियार

पुलिस के मुताबिक इस मामले में हथियारों की आवाजाही की कड़ी पंजाब से शुरू होती है. कुणाल हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आया था. उसकी मुलाकात हरियाणा के हरसाना गांव के एक दोस्त के जरिये अनिल पंडित से हुई थी. आरोप है कि पंडित के निर्देश पर कुणाल और सुमित अमृतसर से एक पिस्तौल और 20 कारतूस लेकर आए. इसके बाद कुणाल ने राधा को हथियार के साथ मुंबई जाने के लिए राजी किया. 

पुलिस के अनुसार, 15 अक्टूबर को कुणाल राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन ले गया. वहां कथित तौर पर पिस्तौल राधा के बैग में छिपाई गई. दोनों महिलाएं 17 अक्टूबर को मुंबई के दादर रेलवे स्टेशन पहुंचीं. जांचकर्ताओं का दावा है कि मुंबई में एक नाबालिग लड़के ने उनके होटल के पास राधा से वह बैग ले लिया. 

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि बैग लेने वाला नाबालिग कौन था, उसे हथियार किसके निर्देश पर सौंपा गया और इसके बाद पिस्तौल किन लोगों तक पहुंची. अगली शाम मुंबई के जुहू इलाके में मोटरसाइकिल सवार तीन हमलावरों ने टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलियां चलाईं. जांचकर्ताओं के मुताबिक फायरिंग के बाद अनिल पंडित ने कुणाल से हमलावरों के भागने की व्यवस्था करने को कहा था. इस दावे की जांच के साथ पुलिस आरोपियों के बीच संचार और संपर्कों की कड़ियों को भी खंगाल रही है.

राधा और बबीता 18 अक्टूबर को मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना हुईं. 20 अक्टूबर को दोनों को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पकड़ लिया गया. कुणाल और सुमित को सोनीपत से गिरफ्तार किया गया. इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने अदालत से चारों की औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति ली और तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड हासिल की. 

जानकार बताते हैं कि इस घटनाक्रम में यूपी का संबंध दोनों महिलाओं की मूल पृष्ठभूमि तक सीमित है या वे हथियारों की सप्लाई करने वाले किसी व्यापक नेटवर्क का हिस्सा थीं, यह जांच का अहम सवाल है. फिलहाल उनकी गिरफ्तारी और पुलिस की पूछताछ के आधार पर उनकी कथित भूमिका की पड़ताल की जा रही है. 

बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में यूपी कनेक्शन

12 अक्टूबर 2024 को महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में कथित तौर पर शामिल दो शूटर शिव कुमार गौतम और धर्मराज कश्यप बहराइच जिले के रहने वाले थे. इस मामले में एक अन्य आरोपी गुरमेल सिंह हरियाणा का निवासी था. जांचकर्ताओं ने इस मामले में बहराइच के एक कबाड़ व्यापारी द्वारा कथित तौर पर हमलावरों को पिस्तौलें मुहैया कराने के आरोपों की भी पड़ताल की थी.

बाबा सिद्दीकी की हत्या की जांच में भी यूपी कनेक्शन सामने आया था (फाइल फोटो)

लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने सिद्दीकी की हत्या की जिम्मेदारी ली थी. इसके बाद जांच में शूटरों की पृष्ठभूमि, हथियारों की उपलब्धता और अलग-अलग राज्यों में मौजूद संपर्कों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई थी. हालांकि किसी व्यक्ति का बहराइच से होना और किसी दूसरे मामले में यूपी की महिलाओं की गिरफ्तारी अपने आप में दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध साबित नहीं करता. 

इस हत्याकांड ने यह सवाल जरूर उठाया था कि महाराष्ट्र में अंजाम दिए जाने वाले अपराधों के लिए शूटर और हथियार दूसरे राज्यों से किस तरह जुटाए जाते हैं. अलग-अलग राज्यों में रहने वाले लोगों के बीच संपर्क, हथियारों की खरीद और उन्हें निर्धारित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था ऐसे मामलों की जांच को जटिल बनाती है. 

लखनऊ और गोरखपुर के हथियार नेटवर्क

उत्तर प्रदेश में हथियारों की कथित सप्लाई से जुड़े दूसरे मामलों ने भी इस जांच को व्यापक संदर्भ दिया है. नवंबर 2024 में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने लखनऊ निवासी प्रिंस कैलाश विश्वकर्मा और उसके कथित साथी सज्जन कुमार उर्फ दीपक को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया था. सज्जन कुमार बहराइच का रहने वाला बताया गया था. दोनों के पास से दो-दो पिस्तौलें बरामद हुई थीं. 

महाराष्ट्र पुलिस को संदेह था कि हथियारों की कथित सप्लाई और मुंबई में चल रही आपराधिक गतिविधियों के बीच संबंध हो सकता है. इनमें बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों की कड़ियां भी जांच के दायरे में थीं. हालांकि, बाबा सिद्दीकी की हत्या करने वाले शूटरों के साथ इन दोनों आरोपियों का कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हो पाया था. इसलिए इस मामले को टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना से जोड़ने के लिए भी अलग से साक्ष्य जरूरी होंगे. 

सितंबर 2025 में एसटीएफ ने गोरखपुर में अवैध हथियारों के नेटवर्क से जुड़े पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया था. उनके पास से .32 बोर की चार पिस्तौलें, एक रिवॉल्वर और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे. जांचकर्ताओं का आरोप था कि यह नेटवर्क मध्य प्रदेश और हरियाणा से हथियार लाकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में उनकी आपूर्ति करता था. इस मामले में मुख्य आरोपियों के गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा से कथित संबंधों की भी जांच की जा रही थी. 

लखनऊ और गोरखपुर के मामलों से यह संकेत मिलता है कि यूपी में हथियारों की खरीद, परिवहन और वितरण से जुड़े अलग-अलग नेटवर्क जांच एजेंसियों के सामने आ चुके हैं. लेकिन इन मामलों का टाइगर श्रॉफ पर हमले से कोई साझा संबंध है, इसका अभी प्रमाण नहीं है. 

इस पूरे घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश का कनेक्शन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हालिया मामले में गिरफ्तार दो महिलाएं सीतापुर और आजमगढ़ की मूल निवासी हैं जबकि पहले के मामलों में बहराइच, लखनऊ और गोरखपुर से जुड़े लोगों के नाम सामने आए थे. अब पुलिस अधिकारियों की जांच, आरोपियों के बयान और हथियारों की बरामदगी से मिलने वाले साक्ष्य ही यह स्पष्ट कर सकेंगे कि यूपी के लोगों की भूमिका अलग-अलग मामलों तक सीमित है या अंतरराज्यीय हथियार सप्लाई के किसी बड़े तंत्र से जुड़ी हुई है.

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