ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों नहीं थमेगा कांग्रेस का आंदोलन, सचिन पायलट ने बताई वजह

'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई' में कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी होने के नाते कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वह अपनी आवाज उठाए और सरकार के सामने एक विकल्प पेश करे

कांग्रेस नेता सचिन पायलट

कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने हाल ही में 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई' के एक सत्र के दौरान लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन अपने अभियान को उसके 'तार्किक परिणति' तक लेकर जाएंगे.

पायलट ने इस आंदोलन को युवाओं, मध्य वर्ग और किसानों के बीच बढ़ती बेचैनी से जोड़ा. उन्होंने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह लोगों की इस नाराजगी को राजनीतिक मंच दे, खासकर तब जब वोटर लिस्ट में बदलाव के दौरान गड़बड़ियों के आरोप लग रहे हैं.

विपक्षी दलों के इस अभियान में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मतदाताओं को कथित तौर पर गलत तरीके से वोट देने के अधिकार से वंचित करने के आरोपों को लेकर कुमार के इस्तीफे की मांग की गई है. कांग्रेस ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग की है. चुनाव आयोग (EC) के SIR को संभालने के तरीके को लेकर विपक्ष और BJP के बीच टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है.

पायलट ने कहा, “मैं भविष्य के बारे में तो नहीं बता सकता लेकिन एक बात जरूर कह सकता हूं कि मुझे लोगों के बड़े वर्ग में बेचैनी साफ नजर आ रही है.” उन्होंने कहा कि लोगों को लग रहा है कि 'कुछ गड़बड़ है' और इसे ठीक करने की जरूरत है.

पायलट के लिए यह आंदोलन सिर्फ सड़कों पर प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी होने के नाते कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वह अपनी आवाज उठाए और सरकार के सामने एक विकल्प पेश करे. उन्होंने कहा, “अगर लोगों को प्लान बी या कोई दूसरा विकल्प चाहिए तो हमें वह विकल्प देने के लिए मौजूद रहना चाहिए.”

अभियान जारी रखने की बात साफ करते हुए पायलट ने कहा कि कांग्रेस या INDIA गठबंधन इस आंदोलन से 'पीछे नहीं हटेगा'. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन केंद्र तक सीमित प्रदर्शनों तक नहीं रहना चाहिए बल्कि राज्यों में भी इसे लगातार आगे बढ़ाया जाना चाहिए

कांग्रेस के संगठन से जुड़े प्रयासों का जिक्र करते हुए पायलट ने कहा कि पार्टी ने नौ दिनों में ब्लॉक, जिला और राज्य की राजधानी के स्तर पर तीन प्रदर्शन किए हैं. उन्होंने कहा कि आंदोलन को मिल रही प्रतिक्रिया से बड़े पैमाने पर लोगों की नाराजगी का पता चलता है. राजनीतिक दलों को बदलाव लाने की कोशिश करने से पहले इस नाराजगी को समझना होगा.

सचिन पायलट का इस दौरान यह भी कहना था, “पहले हमें यह मानना होगा कि चीजों को ठीक करने की जरूरत है.” उन्होंने कहा कि फिलहाल राजनीतिक चुनौती यह है कि लोगों की चिंताओं को समझा जाए और उन्हें अपनी बात रखने का सही रास्ता दिया जाए.

पायलट का यह बयान ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के बढ़ते प्रदर्शनों के बीच आया है. इस टकराव ने चुनाव में पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता में लोगों के भरोसे को लेकर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं.

पायलट का संदेश साफ था कि आंदोलन कुछ अलग-अलग प्रदर्शनों तक सीमित रहकर खत्म नहीं होगा. पार्टी चुनाव आयोग पर दबाव बनाए रखने और अपने अभियान को 'तार्किक परिणति' तक पहुंचाने का इरादा रखती है.

सत्र की मुख्य बातें :

सचिन पायलट

  • “लोगों के एक बड़े तबके में बेचैनी और असंतोष साफ दिखाई दे रहा है.”
  • “लोगों को लग रहा है कि कुछ गड़बड़ है, जिसे ठीक करने की जरूरत है.”
  • “अगर लोगों को प्लान बी या किसी दूसरे विकल्प की जरूरत है तो उसे देने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए.”
  • “इस आंदोलन से पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है.”
  • “हम तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक अपने अभियान को उसके तार्किक अंजाम तक नहीं पहुंचा देते.”

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