फूड वॉर्निंग लेबल पर सुप्रीम कोर्ट के 13 सवाल, FSSAI को 10 दिन का वक्त
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से पूछा कि पैकेज्ड फूड में ज्यादा चीनी, नमक और फैट होने पर चेतावनी लेबल को लेकर क्या व्यवस्था होनी चाहिए

इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी
सुप्रीम कोर्ट ने एक विस्तृत आदेश में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और केंद्र सरकार से पैकेज्ड फूड के लिए प्रस्तावित फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FoPL) व्यवस्था के कई पहलुओं पर जनहित को ध्यान में रखते हुए फिर से विचार करने को कहा है.
10 सितंबर के आदेश में कहा गया, "FoPL खरीदारी के दौरान उपभोक्ताओं को सोच-समझकर फैसला लेने में मदद करने और लंबे समय में उत्पादों में बदलाव लाने की दिशा में बड़ी प्रगति करेगा. इससे हमारे आसपास के खान-पान को ज्यादा स्वस्थ बनाने में भी मदद मिलेगी."
इसके साथ अदालत ने निर्देश दिया, "अगर केंद्र (सरकार) खुद ऐसा करता है तो बहुत अच्छा है, नहीं तो हम आगे के निर्देश जारी करेंगे."
अदालत सरकार के इस रुख से सहमत नहीं थी कि उसे खाद्य लेबलिंग के अंतरराष्ट्रीय मानकों, खासकर विकसित देशों में लागू मानकों को मानने की जरूरत नहीं है. न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पूछा, "क्या भारत को एक अविकसित देश ही बने रहना चाहिए?"
अदालत ने FSSAI से अलग-अलग मुद्दों पर 13 सीधे सवाल पूछे. इनमें FoPL को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का आधार, पहले चरण में दो या उससे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाले पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होने वाले उत्पादों तक इसे सीमित करने का कारण, लाल षट्भुज वाले चेतावनी चिह्नों के इस्तेमाल और आकार, लेबल पर मध्यम रूप से प्रसंस्कृत और अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बीच अंतर करने की जरूरत, और कुल चीनी बनाम अतिरिक्त चीनी तथा वसा के इस्तेमाल जैसे मुद्दे शामिल हैं.
अदालत ने चित्र वाले चेतावनी चिह्नों, उनकी जगह और अनिवार्य रूप से लागू करने को लेकर भी स्पष्टता मांगी.
याचिकाकर्ता ‘3 एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी ( 3S and Our Health Society)’ की ओर से पेश अधिवक्ता राजीव शंकर द्विवेदी ने कहा कि अदालत ने FSSAI के सामने तर्कसंगत सवाल रखे हैं और FSSAI के नियमों और रेगूलेशन की अपनी व्याख्या के आधार पर जवाब मांगे हैं.
द्विवेदी के मुताबिक, "अदालत ने अलग-अलग सिफारिशों का गहराई से आकलन किया है और FSSAI से पूछा है कि वह अपने सुझावों और सिफारिशों को उन प्रस्तावों के साथ कैसे जोड़ेगा." उन्होंने कहा कि अब गेंद FSSAI के पाले में है.
उनका यह भी कहना था, "अदालत ने आदेश में हमारे सुझावों को स्वीकार करके पर भरोसा जताया है. साथ ही FSSAI के जवाब पर अपनी टिप्पणी देने के लिए हमें समय भी दिया है."
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को 10 दिनों के भीतर हलफनामे के जरिए अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी. FSSAI से जवाब के लिए अदालत ने ये 13 सवाल पूछे हैं:
* FSSAI की ओर से प्रस्तावित दोनों चरणों को लागू करने के लिए उचित और तय समयसीमा क्या होगी?
* पहले चरण में ‘दो या उससे अधिक’ चिंता वाले न्यूट्रिएंट्स की मात्रा अधिक होने वाले खाद्य उत्पादों और कुछ खास मीठे पेय को शामिल करने और दूसरे चरण में ‘किसी एक’ चिंता बढ़ाने वाले न्यूट्रिएंट की मात्रा अधिक होने वाले खाद्य उत्पादों को शामिल करने के FSSAI के प्रस्ताव का आधार क्या है?
* FSSAI यह कैसे तय करेगा कि कौन से खास मीठे पेय पहले चरण के प्रस्ताव के दायरे में आएंगे? साथ ही, ऐसे पेय में चिंता बढ़ाने वाले खास न्यूट्रिएंट्स की तय सीमा क्या होगी?
* चिंता बढ़ाने वाले हर न्यूट्रिएंट की तय सीमा तय करते समय क्या FSSAI FoPL में खाद्य श्रेणी 2 और 3 के बीच के अंतर को ध्यान में रखना चाहता है?
* चिंता बढ़ाने वाले हर पोषक तत्व की तय सीमा तय करते समय क्या FSSAI FoPL में खाद्य समूह B (मध्यम रूप से प्रसंस्कृत, बिना एडिटिव्स) और C (अत्यधिक प्रसंस्कृत, एडिटिव्स के साथ) के बीच के अंतर को ध्यान में रखना चाहता है?
* क्या 29 अक्टूबर 2021 को हुई हितधारकों की बैठक में बताए गए अनुसार वसा और चीनी की तय सीमा ‘कुल’ चीनी और ‘सैचुरेटेड फैट’ के आधार पर तय की जानी है? इसके अलावा, FoPL के लिए वसा की मात्रा की गणना में ट्रांस-फैट के स्तर को किस तरह शामिल किया जाएगा?
* यह देखते हुए कि औसत भारतीय उपभोक्ता लाल रंग को मांसाहारी सामग्री से जोड़ने का आदी है, क्या FSSAI को FoPL के लिए रंग के अपने चयन पर फिर से विचार करना जरूरी होगा?
* FoPL में इस्तेमाल किए जाने वाले ‘लाल षट्भुज’ का आकार क्या होगा? क्या इसकी माप तय होगी या पैकेज की सतह के क्षेत्रफल के अनुपात में तय की जाएगी? क्या FoPL में इस्तेमाल होने वाले अक्षरों का आकार खुद षट्भुज के आकार के अनुपात में होगा? ऐसे षट्भुज को किस तरह और कहां लगाया जाएगा?
* FoPL में चिंता बढ़ाने वाले हर न्यूट्रिएंट के लिए अलग-अलग चित्र वाले संकेत नहीं होने की स्थिति में FSSAI उपभोक्ताओं की अलग-अलग समझ, साक्षरता और पढ़ने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था को कैसे लागू करेगा?
* FSSAI ने दो या उससे अधिक चिंता बढ़ाने वाले न्यूट्रिएंट्स के लिए अलग-अलग और स्वतंत्र षट्भुज देने के बजाय संयुक्त/मिश्रित/एकल षट्भुज का सुझाव क्यों दिया?
* FoPL लागू होने के बाद कृत्रिम प्रिजर्वेटिव, इमल्सीफायर आदि के इस्तेमाल में संभावित बढ़ोतरी को FSSAI कैसे नियंत्रित करेगा?
* FoPL को अनिवार्य बनाने वाले अंतिम नियम अधिसूचित होने के बाद क्या स्वैच्छिक रूप से इसका पालन करने की कोई अवधि प्रस्तावित है? अगर हां, तो कितने समय के लिए?
* केंद्र सरकार स्कूल स्तर पर पाठ्यक्रम, कार्यक्रमों, कार्यशालाओं आदि के जरिए (i) पैकेज्ड फूड की चीजों पर दी गई जानकारी, जिसमें पोषण संबंधी जानकारी, FoPL आदि शामिल हैं, को समझने के तरीके और (ii) पोषण संबंधी समझ के अन्य पहलुओं को कैसे शामिल करने का प्रस्ताव रखती है?
ये सवाल FSSAI की ओर से प्रस्तावित FoPL मानकों की वैज्ञानिक तरीके से जांच करने की अदालत की कोशिश नजर आते हैं. खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने पैकेज्ड उत्पादों के लिए लाल रंग के षट्भुज वाले चेतावनी लेबल का प्रस्ताव दिया था. इनमें ‘HIGH FAT’, ‘HIGH SUGAR’, ‘HIGH SALT’ और/या ‘HIGHLY SWEETENED’ लिखा होना था. इन सभी को एक ही षट्भुज में शामिल किया जाना था और इसे दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव था.
पहले चरण में चेतावनी सिर्फ उन उत्पादों पर लागू होती जिनमें अतिरिक्त चीनी, नमक और अतिरिक्त सैचुरेटेड फैट में से दो या उससे अधिक की मात्रा ज्यादा हो. इसमें कुछ खास मीठे पेय भी शामिल होते.
दूसरे चरण में अगर किसी एक चिंता वाले न्यूट्रिएंट की मात्रा तय सीमा से ज्यादा होती तो उत्पाद पर चेतावनी लेबल लगाना जरूरी होता.
FSSAI ने चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट के लिए चेतावनी लेबल की सीमा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) की भारतीयों के लिए आहार संबंधी दिशा-निर्देश (DGI 2024) के आधार पर प्रस्तावित की थी.
FSSAI ने सुझाव दिया है कि चेतावनी लेबल का फॉन्ट पैकेज्ड फूड के पीछे दी गई पोषण तालिका में इस्तेमाल होने वाले छोटे, आमतौर पर 6 से 8 पॉइंट आकार के फॉन्ट से सिर्फ ‘एक पॉइंट बड़ा’ हो.
याचिकाकर्ता ने दो पोषक तत्वों को आधार बनाने, दो चरणों में लागू करने और छोटे फॉन्ट आकार समेत कई मुद्दों को चुनौती दी है. उसका कहना है कि ये उद्योग के पक्ष में मौजूद एक रास्ता है.
वहीं, पैकेज्ड फूड उद्योग ने प्रति 100 ग्राम के आधार पर गणना करने के बजाय प्रति सर्विंग के आधार पर गणना करने की मांग की है.
फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल को लेकर उपभोक्ता क्या चाहते हैं? इस पर लोकलसर्किल्स ने 1,08,000 लोगों के बीच सर्वे किया. इसमें 80 फीसदी लोगों ने कहा कि अगर किसी उत्पाद में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा है, तो FSSAI को शुरुआत से ही चेतावनी लेबल अनिवार्य करना चाहिए. सिर्फ 12 फीसदी लोगों ने प्रस्तावित दो चरणों वाली व्यवस्था का समर्थन किया.
वहीं, सर्वे में शामिल 88 फीसदी उपभोक्ताओं ने कहा कि फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल बड़ा, साफ दिखाई देने वाला और तुरंत नजर आने वाला होना चाहिए. सिर्फ 10 फीसदी लोगों ने कहा कि FSSAI की ओर से प्रस्तावित आकार पर्याप्त है.
FSSAI ने पैकेज के पीछे दी गई पोषण संबंधी जानकारी की तालिका से चेतावनी लेबल का आकार एक पॉइंट बड़ा रखने का प्रस्ताव दिया है.