CM रेवंत रेड्डी की मांग पर मोदी सरकार सांसद-विधायक बनने की न्यूनतम उम्र 21 साल करेगी?

जेन ज़ी प्रदर्शन की तारीफ करते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 साल से घटाकर 21 साल करने की मांग की है

CM रेवंत रेड्डी ने सांसद और विधायक बनने के लिए उम्र सीमा घटाने की मांग की
CM रेवंत रेड्डी ने सांसद और विधायक बनने के लिए उम्र सीमा घटाने की मांग की

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र घटाने की मांग की है. उन्होंने केंद्र सरकार से संविधान में संशोधन कर लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 साल से घटाकर 21 साल करने का आग्रह किया है.

उनका तर्क है कि भारत की बड़ी युवा आबादी को कम उम्र में ही विधायिका और शासन में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. कांग्रेस नेता की यह मांग ऐसे समय आई है जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन ने पूरे देश का ध्यान खींचा और कई राज्यों में युवाओं के विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले.

इसके अलावा, रेवंत रेड्डी ने कहा कि राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र भी 30 साल से घटाकर 25 साल की जानी चाहिए. उन्होंने 25 जुलाई को हैदराबाद में एक युवा सम्मेलन में यह मांग उठाई. उसी दिन जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था.

रेवंत रेड्डी ने कहा कि संविधान संशोधन की मांग वाला प्रस्ताव पारित करने के लिए अगस्त के पहले सप्ताह में तेलंगाना विधानसभा और विधान परिषद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा.

विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा जाएगा. इंडिया टुडे से बातचीत में रेड्डी ने कहा कि उनकी यह मांग मौजूदा परिस्थितियों और युवाओं की आकांक्षाओं और उनकी क्षमता और खासतौर पर परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर हुए जेन ज़ी के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए की गई है.

उन्होंने कहा, "मैं इस उम्र सीमा में बदलाव के प्रस्ताव पर अपनी पार्टी के नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी चर्चा करूंगा ताकि इसे राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का एजेंडा बनाया जा सके. मैं INDIA गठबंधन के नेताओं और विभिन्न दलों के सांसदों से भी मिलूंगा ताकि इस मुद्दे पर देशभर में बहस शुरू हो और समर्थन जुटाया जा सके."

रेवंत रेड्डी ने याद दिलाया कि राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए 1988-89 में 61वें संविधान संशोधन के जरिए संविधान के अनुच्छेद 326 में बदलाव कर मतदान की उम्र 21 साल से घटाकर 18 साल की गई थी. उन्होंने कहा कि अब जरूरत इस बात की है कि युवा जल्दी राजनीति में आएं और अच्छे नेता व प्रशासक बनें. इसके लिए उन्होंने सिंगापुर और जर्मनी की व्यवस्था का भी उदाहरण दिया.

रेड्डी ने इंडिया टुडे से कहा, "अगर कोई 21 साल की उम्र में IAS अधिकारी बन सकता है और ऐसे जिले का प्रशासन संभाल सकता है जहां एक दर्जन से ज्यादा विधानसभा क्षेत्र और दो लोकसभा सीटें हों तो उसी उम्र में कोई विधायक या सांसद क्यों नहीं बन सकता?" उन्होंने अपने गृह जिले महबूबनगर का उदाहरण भी दिया.

उन्होंने कहा, "आज प्रतिभाशाली युवा IAS और IPS अधिकारी बन रहे हैं. स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं और यूनिकॉर्न कंपनियां चला रहे हैं. फिर हमारे होनहार युवाओं को चुनावी राजनीति में आने के लिए 25 साल तक इंतजार क्यों करना चाहिए?"

रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 21 साल है. उन्होंने कहा, "अगर कोई 21 साल की उम्र में मेयर, सरपंच या जिला परिषद का अध्यक्ष बन सकता है तो यही उम्र सीमा विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए क्यों नहीं हो सकती?"

तेलंगाना के मुख्यमंत्री चाहते हैं कि उम्र सीमा में बदलाव का यह संविधान संशोधन केंद्र सरकार परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया के साथ ही लाए. उन्होंने कहा, "हमारे प्रधानमंत्री, जो सिर्फ 'मन की बात' करते हैं, उन्हें अब युवाओं की बात भी सुननी चाहिए. युवा शक्ति सवाल पूछ रही है."

तेलंगाना बीजेपी ने रेवंत रेड्डी के इस प्रस्ताव का विरोध किया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने इसे भ्रामक और ध्यान भटकाने वाली राजनीति बताया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अपनी नाकामियों और अधूरे वादों से युवाओं का ध्यान हटाने के लिए यह मुद्दा उठा रही है.

बीजेपी नेता राव ने 27 जुलाई को कहा, "संविधान निर्माताओं, खासकर डॉ. भीमराव आंबेडकर ने दूरदर्शिता दिखाते हुए विधायकों के लिए न्यूनतम उम्र 25 साल तय की थी क्योंकि जनप्रतिनिधियों के पास अनुभव होना जरूरी है."

उन्होंने दावा किया कि ढाई साल में रेवंत रेड्डी सरकार ने चुनावी वादों में से एक भी वादा पूरा नहीं किया है. उन्होंने कहा कि 12,000 करोड़ रुपये की फी-रिइम्बर्समेंट नहीं हो पाने की वजह से करीब 20 लाख छात्र प्रभावित हैं. छात्रों के मूल प्रमाणपत्र कॉलेज रोककर बैठे हैं जिससे उन्हें भारी परेशानी हो रही है. वहीं, तेलंगाना की 17 सरकारी यूनिवर्सिटी बजट और शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रही हैं.

राव ने आरोप लगाया, "रेवंत रेड्डी ने यूनिवर्सिटी को 1,000 करोड़ रुपए देने का वादा किया था लेकिन अब तक एक रुपया भी जारी नहीं किया गया. शिक्षकों को वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिल रहे हैं जिससे पूरी शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है."

बीजेपी नेता ने खुद शिक्षा विभाग संभाल रहे रेवंत रेड्डी से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की और तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के सबसे युवा विधायकों में से किसी एक को यह अहम विभाग सौंप दिया जाए.

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